शबद कीर्तन द्वारा संगतो को निहाल करेंगे
लखनऊ। ऐतिहासिक गुरुद्वारा श्री गुरु तेग बहादुर साहिब जी यहियागंज में श्री गुरु अंगद देव जी का प्रकाश पर्व कल सायं 7:30 बजे से 11 बजे तक बड़ी श्रद्धा सत्कार के साथ मनाया जाएगा गुरुद्वारा सचिव मनमोहन सिंह हैप्पी ने बताया कि डॉ गुरमीत सिंह के संयोजन में भाई करनैल सिंह जी भाई मोहन सिंह जी विशेष रूप से शबद कीर्तन द्वारा संगतो को निहाल करेंगे इस अवसर पर गुरुद्वारा साहब को विशेष फूलों एवं लाइटों से सजाया जाएगा
श्री गुरु अंगद देव जी, (भाई लहना जी) का जन्म वैशाख वदी 1, (5 वैशाख) संवत 1561, (31 मार्च, 1504) को सराय नागा (मत्ते दी सराय) जिला मुक्तसर (पंजाब) नामक गाँव में हुआ था। वह फेरू जी नामक एक छोटे व्यापारी का पुत्र था। उनकी माता का नाम माता रामो जी था (जिन्हें माता सभिराय, मनसा देवी, दया कौर के नाम से भी जाना जाता है)। बाबा नारायण दास त्रेहान उनके दादा थे, जिनका पैतृक घर मुक्तसर के पास मत्ते-दी-सराय में था। फेरू जी वापस इसी स्थान पर आ गये।
अपनी माता के प्रभाव में आकर भाई लहना जी ने दुर्गा (एक हिंदू पौराणिक देवी) की पूजा शुरू की। वे हर साल श्रद्धालुओं के एक समूह को ज्वालामुखी मंदिर ले जाया करते थे। जनवरी 1520 में उनका विवाह माता खीवी जी से हुआ और उनके दो पुत्र (दासू जी और दातू जी) और दो पुत्रियाँ (अमरो जी और अनोखी जी) थीं। बाबर के साथ आए मुगल और बलूच सैनिकों द्वारा लूटपाट के कारण फेरू जी के पूरे परिवार को अपना पैतृक गाँव छोड़ना पड़ा। इसके बाद परिवार ब्यास नदी के किनारे स्थित खदुर साहिब गाँव में बस गया, जो तरन तारन साहिब (अमृतसर शहर से लगभग 25 किलोमीटर दूर एक छोटा सा कस्बा) के पास है।





