फिल्म कहानी के मोर्चे पर बहुत दमदार नहीं है
लखनऊ। प्रियंका चोपड़ा जोनस की एक्शन-थ्रलिर फिल्म ‘द ब्लफ’ अपनी घोषणा के बाद से ही चर्चा में रही है। इस फिल्म ने प्रियंका को एक फुल-स्केल एक्शन स्टार के तौर पर डिजाइन किया है। तलवारबाजी से लेकर चाकुओं से लड़ाई तक, वह पूरे भरोसे और मकसद के साथ आगे बढ़ती हैं। उन्हें देखकर लगता है कि इस रोल के लिए कड़ी ट्रेनिंग ली है। हालांकि, फिल्म कहानी के मोर्चे पर बहुत दमदार नहीं है, लेकिन जब भी प्रियंका स्क्रीन पर होती हैं, दिलचस्पी बनी रहती है। फिल्म की कहानी 1846 में केमैन ब्रैक पर सेट है। यह एर्सेल (प्रियंका चोपड़ा जोनस) के बारे में है, जो एक पुरानी समुद्री डाकू है और अपने परिवार के साथ चुपचाप रहती है। अपने हिंसक अतीत को पीछे छोड़ एर्सेल अब अपने देखभाल करने वाले पति, छोटे बेटे आइजैक (वेदांतेन नायडू) और अपनी ननद (साफयिा ओकले-ग्रीन) के साथ एक शांत जिंदगी जी रही है। परिवार को यह नहीं पता कि एर्सेल कभी एक खतरनाक समुद्री डाकू थी। एर्सेल ने पिछली जिंदगी में, कैप्टन फ्रांसिस्को कॉनर के साथ काम किया था और दोनों के बीच भरोसे, महत्वकांक्षा और धोखे की बिसात पर बना एक मुश्किल रिश्ता था। उनकी यह पार्टनरशिप तब खत्म हो गई, जब एर्सेल सोना लेकर गायब हो गई, और लूट के बजाय शांति को चुना। लेकिन कहानी तब बदल जाती है जब फ्रांसिस्को उसे ढूंढता है और अपनी खोई हुई दौलत की तलाश में केमैन ब्रैक पहुंचता है। एर्सेल की शांत दुनिया अब टूटने लगती है। इसके बाद कहानी बीते हुए कल, और वर्तमान की लड़ाई में बदल जाती है। प्यार, परिवार, सबकुछ दांव पर लग जाता है। एर्सेल को मजबूरी में अपने वर्तमान को बचाने के लिए बीती जिंदगी वाले अंदाज में वापस लौटना पड़ता है।डायरेक्टर फ्रैंक ई. फ्लावर्स ने लेयर्ड स्टोरीटेलिंग की बजाय विजुअल स्केल और एक्शन पर जोर दिया है। फल्मि में कैरिबियन पानी में जहाजों, घने जंगलों, छिपी हुई गुफाओं और लड़ाई के सीन की शानदार झलक है। सिनेमैटोग्राफी और प्रोडक्शन डिजाइन जैसे टेक्निकल पहलू फल्मि को एक बेजोड़ जमीन देते हैं। लेकिन इस जमीन के नीचे, कहानी बेहद कमजोर लगती है। एर्सेल और कॉनर के बीच के इतिहास का जिक्र तो है, लेकिन उसे कभी पूरी तरह से एक्सप्लोर नहीं किया गया। अगर स्क्रिप्ट में उनके अतीत को बनाने में समय लगाया गया होता, तो उनका यह इमोशनल क्लैश और ज्यादा असरदार हो सकता था। इसी तरह, फ्रांसिस्को कॉनर और एर्सेल के कारण उसके पति बोडेन का तनाव दिखाया गया है, लेकिन उसे भी पूरी तरह से डवलप नहीं किया गया है। इन रिश्तों में ड्रामा को बेहतर बनाने का पोटेंशियल था, लेकिन फल्मि इसमें गहराई से उतरने की बजाय रफ्तार को चुनती है। इन कमियों के बावजूद, प्रियंका चोपड़ा ने पूरे भरोसे के साथ फल्मि को संभाला है। वह एक्शन सीन को आसानी से हैंडल करती हैं और फैमिली वाले इमोशनल सीन्स में भी अपनापन लाती हैं। उनकी परफॉर्मेंस एक अनुभवी एक्टर जैसी है, जो किरदार की बारीकी को समझती है। कैप्टन कॉनर के रोल में कार्ल अर्बन ने एक विलेन होने का वादा पूरा किया है। हालांकि स्क्रिप्ट में उन्हें एक्सप्लोर करने के लिए काफी लेयर्स नहीं हैं। साफिया ओकले-ग्रीन एक छोटे से रोल में हैं, जो क्लाइमेक्स में जरूरी हो जाता है। आइजैक का रोल कर रहे वेदांतन नायडू अपनी मासूमियत और नैचुरल चार्म से एक मजबूत छाप छोड़ते हैं। वह फिल्म के डार्क मोमेंट्स में इमोशनल बैलेंस देते हैं। द ब्लफ बदला लेने और दुश्मन से छुटकारा पाने के सीधे रास्ते पर चलती है। ऐसे में जो दर्शक एक बहुत गहराई वाली पीरियड कैरिबियन सागा की उम्मीद कर रहे हैं, उन्हें इसकी कहानी सिंपल और सीधी लगेगी। फिर भी, एक एक्शन ड्रामा फिल्म के तौर पर यह असर रखती है। बेहतरीन परफॉर्मेंस, सुंदर बैकग्राउंड और लड़ाई वाले एक्शन सीक्वेंस इसकी अपील को बढ़ाते हैं। हालांकि, स्क्रिप्ट और कैरेक्टर में थोड़ी गहराई होती, तो यह एक बेहतरीन फिल्म हो सकती थी।
ऐक्टर:प्रियंका चोपड़ा,कार्ल अर्बन,इस्माइल क्रूज कॉडोर्वा,सफयिा ओकले-ग्रीन,टेमुएरा मॉरिसन
डायरेक्टर :फ्रैंक ई. फ्लावर्स
रेटिंग-3.5/5





