लखनऊ। राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी) 2020 के नियमों को लेकर विश्वविद्यालयों और छात्रों के बीच तकरार बढ़ती जा रही है। ताजा मामला भातखण्डे संस्कृति विश्वविद्यालय का है। जहां राष्ट्रीय शिक्षा नीति के अंतर्गत वर्ष 2022 में चार-वर्षीय बीपीए (बैचलर आॅफ परफॉर्मिंग आर्ट्स) में प्रवेश लेने वाले छात्र अब अधर में लटके महसूस कर रहे हैं। छात्रों ने इस विसंगति को लेकर राज्यपाल आनन्दीबेन पटेल को एक प्रार्थना-पत्र भेजकर न्याय की गुहार लगायी है।
छात्रों का कहना है कि नई शिक्षा नीति 2020 के स्पष्ट प्रावधानों के अनुसार, जो विद्यार्थी 4-वर्षीय स्नातक (रिसर्च या आॅनर्स के साथ) पूर्ण करते हैं, उन्हें केवल 1-वर्षीय परास्नातक (मास्टर्स) करने का अवसर मिलना चाहिए। छात्रों का चार वर्षीय बीपीए कोर्स पूरा हो चुका है, लेकिन अब विश्वविद्यालय प्रशासन द्वारा एमपीए (मास्टर आॅफ परफॉर्मिंग आर्ट्स) की अवधि 2 वर्ष बताई जा रही है। छात्रों ने आरोप लगाया कि यदि 4 वर्ष के स्नातक के बाद भी 2 वर्ष का परास्नातक करना पड़ा तो कुल अध्ययन अवधि 6 वर्ष हो जाएगी। यह सीधे तौर पर एनईपी 2020 की मूल भावना के खिलाफ है और उनके शैक्षणिक समय व करियर के साथ खिलवाड़ है। छात्रों का कहना है कि उन्हें इस व्यवस्था से पूरी तरह अनभिज्ञ रखा गया। उन्होंने राज्यपाल से मांग की है कि मामले में हस्तक्षेप कर उन्हें 1-वर्षीय एमपीए में प्रवेश की सुविधा दिलाई जाए।
स्टेप बाई स्टेप लागू हुई एनईपी
इस पूरे मामले पर स्थिति स्पष्ट करते हुए भातखंडे संस्कृति विश्वविद्यालय की कुलपति प्रो. मांडवी सिंह ने कहा कि विश्वविद्यालय में एनईपी स्टेप बाई स्टेप (चरणबद्ध तरीके से) लागू की गई है। बीपीए पाठ्यक्रम में साल 2024 से पूरी तरह से एनईपी लागू हुई है, इसलिए उस सत्र या उसके बाद के जो छात्र होंगे, उन्हें ही नियमानुसार एक वर्षीय एमपीए कोर्स की सुविधा मिल सकेगी। उससे पूर्व के जो भी छात्र हैं, उन्हें दो वर्ष में ही अपना एमपीए पूरा करना होगा। कुलपति ने यह भी साफ किया कि विवि के प्रॉस्पेक्टस में भी यह बात पूरी तरह से स्पष्ट थी कि बीपीए चार वर्ष और एमपीए दो वर्ष का होगा।





