लखनऊ। जुलाई के महीने में कई व्रत और त्योहार पड़ते हैं। हिंदी कैलेंडर के अनुसार आषाढ़ का महीना 30 जून से शुरू होगा। इसी महीने में योगिनी और देवशयनी एकादशी पड़ती है जिसका महत्व बहुत ही ज्यादा होता है। आज जानेंगे योगिनी एकादशी के बारे में। ये एकादशी भगवान विष्णु की पूजा और व्रत के लिए बहुत ही शुभ माना जाता है। धार्मिक मान्यता है कि इस दिन व्रत रखने और विष्णु जी की पूजा करने से जिंदगी के कई कष्ट दूर होते हैं। इसी के साथ ऐसी भी मान्यता है कि व्यक्ति को हर पाप से मुक्ति भी मिलती है और सुख-समृद्धि में वृद्धि का आशीर्वाद भी मिलता है। पंचांग के हिसाब से आषाढ़ महीने के कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि 10 जुलाई को शुरू होगी। तिथि के शुरूआत का समय सुबह 8:16 बजे होगा। वहीं इस तिथि का समापन अगले दिन यानी 11 जुलाई को होगा। एकादशी तिथि के समापन का समय सुबह 5:22 बजे होगा। उदया तिथि को ध्यान में रखते हुए योगिनी एकादशी 10 जुलाई को है।
योगिनी एकादशी का पारण
बात करें योगिनी एकादशी के पारण के समय की तो इसे द्वादशी तिथि पर किया जाएगा। ये तिथि 11 जुलाई को पड़ेगी। इस दिन पारण का समय दोपहर 1:50 बजे से लेकर शाम 4:36 के बीच में किया जा सकता है।
योगिनी एकादशी पूजा विधि
योगिनी एकादशी के दिन सुबह स्नान करें। इसके बाद मंदिर साफ करें। अब भगवान विष्णु और मां लक्ष्मी की तस्वीर या फिर फोटो को चौकी पर रखें। पूजा के दौरान भगवान विष्णु को गंगाजल अर्पित करें और उन्हें फूल और तुलसी दल चढ़ाएं। इस दिन व्रत रखें। पूजा के बाद भगवान विष्णु की आरती करें। भोग में केवल सात्विक वस्तुओं का ही इस्तेमाल करें और उसमें तुलसी के पत्ते जरूर शामिल करें क्योंकि भगवान विष्णु की पूजा में तुलसी का विशेष महत्व माना गया है। इस दिन भगवान विष्णु से जुड़े मंत्रों का जाप और ध्यान करना भी शुभ माना जाता है।
योगिनी एकादशी पर करें आसान उपाय
इस खास दिन पर आप एक आसान उपाय करके भगवान विष्णु को प्रसन्न कर सकते हैं। योगिनी एकादशी के दिन शाम को भगवान विष्णु के सामने घी का दीया जलाएं और तुलसी की परिक्रमा करें। मान्यता है कि इससे घर में पॉजिटिव एनर्जी आती है और रुके हुए सारे काम पूरे होने लगते हैं।
योगिनी एकादशी का महत्व
योगिनी एकादशी के दिन, श्री हरि या भगवान नारायण, भगवान विष्णु के अन्य नामों में से एक, की पूजा की जाती है। यह दिन उन भक्तों के लिए महत्वपूर्ण है जो मानते हैं कि योगिनी एकादशी व्रत या उपवास उनके जीवन में समृद्धि और आनंद प्रदान करता है। चूंकि यह व्रत वर्ष में केवल एक बार होता है, इसलिए इसे करने वालों को 88 हजार ब्राह्मणों को भोजन कराने के बराबर पुण्य प्राप्त होता है। पद्म पुराण के अनुसार, हर कोई जो धार्मिक रूप से योगिनी एकादशी के अनुष्ठानों का पालन करता है, उसके जीवन में अर्थपूर्ण परिवर्तन का अनुभव होता है।
महामंत्रों के जाप से दूर होंगे सारे कष्ट
धार्मिक मान्यता है कि इस दिन विधि-विधान से व्रत, पूजा और मंत्र जाप करने से पापों का नाश होता है तथा जीवन में सुख-समृद्धि आती है. योगिनी एकादशी के दिन सुबह स्नान के बाद भगवान विष्णु की प्रतिमा या चित्र के सामने दीपक जलाकर पूजा करें और तुलसी दल अर्पित करें. इसके बाद ॐ नमो भगवते वासुदेवाय मंत्र का श्रद्धापूर्वक जाप करें. साथ ही, ॐ विष्णवे नम: और शांताकारं भुजगशयनं पद्मनाभं सुरेशम् जैसे विष्णु मंत्रों का पाठ भी अत्यंत फलदायी माना गया है. मान्यता है कि सच्चे मन से किया गया मंत्र जाप व्यक्ति के कष्टों को दूर करता है और भगवान विष्णु की कृपा प्राप्त होती है. योगिनी एकादशी पर व्रत, दान और भक्ति के साथ मंत्र जाप करने से आध्यात्मिक शांति और पुण्य, दोनों की प्राप्ति होती है।





