जब तक मैं अपनी सोच को एक्सीक्यूट नहीं कर लेता, तब तक संतुष्टि नहीं मिलती
लखनऊ। म्यूजिक इंडस्ट्री में अपनी अलग और मजबूत पहचान बना चुकीं सिंगर निखिता गांधी इन दिनों अपने नए गाने तू ही दिसदा को लेकर चर्चा में हैं, जो फिल्म भूत बंगला का हिस्सा है. अपनी खास आवाज और वर्सेटिलिटी के लिए जानी जाने वाली निकिता ने हाल ही में एक इंटरव्यू दिया जिसमें उन्होंने म्यूजिक इंडस्ट्री में काम करने के अनुभव, रिकॉर्डिंग प्रोसेस, आशा भोसले के निधन और अपने करियर से जुड़ी कई अहम मुद्दों पर खुलकर बात की।
आज के समय में लगातार हिट गाने देना कैसा लगता है?
मैं बस अपने काम पर फोकस करती हूं. कौन- सा गाना हिट हो रहा है या नहीं, इस पर ज्यादा ध्यान नहीं देती. मेरा काम है अच्छा गाना गाना, और अगर लोगों को पसंद आ रहा है तो वो मेरे लिए बोनस है।
क्या कभी ऐसा हुआ कि बिना ब्रीफ के काम करना पड़ा?
हाँ, ऐसा हुआ है. एक बार मुझे ब्रीफ नहीं मिला था और मुझे ए आर रहमान सर से डांट पड़ी, जबकि गलती मेरी नहीं थी. लेकिन मैंने कुछ नहीं कहा. उस अनुभव से मैंने सीखा कि स्टूडियो में जाते ही आपको जो भी मिले—ट्यून, स्क्रैच—उसे बार-बार सुनते रहना चाहिए और खुद को उसमें डुबो देना चाहिए, ताकि डिलीवरी बेहतर हो सके।
एक कलाकार के तौर पर परफेक्शन को आप कैसे देखती हैं?
ये बहुत नॉर्मल है कि हमें अपने काम में हमेशा और बेहतर करने का मन करता है. कई बार लगता है कि इस लाइन को थोड़ा अलग तरीके से गाया जाए, थोड़ा स्माइल डाल दी जाए तो और अच्छा लगेगा. जब तक मैं अपनी सोच को एक्सीक्यूट नहीं कर लेता, तब तक संतुष्टि नहीं मिलती।
अलग-अलग स्टाइल में गाना कितना जरूरी है?
मैं कभी ये सोचकर नहीं गाता कि मुझे अपनी रेंज दिखानी है. लेकिन मुझे अलग-अलग तरह के गाने मिले, जिससे मेरी वर्सेटिलिटी सामने आई. कुछ कलाकार एक खास स्टाइल में माहिर होते हैं और वही उनकी पहचान बनती है, और कुछ कई स्टाइल में काम करते हैं. दोनों ही चीजें खास हैं।
बड़े म्यूजिक डायरेक्टर्स के साथ काम करने का अनुभव कैसा रहा?
मैंने कई बड़े म्यूजिक डायरेक्टर्स के साथ काम किया है और हर किसी से कुछ नया सीखने को मिला. खासकर शुरूआत में मुझे बहुत कुछ सीखने को मिला—डिसिप्लिन, फोकस और प्रोफेशनलिज्म. आजकल गाने तुरंत रिकॉर्ड होते हैं, इसलिए आपको जल्दी तैयार रहना होता है।
आपने कई भाषाओँ में गाना गाया है, यह कितना चुनौतीपूर्ण होता है?
यह थोड़ा मुश्किल जरूर होता है, लेकिन टीम का सपोर्ट मिलता है. ट्रांसलेटर्स और गाइड्स मदद करते हैं. जब आप बार-बार किसी भाषा में गाते हैं तो कॉन्फिडेंस भी आ जाता है।
आपने बॉलीवुड और साउथ दोनों इंडस्ट्री में काम किया है, आपको क्या फर्क महसूस हुआ?
