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लखनऊ में 105 साल पहले शुरू हुई थी श्री जगन्नाथ रथयात्रा

लखनऊ। तहजीब के शहर-ए-लखनऊ का हर रंग निराला है। लक्ष्मण द्वारा बसाए गए इस शहर में जगन्नाथ पुरी की तर्ज पर रथयात्रा की शुरूआत करीब 105 साल पहले हुई थी। चौक के रानी कटरा स्थित चारों धाम मंदिर के निर्माणकर्ता कुंदनलाल-कुंजबिहारी लाल ने यात्रा की शुरूआत की थी। यहां के निवासी विष्णु त्रिपाठी ‘लंकेश’ ने बताया कि छोटी काशी के स्वरूप इलाके में नजर आता है। चौपटिया के रानी कटरा में चारों धाम मंदिर निर्माण के पीछे कथानक है कि कुंज बिहारी लाल ऐसे लोगों को यात्रा की अनुभूति कराना चाहते थे जो आर्थिक तंगी या समय के अभाव में यात्रा नहीं कर पाते थे। मंदिर में रावण दरबार के अलावा चारों धाम मंदिर व स्वर्ग-नर्क का मंदिर भी मौजूद है। रामकुमार अग्रवाल ने इसका जीर्णोद्धार कराया और इसे विस्तार दिया। श्री भगवान जगन्नाथ, माता सुभद्रा और बलभद्र को फूलों की पालकी में स्थापित किया जाता है। तहजीब के शहर में 16 जुलाई को पुरी की तर्ज पर भले ही इस बार भगवान जगन्नाथ की यात्रा नहीं निकलेगी, लेकिन श्रद्धालुओं में यात्रा को लेकर उत्साह और श्रद्धा उतनी ही रहेगी। पुराने लखनऊ से लेकर अलीगंज और अमीनाबाद से लेकर हजरतगंज तक रथयात्रा में श्रद्धालुओं का हुजूम दिखेगा। प्रवक्ता अनुराग साहू ने बताया कि 56 भोग लगाकर भगवान की पूजा होगी और श्री भगवान जगन्नाथ के जयकारे लगेंगे। फेसबुक पेज पर भगवान नजर आएंगे। भगवान श्री जगन्नाथ, सुभद्रा और बलभद्र को छप्पन भोग लगाकर चांदी का मुकुट धारण कराया जाएगा। अमीनाबाद की मारवाड़ी गली से निकली यात्रा भी आरती और फेसबुक पर भी नजर आयेगी। आरती के दौरान सेंट के साथ फूलों की वर्षा होगी। 1924 को महंत शत्रुघ्नदास ने अमीनाबाद की मारवाड़ी गली से श्री भगवान जगन्नाथ यात्रा की शुरूआत की थी। सूर्य पाठक, बृजकिशोर महेश्वरी के अलावा कई श्रद्धालु चने की दाल, मूंग और मोठ का प्रसाद चढ़ाएंगे और आरती उतारेंगे। कपूरथला के श्री भगवान जगन्नाथ मंदिर से नवविग्रह संग जगन्नाथ रथयात्रा भले ही न निकाली जाए लेकिन सोने-चांदी की झाड़ू लगाकर आरती की जाएगी।

भगवान के दर्शन का सौभाग्य मिलता है
जगन्नाथ रथ यात्रा में यह मान्यता है कि भगवान जगन्नाथ स्वयं अपने भक्तों को दर्शन देने के लिए जगन्नाथ मंदिर से बाहर आते हैं। वे अपने भाई बलभद्र और बहन सुभद्रा के साथ रथों पर विराजमान होकर नगर भ्रमण करते हैं। यह अवसर भक्तों के लिए अत्यंत पवित्र माना जाता है, क्योंकि इसमें उन्हें प्रत्यक्ष रूप से भगवान के दर्शन का सौभाग्य मिलता है। इस यात्रा में तीनों देवताओं के लिए अलग-अलग भव्य रथ बनाए जाते हैं। भगवान जगन्नाथ का रथ नंदी घोष 16 पहियों का होता है, बलभद्र जी का रथ तालध्वज 14 पहियों वाला होता है, और सुभद्रा जी का रथ दर्पदलन 12 पहियों का होता है। इन रथों को अत्यंत श्रद्धा और उत्साह के साथ भक्तों द्वारा खींचा जाता है, जो भक्ति और समर्पण का प्रतीक है।

फूलो की वर्षा के बीच नगर भ्रमण:
जगन्नाथ स्वामी नयन पथगामी भवतुमय, जय जगन्नाथ जय बलदेव जय मायी सुभद्रा की प्राथना के साथ फूलो की वर्षा के बीच नगर भ्रमण पर देश विदेशी फूलो से सजा रथ विराजमान होकर तथा बनारसी वस्त्र, चांदी का मुकुट धारण किये हुए भगवान जगन्नाथ भक्तो के कष्ट हरने को 16 जुलाई 4:30 बजे शहर में सबसे पहले पूरी के तर्ज पर डालीगंज स्थित माधव मन्दिर निकलेगी । महामंत्री अनुराग साहू ने बताया कि इस बार भगवान जगन्नाथ रथ महोत्सव में बाहर से कलाकार अपनी सेवा में वृन्दावन का मयूर नृत्य, उज्जैन की प्रभात फेरी में डमरू व शंख ध्वनि से स्वागत, मुम्बई गणपति उत्सव का बैंड तथा दस पंजाबी ढोल बजाकर यात्रा में अपनी सेवाए तथा वानर सेवा के जय श्री राम के जयकारे लगते चलेगे।

प्रभू को 56प्रकार का लगेगा भोग:
रथ यात्रा के मार्ग के पांच मुख्य स्थानों पर सेब, केला, अंगूर, आम, काजू, पिस्ता, बादाम, तीस से अधिक प्रकार की मिठाईयो का भोग लगाया जाएगा। जगन्नाथ जी रथ यात्रा माधव से प्रारम्भ होकर नजीरगंज, शंकरनगर, निरालानगर, श्रीकृष्ण मठ, आई टी चौराहा, बाबूगंज, फैजाबाद रोड, इक्का अड्डा, डालीगंज पुल होते हुआ डालीगंज बाजार, हसनगंज कोतवाली, माधव मंदिर चौराह पर सम्पन्न होगी। रथ के यात्रा भक्तो द्वारा झाड़ू लगा कर अपनी सेवा देगे।

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