लखनऊ। गर्मी को दृश्टिगत रखते हुए नवाब वाजिद अली शाह प्राणि उद्यान, लखनऊ द्वारा अलग-अलग वन्य जीवों के लिए उनकी आवश्यकता के अनुरूप उपाय किये गये हैं। वन्य जीवों को स्वच्छ पीने के पानी की व्यवस्था सुदृढ़ की गयी है। शाकाहारी वन्य जीवों के भोजन में मौसमी फल तथा सब्जियों को सम्मिलित किया गया है। टाइगर, जिराफ, हिरन, आदि के लिए बाड़ों में स्प्रिंकलर सिस्टम लगाये गये हैं जिससे ये वन्य जीव ठण्डे पानी का आनन्द ले सकें तथा वह समय-समय पर पानी में भीग कर खुद को ठण्डा रख सकें। अक्सर हिरनों को स्प्रिकंलर के नीचे खेलते हुए भी देखा जाता है। स्प्रिकंलर सिस्टम से सूक्ष्म जलवायु सुदृढ़ होती है एवं आर्द्रता कम होती है, जिससे वन्य जीवों को गर्मी से निजात मिलती है। डक पॉण्ड में पक्षियों को धूप, गर्मी से बचाव हेतु हरा पर्दा लगाया गया है। वन्य जीवों के बाड़ों में पॉण्ड्स की मरम्मत कर उनमें शीतल जल की व्यवस्था की गयी है, जिससे वह उसमें नहा कर स्वयं को गर्मी से राहत दे सकें। वन्य जीवों के बाड़ों में गर्मी से बचाव हेतु कूलर लगे हुए हैं। इस हेतु इस हेतु पूरे प्राणि उद्यान में लगभग 50 से अधिक कूलर लगाये गये हैं। पक्षी बाड़ों में गर्मी से बचाव हेतु हरा पर्दा, चटाई एवं खस इत्यादि लगाये गये हैं।
प्राणि उद्यान का भ्रमण करने आने वाले दर्शकों हेतु पीने के पानी की व्यवस्था चुस्त-दुरूस्त की गयी है, जिससे दर्शकों को पीने के पानी की कोई समस्या न हो।
बाड़े में कैद है वन्य जीव
भीषण गर्मी से इंसान ही नहीं वन्य जीव भी खासे परेशान हैं। नवाब वाजिद अली शाह प्राणि उद्यान के बब्बर शेर, टाइगर, बारासिंघा, चिम्पान्जी व व्हाइट टाइगर समेत अन्य वन्य जीव गर्मी में बाड़े से बाहर नहीं निकल रहे हैं। सुबह व शाम बाड़े से बाहर निकल रहे हैं। दिन में तेज धूप होते ही बाड़े में कैद हो जा रहे हैं। बच्चे व अन्य दर्शक वन्य जीवों को न देखने से मायूस हैं। बच्चे बाड़े के बाहर वन्य जीवों को बाहर आने के लिए शोर शराबा भी कर रहे हैं लेकिन वन्य जीवों पर इसका कोई असर नहीं हो रहा है।
बाड़ों में लगे 50 कूलर :
प्राणि उद्यान की निदेशक ने बताया कि वन्य जीवों को तेज धूप और लू से बचाने के लिए 50 कूलर और स्प्रिंकलर लगाए गए है। इन बाड़ों में कूलर चलाने के साथ ही पानी के फौव्वारों से वन्य जीवों को गर्मी से राहत दी जा रही है। पीने के पानी की व्यवस्था के साथ ही मौसमी फल और हरी सब्जियां परोसी जा रही हैं। बब्बर शेर, टाइगर, सांप घर, काला हिरण, हींग डियर, बारासिंघा, लॉयन टेल मंकी, चिम्पान्जी, व्हाइट टाइगर, मछलीघर, उल्लू घर, अन्य वन्य जीव के बाड़े में कूलर