लखनऊ। पंजाब के जालंधर से आया एक लड़का, उम्र सिर्फ 35 साल है। लेकिन सपने बहुत बड़े हैं। भला हो भी क्यों ना, जिन फिल्मी सितारों को उसने सिर्फ पत्र-पत्रिकाओं और फिल्मों में देखा था, आज उन्हीं के साथ पर्दे पर साथ काम करने का मौका मिल रहा है। मगर यह सब रातों -रात नहीं हुआ। इंडस्ट्री में आने और यहां आकर अपनी पहचान बनाने के लिए उसने लंबा संघर्ष किया। किस्मत ने मौका दिया और 2013 में आई पहली ही फिल्म ‘फुकरे’ ने उसकी जिंदगी बदल दी। दर्शक आज 13 साल बाद भी उसे ‘चूचा’ बुलाते हैं। जी हां, हम बात कर रहे हैं एक्टर वरुण शर्मा की, जिनकी हाल ही में नई फिल्म ‘राहु केतु’ रिलीज हुई है। एक कॉमिक एक्टर के रूप में वरुण शर्मा अपनी हर भूमिका में सराहे गए हैं। उनकी कॉमिक इमेज इतनी स्ट्रॉन्ग है कि रील हो या रियल लाइफ हर जगह उनसे कॉमिडी की उम्मीद की जाती है। वरुण इससे खुश भी हैं। वह कहते हैं, ‘मुझे लोगों को हंसाना पसंद है। लोग कहते हैं कि मैं टाइपकास्ट हो जाऊंगा, मगर मेरी कोशिश यही रहती है कि मैं लगातार लोगों का मनोरंजन करता रहूं।’
‘मम्मी को फोन कर कहता था, पैसे खत्म हो गए हैं’
आज वरुण शर्मा के लिए रोल लिखे जाते हैं, मगर स्ट्रगल तो उन्होंने भी किया है। वह बताते हैं, ‘मैं जालंधर से आया हुआ लड़का था, जिसने फिल्मी कलाकारों को सिर्फ मैगजीन में ही देखा ही था। ये सभी स्टार्स मेरे लिए आसमान के सितारों की तरह हुआ करते थे। मगर यहां आने के बाद इंडस्ट्री ने मुझे भर-भरकर मौके दिए। हालांकि मैं रिजेक्शन के दौर से भी गुजरा। ‘फुकरे’ से पहले, जब मैं थिएटर किया करता था, तो ‘अश्वत्थामा’ और ‘अंधा युग’ जैसे हार्डकोर और इंटेंस नाटकों में काम करता था। मैंने कास्टिंग डायरेक्टर का काम भी किया है। शुरूआती दिनों में मुझे काफी रिजेक्शन झेलना पड़ा। एक बार तो मेन रोल का भरोसा दिलाकर अंत में जूनियर आर्टिस्ट का छोटा-सा किरदार पकड़ा दिया गया। आॅडिशन पर आॅडिशन होते थे और रिजेक्शन भी लगातार मिलते थे। ‘नेक्स्ट टाइम, नेक्स्ट टाइम’ सुनते-सुनते मैं थक जाता। फिर मैं घर लौट आता और मम्मी को फोन करके कहता, ‘पैसे खत्म हो गए हैं, थोड़ा भेज दो ना।’ मम्मी पैसे भेज देती थीं।’
‘मैंने कभी कोई टॉक्सिसिटी नहीं सही’
वरुण कहते हैं कि उन्होंने कॉमेडी की शुरूआत ‘फुकरे’ के साथ ही की। उन्होंने कहा, ‘कॉमेडी मैंने ‘फुकरे’ से ही शुरू की। लोगों ने इन किरदारों को अपना लिया और भरपूर प्यार भी दिया। दो हीरो और तीन हीरो फिल्मों का दौर ने मुझ जैसे अदाकार के लिए मौके क्रिएट किए। मेरे लिए भूमिकाएं लिखी जाने लगीं। मैं आज शाहरुख खान, काजोल से लेकर कई बड़े प्रोडक्शन हाउस के साथ काम कर चुका हूं। मेरे लिए इंडस्ट्री बहुत वेलकमिंग रही। मैंने कभी कोई टॉक्सिसिटी नहीं सही।’
‘मां को समय देना, मेरा सबसे बड़ा लाइफ लेसन है’
सभी जानते हैं कि वरुण की मम्मी उनकी बहुत बड़ी सपोर्ट सिस्टम रही हैं। वह बताते हैं, ‘वक्त के साथ मैं अपनी जिंदगी और करियर का एक सबक तो सीख चुका हूं, जिस पर मैं इंप्लिमेंट भी कर रहा हूं और वो है कि उनसे बात करना कितना जरूरी होता है। मैं आज किसी को भी उनके फोन लॉग चेक करने कहूं, तो समझ आएगा कि आपने अपने काम से संबंधित लोगों या दोस्तों से अगर आठ-दस मिनट बात की होगी, तो अपनी मां से एक मिनट भी नहीं। आप हर बार यही कहकर फोन रख देते हैं, ‘हां खाना खा लिया, अभी करता हूं, मीटिंग में हूं, रात को बात करता हूं’ वो कॉल लॉग जो है, वो सबसे ज्यादा आपकी मां, भाई-बहन पर परिवार वालों के साथ होनी चाहिए, क्योंकि उन्हीं के साथ और ब्लेसिंग से आप यहां तक पहुंचे हैं। आपको उनको रोजाना, हमेशा वक्त देना होगा। ये मेरी लाइफ का सबसे बड़ा लेसन है, जिसे मैं भी समझते -समझते समझा हूं।’
आज लोग अपनी अंदर की बातें एआई से करने लगे हैं’
व्यवहार और रिश्तों पर अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए वरुण कहते हैं, ‘आज जो सबसे डरावनी चीज है कि हमने लोगों से बात करना छोड़ दिया है। हम एक इंसान के बजाय अक पर ज्यादा भरोसा करते हैं। आज हम अपने इमोशन्स, डर और इनसिक्योरिटीज को अक के साथ शेयर करने लगे हैं। मेरे कई दोस्तों ने बताया कि वे कैसे अक से अपनी समस्याओं का समाधान जान रहे हैं। ये हम सभी के लिए अलार्मिंग है। मुझे लगता है, आज के दौर में जो हम लोगों में कम्युनिकेशन गैप हुआ है और हम लोग बात नहीं करते, अपने सोशल मीडिया स्टेटस के जरिए सूचनाएं पहुंचाते हैं, वो ठीक नहीं है। ऐसे में हमारे अंदर बहुत कुछ जमा होता जाता है, जो स्ट्रेस, डिप्रेशन या किसी अटैक के जरिए एक बार में ही बहुत खतरनाक होकर निकल सकता है। जाहिर है, वो कहीं न कहीं तो जरूर निकलेगा ही। जार जीव को चाहे वो पशु-पक्षी हो या इंसान कम्युनिकेशन स्किल्स इसीलिए मिली है कि वे आपस में बात कर सकें। इसका इस्तेमाल बहुत जरूरी है।’





