लखनऊ। अधिकमास को भगवान विष्णु का मास कहा जाता है। इस माह को भगवान विष्णु ने अपना नाम (पुरुषोत्तम) दिया है, इसलिए इसको पुरुषोत्तम माह भी कहते हैं। ये माह मलमास भी कहा जाता है. ये माह हर तीन साल में आता है और इसी में एकादशी व्रतों की संख्या 24 से बढ़कर 26 हो जाती है। एकादशी का व्रत भगवान विष्णु को समर्पित किया गया है. इस दिन व्रत के साथ-साथ विधिपूर्वक श्रीहरि का पूजन किया जाता है। अधिकमास में पद्मिनी और परमा एकादशी पड़ती है. परमा एकादशी बड़ी विशेष मानी जाती है. पुराणों में परमा एकादशी दुर्लभ सिद्धियों को प्रदान करने वाली मानी गई है. इस दिन भगवान श्री हरि की उपासना करने से दरिद्रता दूर होती है और वैकुंठ धाम में स्थान मिलता है. इस साल परमा एकादशी का व्रत 11 जून को रखा जाएगा। परमा एकादशी पर पूरे दिन सर्वार्थ सिद्धि योग का शुभ संयोग बन रहा है। ज्योतिष शास्त्र में सर्वार्थ सिद्धि योग शुभ फलदायी माना जाता है। परमा एकादशी के दिन पूजन का ब्रह्म मुहूर्त सुबह 04 बजकर 02 मिनट से सुबह 04 बजकर 42 मिनट तक रहेगा। पूजन का अमृत काल सुबह 05 बजकर 59 मिनट से सुबह 07 बजकर 30 मिनट तक रहेगा। अभिजित मुहूर्त सुबह 11 बजकर 53 मिनट से दोपहर 12 बजकर 49 मिनट तक रहेगा।
इसलिए खास मानी जाती है परमा एकादशी
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, परमा एकादशी का व्रत सभी पापों का नाश करता है. ये व्रत जीवन में सुख और समृद्धि लाता है। भगवान विष्णु की कृपा दिलाता है. मोक्ष की प्राप्ति का मार्ग प्रशस्त करता है. माना जाता है कि जो भक्त इस दिन श्रद्धा से व्रत रखता है, उसे हजारों यज्ञों के समान पुण्य फल प्राप्त होता है। ज्योतिष शास्त्र में भी परमा एकादशी का दिन बड़ा विशेष माना जाता है. ज्योतिष में ये आध्यात्मिक ऊर्जा को बढ़ाने वाला माना जाता है. इस दिन ध्यान, जप और पूजा करने से मानसिक शांति प्राप्त होती है, ग्रह दोषों के प्रभाव से राहत मिलती है।
परम एकादशी का महत्व
परम एकादशी का विशेष महत्व सनातन धर्म में अत्यंत पुण्यदायी माना गया है। यह व्रत अधिक मास के कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि को रखा जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, परम एकादशी का व्रत करने से व्यक्ति को भगवान विष्णु की विशेष कृपा प्राप्त होती है और जीवन के सभी कष्ट धीरे-धीरे दूर होने लगते हैं। मान्यता है कि इस दिन विधि-विधान से भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की पूजा करने से पापों का नाश होता है और मोक्ष की प्राप्ति का मार्ग प्रशस्त होता है। साथ ही जो व्यक्ति श्रद्धा और नियमपूर्वक परम एकादशी का उपवास रखता है, उसे कई यज्ञों के बराबर पुण्य फल मिलता है और पूर्वजों की आत्मा को भी शांति मिलती है।
परमा एकादशी पूजा विधि
परमा एकादशी के दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और साफ-सुथरे वस्त्र पहनें. इसके बाद भगवान विष्णु के सामने व्रत का संकल्प लें. भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी को पंचामृत से स्नान कराएं. फिर भगवा को पीले फूल, धूप, दीप, और नैवेद्य अर्पित करें। पूजा में तुलसी अवश्य शामिल करें। पूजा के दौरान परमा एकादशी व्रत कथा का पाठ करें. विष्णु जी के मंत्रों का जाप करें। अंत में आरती से पूजा का समापन करें।





