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औरंगाबाद की घटना पर मायावती ने केंद्र एवं प्रदेश सरकार पर साधा निशाना

-दर्दनाक घटनाओं को गंभीरता से लें सरकारें, करें पूरी आर्थिक मदद

लखनऊ। बहुजन समाज पार्टी की राष्ट्रीय अध्यक्ष मायावती ने शुक्रवार को महाराष्ट्र के औरंगाबाद के पास मालगााड़ी द्वारा रौंदे जाने से घरों को पैदल लौटने वाले लाचार व मजबूर 19 प्रवासी मजदूरों की मौत व कुछ के घायल होने की खबर पर गहरा दुःख व रोष व्यक्त करते हुए कहा कि घटना से संबंधित दृश्य बहुत ही विचलित करने वाले हैं। उन्होंने सवाल किया है कि यह सब केवल केन्द्र व राज्य सरकारों की लापरवाही व असंवेदनशीलता का ही परिणाम नहीं तो और क्या है?

मायावती ने कहा कि ऐसे में कुदरत से प्रार्थना है कि वह पीड़ित परिवारों को इस दुःख को सहन करने की शक्ति दे और साथ ही सरकारों को भी इनके मामलों में थोड़ी सद्बुद्धि भी दे। उन्होंने कहा कि केन्द व राज्य सरकारें इस प्रकार की दर्दनाक घटनाओं को पूरी गंभीरता से लें। पीड़ित परिवारों की पूरी आर्थिक मदद करें तथा लाॅकडाउन के कारण बदहाल प्रवासी मजदूरों को रेल, बस व हवाई किराया की मुफ्त व्यवस्था करके उन्हें उनके घरों तक सुरक्षित पहुंचाये। देश की सरकारें आखिर किस दिन गरीब-लाचार जनता के काम आएगी?

बसपा मुखिया ने कहा कि एक तरफ तो सरकारें भूखे व लाचार लाखों प्रवासी मजदूरों से घोर अमानवीय व्यवहार करते हुए उनसे क्रूरता के साथ किराया भाड़ा भी वसूल रही है तो दूसरी तरफ अमीरों के लिए दयावान बनी हुई है, जो सरकार की गरीब व मजदूर-विरोधी व धन्नासेठ-समर्थक आचरण नहीं तो और क्या है, जिसकी हमारी पार्टी घोर निन्दा करती है।

मायावती ने कहा कि वह ऐसा इसलिए कह रही हैं कि बड़े व ऊंचे घरों के बच्चों को उनके घरों तक पहुंचने के लिए तो सरकार ने हर प्रकार की मुफ्त सुविधा आदि काफी हद तक उपलब्घ करा रही है, लेकिन उन गरीबों व मजदूरों आदि के लिए हांथ पर हांथ धरे लगातार बैठी रही जिन्हें लाॅकडाउन के कारण नौकरी से निकाल दिया गया है तथा जो पैसे के अभाव में दूसरे राज्यों में बड़े बेआसरा व बेसहारा एवं निरीह भूखे तड़पने को मजबूर हैं। ऐसे में वे लोग आखिर जायेंगे तो कहां जायेंगे।

मजबूरीवश उन्हें पैदल, साइकिल व ठेला आदि पर हजारों किलोमीटर के अपने घर के सफर पर यूपी, बिहार, उड़ीसा एवं अन्य और राज्यों से भी पलायन करने को मजबूर होना पड़ रहा है जिन्हें रास्ते में भी कोई पूछने वाला भी नहीं है। यहाँ तक के रास्ते में चलते-चलते लोग मर जा रहे हैं व महिलायें बच्चों को रास्ते में ही जन्म देने को भी मजबूर हैं। ऐसे ही 19 पलायनकारी प्रवासी मजदूरों की आज रेल दुर्घटना में दर्दनाक मौत हो गई और सरकारों ने दुःख जताकर अपने कर्तव्य की इतिश्री कर ली।

मायावती ने कहा कि बसपा लाॅकडाडन के खिलाफ नहीं है बल्कि इस मामलें में वह केन्द्र सरकार के साथ है, लेकिन इतना जरूर है कि वर्तमान की अति-जटिल समस्या व मानवीय त्रास्दी देश को नहीं झेलनी पड़ती। अगर केन्द्र सरकार देश में लाॅकडाउन की घोषणा, नोटबन्दी की तरह, अचानक व बिना पूरी तैयारी के ही करने के बजाए नियोजित तौर पर सप्ताह भर का समय देश-विदेश में रहने वाले लोगों को देती तो करोड़ों प्रवासी मजदूर आदि सतर्क होकर किसी भी तरह से अपनी व अपने परिवार आदि के सुरक्षा की कुछ व्यवस्था जरूर कर लेते। देश को वर्तमान त्रस्दी व जिल्लत आदि से नहीं गुजरना पड़ता। अभी भी सरकार को इन मामलों में गंभीर होने की जरूरत है वरना गरीबों की जाने ऐसे ही जाती रहेंगी और सरकारें केवल बयानबाजी करती रहेंगी।

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