पांच दिवसीय कला कार्यशाला का प्रदर्शनी के साथ भावपूर्ण समापन
लखनऊ। लखनऊ पब्लिक स्कूल, वृंदावन योजना शाखा में सौंदर्य एवं सांस्कृतिक विकास कार्यक्रम 2026-27 के अंतर्गत फ्लोरेसेंस आर्ट गैलरी के सहयोग से आयोजित पाँच दिवसीय कला कार्यशाला का समापन आज एक अत्यंत प्रेरणादायक एवं कलात्मक वातावरण में संपन्न हुआ। यह कार्यशाला केवल तकनीकी प्रशिक्षण तक सीमित नहीं रही, बल्कि विद्यार्थियों के भीतर छिपी संवेदनशीलता, सौंदर्य-बोध और सृजनात्मक चेतना को जागृत करने का सशक्त माध्यम बनी।
कार्यशाला के अंतिम दिन कमल विषय पर आधारित विद्यार्थियों की कलाकृतियों की प्रदर्शनी ने एक विशिष्ट सौंदर्यात्मक अनुभव प्रस्तुत किया। जल की सतह पर खिलते कमल की भाँति इन चित्रों में न केवल रंगों की कोमलता और संतुलन दिखाई दिया, बल्कि विद्यार्थियों के अंतर्मन की भावनाएँ भी सजीव रूप में अभिव्यक्त हुईं। प्रत्येक कृति में प्रकृति, पवित्रता और आत्मिक उन्मेष का स्पर्श महसूस किया जा सकता था।
जानकारी देते हुए कला विभागाध्यक्ष राजेश कुमार ने बताया कि समापन समारोह के मुख्य अतिथि, लखनऊ के चित्रकार उत्तम वर्मा ने अपने सजीव चित्रण (लाइव डेमोंस्ट्रेशन) के माध्यम से विद्यार्थियों को कला की सूक्ष्मताओं से परिचित कराया। उनकी ब्रश की लय, रंगों की पारदर्शिता और वॉश पेंटिंग की बारीक परतों ने विद्यार्थियों के सामने कला को एक जीवंत साधना के रूप में प्रस्तुत किया। उन्होंने विद्यार्थियों को यह समझाया कि कला केवल देखना नहीं, बल्कि अनुभव करना और उसे संवेदनशीलता के साथ अभिव्यक्त करना है। चित्रकार उत्तम वर्मा ने विद्यार्थियों के साथ संवाद करते हुए उन्हें निरंतर अभ्यास, अवलोकन और आत्मविश्वास के साथ अपनी कलायात्रा को आगे बढ़ाने के लिए प्रेरित किया। उनके प्रेरक शब्दों ने विद्यार्थियों के भीतर एक नई ऊर्जा और कलात्मक आत्मविश्वास का संचार किया। विद्यालय की प्रधानाचार्या श्रीमती रश्मि चड्ढा ने इस पहल की सराहना करते हुए कहा कि ऐसी कार्यशालाएँ विद्यार्थियों के भीतर छिपे रचनात्मक बीज को अंकुरित करती हैं। कला उन्हें न केवल अभिव्यक्ति का माध्यम देती है, बल्कि जीवन के प्रति एक संवेदनशील दृष्टि भी प्रदान करती है। फ्लोरेसेंस आर्ट गैलरी की निदेशक श्रीमती नेहा सिंह ने कार्यशाला की सफलता पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए कहा कि उनका उद्देश्य विद्यार्थियों को पारंपरिक और समकालीन कला के मध्य एक जीवंत सेतु प्रदान करना है, जिससे वे अपनी मौलिक अभिव्यक्ति को पहचान सकें और उसे विकसित कर सकें। इस कार्यशाला का संचालन विद्यालय के कला शिक्षक श्री संदीप कुमार के मार्गदर्शन में अत्यंत सुव्यवस्थित ढंग से हुआ। उनके निर्देशन में विद्यार्थियों ने वॉश पेंटिंग की तकनीकों—जैसे रंगों की परतें, टोनल विविधता और ब्रश नियंत्रण—को न केवल सीखा, बल्कि उसे अपनी व्यक्तिगत अभिव्यक्ति के साथ जोड़ने का प्रयास भी किया। फ्लोरोसेंस आर्ट गैलरी के क्यूरेटर भूपेंद्र कुमार अस्थाना ने बताया कि यह कार्यशाला में बनी कलाकृतियों की प्रदर्शनी में केवल कलाकृतियों का प्रदर्शन नहीं, बल्कि विद्यार्थियों के भीतर विकसित होती संवेदनशील दृष्टि, कल्पनाशीलता और आत्मविश्वास का उत्सव बनकर सामने आई। कार्यशाला का यह सफल समापन एक बार पुन: यह सिद्ध करता है कि कला शिक्षा के माध्यम से विद्यार्थियों में सौंदर्यबोध, सांस्कृतिक चेतना और मानवीय संवेदनाओं का सशक्त विकास संभव है।