अगर मैं दोनों इंडस्ट्री की बात करूं तो एक बड़ा फर्क जो मैंने महसूस किया है, वो म्यूजिक और म्यूजिशियन्स को मिलने वाले सम्मान का है. साउथ इंडस्ट्री—खासकर तमिल और तेलुगु फिल्म इंडस्ट्री में—म्यूजिक डिपार्टमेंट को बहुत ज्यादा वैल्यू और प्यार दिया जाता है. वहां सिर्फ सिंगर्स ही नहीं, बल्कि कंपोजर्स और म्यूजिशियन्स को भी एक अलग पहचान और सम्मान मिलता है, जो वाकई काफी सराहनीय है. वहीं बॉलीवुड में इंडस्ट्री काफी बड़ी है, यहां बहुत ज्यादा लोग और प्रोजेक्ट्स हैं, शायद इसी वजह से वह क्लोज-निट फील थोड़ा कम नजर आता है. मैं यही चाहूंगी कि बॉलीवुड में भी म्यूजिक और म्यूजिशियन्स को उसी तरह का सम्मान और फैनडम मिले, जैसा साउथ में देखने को मिलता है, क्योंकि आखिरकार म्यूजिक ही फिल्मों की जान होता है।
क्या आजकल ओरिजिनल गाने कम हो गए हैं?
मैं इस बात से बिल्कुल सहमत नहीं हूं. मुझे लगता है कि आज भी बहुत अच्छे और क्वालिटी वाले गाने बन रहे हैं. फर्क सिर्फ इतना है कि पहले के मुकाबले अब गानों की संख्या बहुत ज्यादा हो गई है. आज के समय में हर दिन हजारों गाने रिलीज होते हैं, जिनमें से हर एक तक पहुंच पाना या उन्हें सुन पाना हर किसी के लिए संभव नहीं है. पहले कम गाने बनते थे, इसलिए वे ज्यादा सुने और याद रखे जाते थे. आज के दौर में कंटेंट की भरमार है, ऐसे में कौन सा गाना लोगों तक पहुंचता है, यह काफी हद तक प्रमोशन, प्लेटफॉर्म और आॅडियंस की पसंद पर निर्भर करता है।
आज के दौर में प्रमोशन कितना जरूरी है?
प्रमोशन बहुत जरूरी हो गया है क्योंकि आज बहुत ज्यादा गाने रिलीज होते हैं. लेकिन यह अच्छी और बुरी दोनों चीज है. जिनके पास प्रमोशन का बजट नहीं होता, वे नैचुरल वायरलिटी पर निर्भर रहते हैं।
आप स्वर्गीय आशा भोसले जी के बारे में आप क्या कहना चाहेंगी?
मैं आशा भोसले जी की बहुत बड़ी फैन रही हूं और हमेशा रहूंगी. उनके जाने की खबर हम सभी के लिए बेहद दुखद है, लेकिन उनकी विरासत हमेशा जिंदा रहेगी. एक कलाकार के तौर पर मैं उनसे काफी जुड़ाव महसूस करती हूं, खासकर उनकी वर्सेटिलिटी को लेकर. उन्होंने जिस तरह हर तरह के गाने—क्लासिकल, पॉप, रोमांटिक या कैबरे—गाए, वो सच में प्रेरणादायक है. मेरे करियर में भी वर्सेटिलिटी एक अहम हिस्सा रही है, और कहीं न कहीं मैं खुद को उनसे रिलेट कर पाती हूं. इत्तेफाक से मेरा पहला रीमेक गाना भी उनका ही था, जो मेरे लिए बहुत खास है।
ट्रोलिंग को आप कैसे देखती हैं?
मैं इसे एंजॉय करती हूं. ट्रोलिंग से गाने पर चर्चा होती है और वह और ज्यादा लोगों तक पहुंचता है. अगर लोग बात कर रहे हैं, तो वह भी एक तरह का प्रमोशन है।
आपका खुद का गाया कोई ऐसा गाना जो आपके दिल के करीब हो?
मेरे सभी गाने खास हैं, लेकिन एक गाना है घर (जब हेरी मेट सेजल) जो थोड़ा कम पॉपुलर है, लेकिन मुझे लगता है कि जिसे पता है, वह उसे बहुत पसंद करता होगा।
आप अपने फैंस को क्या मैसेज देना चाहेंगी?
बस मेरे गानों को सुनते रहिए और प्यार देते रहिए. आगे भी कई नए और एक्साइटिंग प्रोजेक्ट्स आने वाले हैं।





