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पापों का नाश करने वाली मोहिनी एकादशी 27 को, होगी श्रीहरि की पूजा

लखनऊ। एकादशी तिथि के दिन भगवान विष्णु और मां लक्ष्मी की पूजा-अर्चना करने का विधान है। साथ ही विधिपूर्वक व्रत किया जाता है। वैदिक पंचांग के अनुसार, हर वर्ष वैशाख माह के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि पर मोहिनी एकादशी मनाई जाती है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, इस एकादशी का व्रत करने से साधक की सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं और सुख-सौभाग्य में वृद्धि होती है। वैदिक पंचांग के अनुसार, वैशाख माह के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि की शुरूआत 26 अप्रैल को शाम 06 बजकर 06 मिनट पर शुरू होगी। वहीं, तिथि का समापन 27 अप्रैल को शाम 06 बजकर 15 मिनट पर होगा। ऐसे में 27 अप्रैल को मोहिनी एकादशी मनाई जाएगी।

मोहिनी एकादशी 2026 व्रत पारण का समय
द्वादशी तिथि पर व्रत का पारण करने का समय सुबह 05 बजकर 43 मिनट से लेकर सुबह 08 बजकर 21 मिनट तक है। इस दौरान किसी भी समय व्रत का पारण किया जा सकता है। इसके बाद अन्न-धन आदि चीजों का दान करें।
ब्रह्म मुहूर्त – सुबह 04 बजकर 17 मिनट से 05 बजकर 01 मिनट तक
विजय मुहूर्त – दोपहर 02 बजकर 31 मिनट से 03 बजकर 23 मिनट तक
गोधूलि मुहूर्त – शाम 06 बजकर 53 मिनट से 07 बजकर 14 मिनट तक
निशिता मुहूर्त – रात 11 बजकर 57 मिनट से 12 बजकर 40 मिनट तक

व्रत कथा का पाठ करें:
यह व्रत का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। व्रत कथा भगवान विष्णु द्वारा भस्मासुर को पराजित करने के आध्यात्मिक हस्तक्षेप के महत्व को दशार्ती है। आप व्रत कथा को पढ़ या सुन सकते हैं, और ऐसा माना जाता है कि इससे अपार आशीर्वाद प्राप्त होता है। जब मैंने पहली बार व्रत किया, तो यह एक अत्यंत शांतिदायक अनुभव था। मुझे भगवान विष्णु से जुड़ाव महसूस हुआ और इससे मुझे मन की शांति मिली।

प्रार्थना एवं अर्पण:
आप भगवान विष्णु को श्रद्धा और भक्ति के प्रतीक के रूप में फूल, फल और मिठाई अर्पित कर सकते हैं। ॐ नमो भगवते वासुदेवाय जैसे मंत्रों का जाप करना भी अत्यंत लाभकारी होता है।

मोहिनी एकादशी के आध्यात्मिक लाभ
आध्यात्मिक लाभों के बारे में बात करते हैं। अगर आप सोच रहे हैं कि इस व्रत को रखने से क्या लाभ होता है, तो जानिए: मोहिनी एकादशी मन और आत्मा को शुद्ध करती है। इस दिन व्रत रखने से आपके विचार शुद्ध होते हैं और आपके जीवन में सकारात्मकता आती है। ऐसा माना जाता है कि व्रत रखने से सभी पाप क्षमा हो जाते हैं और आपको भगवान विष्णु का आशीर्वाद प्राप्त होता है। मैंने स्वयं इसका अनुभव किया है। मोहिनी एकादशी का व्रत करने के बाद, मुझे आध्यात्मिक उत्थान का अनुभव हुआ और अनावश्यक चिंताओं से मुक्ति मिली। यह मन और आत्मा के लिए एक ताजगी जैसा है। लोगों का मानना ​​है कि इस व्रत को करने से आध्यात्मिक मुक्ति प्राप्त होती है और समृद्धि सुनिश्चित होती है। यदि आप पहली बार मोहिनी एकादशी का व्रत कर रहे हैं, तो मेरा सुझाव है कि आप धीरे-धीरे शुरूआत करें और एक साधारण व्रत रखें। अपनी प्रार्थनाओं पर ध्यान केंद्रित करें और हर अनुष्ठान को पूर्णत: करने का तनाव न लें। मुख्य बात यह है कि अपनी भक्ति और निष्ठा के माध्यम से आध्यात्मिक अनुभव प्राप्त करें। भले ही आप पूर्ण व्रत न रख पाएं, व्रत कथा का पाठ और प्रार्थना करने से आपके जीवन में आशीर्वाद प्राप्त होगा।

मोहिनी एकादशी व्रत की पूजा-विधि
इस पावन दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान करें। स्नान करने के बाद साफ-स्वच्छ वस्त्र धारण करें। इसके बाद घर के मंदिर की साफ- सफाई करने के बाद घी का दीपक प्रज्वलित करें। विष्णु भगवान का गंगा जल से अभिषेक करें। इसके बाद विष्णु भगवान को साफ- स्वच्छ वस्त्र पहनाएं।विष्णु भगवान की आरती करें और भोग लगाएं। विष्णु भगवान के भोग में तुलसी को जरूर शामिल करें। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार बिना तुलसी के विष्णु भगवान भोग स्वीकार नहीं करते हैं। इस बात का विशेष ध्यान रखें कि भगवान को सिर्फ सात्विक चीजों का भोग लगाया जा सकता है।

एकादशी व्रत पूजा सामग्री लिस्ट- श्री विष्णु जी का चित्र अथवा मूर्ति, पुष्प, नारियल, सुपारी, फल, लौंग, धूप, दीप, घी, पंचामृत, अक्षत, तुलसी दल, चंदन, मिष्ठान।

एकादशी के दिन इन बातों का रखें ध्यान
सात्विक भोजन करें
इस पावन दिन सात्विक भोजन करना चाहिए। एकादशी के दिन मांस- मदिरा का सेवन नहीं करना चाहिए। इस दिन पहले भगवान को भोग लगाएं, उसके बाद ही भोजन ग्रहण करें।

चावल का सेवन न करें
एकादशी के दिन चावल का सेवन नहीं करना चाहिए। इस दिन चावल का सेवन करना अशुभ माना जाता है।

दान- पुण्य करें
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार दान करने से कई गुना फल की प्राप्ति होती है। इस पावन दिन अपनी क्षमता के अनुसार दान जरूर करें।

भगवान विष्णु को तुलसी अर्पित करें
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार भगवान विष्णु को तुलसी अतिप्रिय होती है। इस पावन दिन भगवान विष्णु को तुलसी जरूर अर्पित करें।

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