back to top

सुख-समृद्धि का प्रतीक गंगा सप्तमी 23 को

गंगा सप्तमी पर स्नान-दान का है विशेष महत्व
लखनऊ। सनातन धर्म में गंगा सप्तमी का विशेष धार्मिक महत्व है। मान्यता है कि इस दिन मां गंगा धरती पर प्रकट हुई थीं। राजा भगीरथ की कठोर तपस्या से प्रसन्न होकर मां गंगा ने पृथ्वी पर अवतरण किया और उनके पूर्वजों को मोक्ष प्रदान किया। इसी पावन घटना की स्मृति में हर साल गंगा सप्तमी मनाई जाती है। इस दिन गंगा स्नान, दान और पूजा करने से व्यक्ति के पापों का नाश होता है और जीवन में सुख-समृद्धि आती है। इस दिन गंगा स्नान करना काफी पुण्य फल देने वाला होता है। इसलिए आपको इसके बारे में जरूर जान लेना चाहिए। हिंदू पंचांग के अनुसार, हर वर्ष वैशाख माह के शुक्ल पक्ष की सप्तमी तिथि को गंगा सप्तमी मनाई जाती है। दृक पंचांग के मुताबिक, साल 2026 में यह सप्तमी तिथि 22 अप्रैल की रात 10 बजकर 49 मिनट से शुरू होगी और 23 अप्रैल की रात 8 बजकर 49 मिनट तक रहेगी। चूंकि सनातन धर्म में उदया तिथि को मान्यता दी जाती है, इसलिए गंगा सप्तमी 23 अप्रैल 2026 (गुरुवार) को मनाई जाएगी।

गंगा सप्तमी क्यों मनाई जाती है?
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, गंगा सप्तमी के दिन मां गंगा का पुन: प्रकट होना माना जाता है, इसलिए यह दिन विशेष महत्व रखता है। पौराणिक कथा के अनुसार, गंगा दशहरा के दिन मां गंगा पहली बार धरती पर अवतरित हुई थीं। उस समय उनका प्रवाह इतना तीव्र था कि उसे संभालना मुश्किल हो गया। तब भगवान शिव ने गंगा को अपनी जटाओं में धारण कर उनके वेग को नियंत्रित किया। इसके बाद, जब समय उचित हुआ, तो भगवान शिव ने गंगा को अपनी जटाओं से मां गंगा को पृथ्वी पर प्रवाहित किया, ताकि भागीरथ के पूर्वजों को मोक्ष मिल सके। एक अन्य कथा के अनुसार, वैशाख मास के शुक्ल पक्ष की सप्तमी तिथि के दिन जह्नु ऋषि ने अपने कान से गंगा को पुन: प्रकट किया था। इसी घटना के कारण इस तिथि को गंगा के पुनर्जन्म के रूप में मनाया जाता है, जिसे गंगा सप्तमी कहा जाता है।

गंगा सप्तमी पूजन का महत्व
गंगा सप्तमी के दिन गंगा स्नान करने का खास महत्व होता है। इस दिन गंगा स्नान से पापों का नाश होता है। इस दिन भगवान शिव का गंगाजल से अभिषेक करने से कष्ट दूर होते हैं। सूर्य देव को अर्घ्य देने से जीवन में ऊर्जा और सफलता मिलती है। मां गंगा की पूजा से सुख, समृद्धि और सौभाग्य में वृद्धि होती है।

गंगा सप्तमी की पूजा विधि
इस दिन प्रात:काल गंगा स्नान या घर में गंगाजल से स्नान करें। इसके बाद मां गंगा, भगवान शिव और भगवान विष्णु की पूजा करें। अब दीप, धूप, फूल और नैवेद्य अर्पित करें। इस दिन गंगा स्नान के बाद दान-पुण्य करना शुभ माना जाता है।

RELATED ARTICLES

बुद्ध पूर्णिमा 1 को, शहर में होंगे विविध आयोजन

भगवान विष्णु की पूजा भी की जाती हैलखनऊ। वैशाख पूर्णिमा को ही बुद्ध पूर्णिमा कहा जाता है। इस वर्ष यह 1 मई को मनाई...

वैशाख अमावस्या आज, बन रहा सर्वार्थ सिद्धि योग

पितृ दोष से मुक्ति पाने के लिए विशेष उपाय किए जाते हैंलखनऊ। वैदिक पंचांग के अनुसार, वैशाख अमावस्या 17 अप्रैल 2026, शुक्रवार को मनाई...

अक्षय तृतीया पर राशि अनुसार करें दान, होगा शुभ

अगर इस दिन दान किया जाए तो घर में ना सिर्फ सुख-शांति आती हैलखनऊ। हिंदू धर्म में अक्षय तृतीया का दिन बहुत शुभ और...

बुद्ध पूर्णिमा 1 को, शहर में होंगे विविध आयोजन

भगवान विष्णु की पूजा भी की जाती हैलखनऊ। वैशाख पूर्णिमा को ही बुद्ध पूर्णिमा कहा जाता है। इस वर्ष यह 1 मई को मनाई...

आकांक्षा थिएटर के 49 वर्ष पूरे होने पर होगा तीन नाटकों का मंचन

तीन दिवसीय नाट्य समारोह 25 मई से लखनऊ। नगर की प्रतिष्ठित नाट्य संस्था आकाक्षा थियेटर आर्टस् लखनऊ ने अपनी स्थापना 15 अप्रैल 1977 से 15...

गुरुद्वारा यहियागंज में गुरु अंगद देव जी का प्रकाश पर्व आज

शबद कीर्तन द्वारा संगतो को निहाल करेंगेलखनऊ। ऐतिहासिक गुरुद्वारा श्री गुरु तेग बहादुर साहिब जी यहियागंज में श्री गुरु अंगद देव जी का प्रकाश...

पं. साजन मिश्र से छात्रों ने सीखी संगीत की बारीकियां

चार दिवसीय गायन कार्यशाला का तृतीय दिवस सम्पन्न लखनऊ। भातखण्डे संस्कृति विश्वविद्यालय, लखनऊ द्वारा पंडित विष्णु नारायण भातखण्डे जी की पावन स्मृति में स्थापित पीठ...

मैं बस अपने काम पर फोकस करती हूं : निखिता गांधी

जब तक मैं अपनी सोच को एक्सीक्यूट नहीं कर लेता, तब तक संतुष्टि नहीं मिलतीलखनऊ। म्यूजिक इंडस्ट्री में अपनी अलग और मजबूत पहचान बना...

कला शिक्षा से संवेदना, संस्कृति और सौंदर्य का समन्वित विकास

पांच दिवसीय कला कार्यशाला का प्रदर्शनी के साथ भावपूर्ण समापनलखनऊ। लखनऊ पब्लिक स्कूल, वृंदावन योजना शाखा में सौंदर्य एवं सांस्कृतिक विकास कार्यक्रम 2026-27 के...