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चतुर्मास 25 से, मांगलिक कार्यों पर कब लग जाएगा विराम

लखनऊ। इस साल 25 जुलाई को देवशयनी एकादशी है। इस दिन से चतुर्मास शुरू होगा। एक तरह से देव सो जाएंगे और सृष्टि का कार्यभार शिवजी देखेंगे और श्रीहरि क्षीरसागर में निंद्रा में जाएंगे। इस दौरान जप तप और ध्यान करना चाहिए। इस दिन से शुभ कार्यों पर ब्रैक लग जाएगी। आपके लिए अच्छा समय थोड़ा कठिन हो जाएगा। आपको बता दें कि चतुर्मास लगने से 10 दिन पहले ही मांगलिक कार्यों के लिए शुभ मुहूर्त नहीं है। शादी-ब्याह, गृह प्रवेश व मुंडन जैसे मांगलिक कार्यों का शुभ मुहूर्त 15 जुलाई के बाद नहीं मिलेगा। फिर 25 जुलाई को भगवान विष्णु के हरिशयनी एकादशी के दिन योग निद्रा में जाने पर चातुर्मास का प्रारंभ हो जाएगा। यहां पढ़ें गुरु के अस्त होने से क्या होगा और चतुर्मास में क्या किया जाता है।आपको बता दें कि गुरु का अस्त होना शादी विवाह के लिए शुभ नहीं माना जाता है। गुरु अगर अस्त होते हैं तो विवाह के लिए मांगलिक कार्य नहीं होते हैं। उत्थान ज्योतिष एवं आध्यात्म संस्थान के निदेशक पं. दिवाकर त्रिपाठी पूर्वांचली ने बताया कि आषाढ़ मास के कृष्णपक्ष की त्रयोदशी तिथि 12 जुलाई को सुबह 11.08 बजे देवगुरु बृहस्पति वृद्धत्व दोष में आ जाएंगे और 15 जुलाई को अस्त हो जाएंगे। इनके अस्त होने से गुरु के शुभ प्रबाव मिलने बंद हो जाएंगे।

चातुर्मास में क्या किया जाता है?
इसके बाद चतुर्मास सेआध्यात्मिक साधना, तप व आत्मशुद्धि का पवित्र समय शुरू हो जाएगा। देवशयनी एकादशी से देवोत्थानी एकादशी तक यानि चातुर्मास की अवधि में भगवान शयन काल में होंगे, इसलिए मांगलिक कार्य वर्जित माने जाते हैं। स्वामी नरोत्तमानंद गिरि वेद विद्यालय के प्राचार्य ब्रज मोहन पांडेय ने बताया कि चातुर्मास संत, संन्यासी व भिक्षु के लिए अनिवार्य माना जाता है। इस दौरान कई नियमों का पालन किया जाता है। श्रीहरि के लिए व्रत करते हैं। कोई अपनी प्रिय चीज को छोड़ देते हैं। श्रीहरि के लिए कथा, पूजन आदि पुराण, कथा आदि का आयोजन किया जाता है।

चार महीने बाद कब से शुरू होगें शुभ मुहूर्त
देवोत्थानी एकादशी के साथ ही 21 नवंबर से शहनाईयों का दौर दोबारा शुरू हो जाएगा। देवउठनी एकादशी पर सबसे उत्तम मुहूर्त रहता है। इस मुहूर्त में विवाह आदि के लिए अच्छे उसके बाद शादी-ब्याह के लिए 24, 25 व 26 नवंबर और दिसंबर में दो, तीन, चार, पांच, छह, 11 व 12 को विवाह के शुभ मुहूर्त होंगे। जिसके बाद मलमास लग जाएगा। फिर वर्ष 2027 में मकर संक्रांति से मांगलिक कार्यों का सिलसिला शुरू होगा।

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