लखनऊ। वैशाख शुक्ल पक्ष तृतीया को अक्षय तृतीया कहा जाता है। अक्षय तृतीया को परम पवित्र माना जाता है क्योंकि इस दिन किसी मुहूर्त या कल की आवश्यकता नहीं है फिर भी यदि शुभ चौघड़िया एवं शुभ मुहूर्त में किसी भी शुभ कार्य की शुरूआत किया जाए तो उसका परिणाम अक्षय प्राप्त होता है साथ ही साथ दान पुण्य का भी इस दिन विशेष महत्व माना जाता है । श्री हरि विष्णु के मानव अवतार भगवान परशुराम की जयंती प्रदोष काल में तृतीया तिथि 19 अप्रैल दिन रविवार को मिलने के कारण 19 अप्रैल दिन रविवार को ही मनाई जाएगी। जबकि उदयकालिक तृतीया तिथि 20 अप्रैल दिन सोमवार को होगा। क्योंकि तृतीया तिथि का आरंभ 19 अप्रैल दिन रविवार को दिन में 1:01 बजे से आरंभ होगा, जो 20 अप्रैल दिन सोमवार को दिन में 10:40 बजे तक व्याप्त रहेगा। ऐसी स्थिति में प्रदोष कालीन तृतीया तिथि 19 अप्रैल को एवं उदय कालिक तृतीया तिथि 20 अप्रैल को होगा ।
अक्षय तृतीया पर कौन-कौन से योग
19 अप्रैल को कृतिका नक्षत्र दिन में 9:11 बजे से आरंभ होगा, जो 20 अप्रैल दिन सोमवार को सुबह 7:36 बजे तक व्याप्त रहेगा। उसके बाद रोहिणी नक्षत्र आरंभ हो जाएगा। 19 अप्रैल को आयुष्मान योग रात में 10:42 बजे तक व्याप्त रहेगा। उसके बाद सौभाग्य योग आरंभ हो जाएगा। जो 20 अप्रैल को रात में 7:38 बजे तक व्याप्त रहेगा। इस प्रकार इस वर्ष तृतीया तिथि में आयुष्मान एवं सौभाग्य योग व्याप्त रहेगा। जो शुभ फल प्रदायक होगा।
चंद्रमा अपनी उच्च राशि वृष में दैत्यगुरु शुक्र के साथ मालव्य नामक पंचमहापुरुष राजयोग का निर्माण करते हुए गोचरीय संचरण करेगा । साथ ही कर्म फल प्रदायक ग्रह शनि मीन राशि में रहेगे। इस दिन ग्रहो की स्थिति अत्यंत ही शुभकारक एवं प्रभावकारी बन रही है। ग्रहों की स्थिति के आधार पर देखा जाए तो मालव्य नामक पंच महापुरुष योग का निर्माण हो रहा है। सूर्य अपने उच्च राशि मेष में गोचर करेंगे। चंद्रमा अपनी उच्च राशि वृष में होंगे। देवगुरु बृहस्पति अपने उच्चाभिलाषीसे स्थिति में विद्यमान रहकर इस दिन के शुभता में वृद्धि करेंगे। 19 अप्रैल को प्रदोष व्यापिनी तृतीया तिथि में त्रिपुष्कर योग प्राप्त रहेगा। जबकि 20 अप्रैल को सुबह 7:36 बजे के बाद सर्वार्थ सिद्धि योग एवं रवि योग व्याप्त रहेगा। इसके साथ ही शनि देव पूर्व दिशा में उदित भी हो जाएंगे।