लगाए गए हैं। बाड़े में पानी की फुहार के लिए स्प्रिंकलर लगाये गये हैं। स्प्रिंकलर सुबह 11 से शाम चार बजे के बीच रोटेशन के आधार पर चलाए जा रहे हैं। टाइगर एवं व्हाइट टाइगर, हिमालयन भालू के बाड़ों में हौद बनाकर पानी भरा गया है। गमी और लू के थपेड़ों से बचाने के लिए बाड़ों में विशेषकर पक्षी बाड़ों में साइड में चटाई शीट लगायी गयी है।
हिरणों के लिए बाड़ों में स्प्रिंकलर सिस्टम :
हिरणों के लिए बाड़ों में स्प्रिंकलर सिस्टम लगाए गए हैं, जिससे ये वन्य जीव ठंडे पानी का आनन्द ले सकें, उनके द्वारा समय-समय पर पानी में भीगकर खुद को ठंडा रख सकें। वन्य जीवों के बाड़ों में गर्मी से बचाव के लिए कूलर लगाए गए हैं। इसके लिए लगभग 50 से अधिक कूलर लगाए गए हैं। वन्य जीवों में बब्बर शेर, बाघ, सांप घर, चिंपान्जी, व्हाइट टाइगर, मछली घर, उल्लू घर, वन्य जीव चिकित्सालय के वार्ड में रखे गए। वन्य जीवों के लिए बाड़ों में कूलर लगाया गया है। बाड़ों को ठंडा रखने के लिए स्प्रिंकलर लगाया गया है।
काले हिरण, हॉग डियर, बारासिंघा, बार्किंग डियर, चीतल समेत पक्षियों के बाड़ों में स्प्रिंकलर लगाए गए हैं। इनको 11 से 4 बजे के बीच रोटेशन के आधार पर चलाया जाता है। इससे उनको गर्मी से निजात मिलती है. विभिन्न पक्षियों यथा काकाटील, गोल्डेन फीजेंट्स, सिल्वर पीजेंट्स, सारस, लोहा सारस, नीले-पीले मकाऊ, मोर, सफेद मोर आदि के बाड़ों में वातावरण को ठंडा करने के लिए माइक्रो फॉगर लगाए गए हैं।
फल-सब्जी की मात्रा बढ़ाई गई
वन्य जीवों के खाने में ताजे फल, फूल, सब्जी जैसे खीरा, ककड़ी, हरी पत्तेदार सब्जी, तरबूज आदि की मात्रा बढ़ा दी गई है। गर्मी एवं लू के थपेड़ों से बचाने के लिए बाड़ों में विशेषकर पक्षी बाड़ों में साइड में चटाई, शीट लगाई गई है। वन्य जीवों के खाने की डाइट में भी परिवर्तन किया गया है. वन्य जीवों को जाड़े में दिए जाने वाले अंडे और अन्य गर्म खाद्य पदार्थों को बंद कर दिया गया है। उन्होंने बताया कि इसके अतिरिक्त अन्य कोई भी इंतजाम जो उपयुक्त लगेंगे, उनको भी समय-समय पर किया जाएगा. इन उपायों से वन्य जीवों को न केवल गर्मी से बचाने में मदद मिलेगी. बल्कि, वन्य जीवों को गर्मी के मौसम में भी यथा सम्भव सुविधाजनक एवं ठंडा वातावरण उपलब्ध कराया जा सकेगा।
अजगर-कोबरा और वनराज के लिए कूलर, पक्षियों के बाड़ों में खस की चटाई
चिड़ियाघर में पशु-पक्षियों को इस भीषण गर्मी से बचाने की तैयारी शुरू हो गई। 11 सौ से ज्यादा वन्य जीवों को स्वच्छ पीने के पानी से लेकर कूलर, हरी चटाई और खस की शीट लगाकर उन्हें लू से बचाया जाएगा। शाकाहारी वन्य जीवों के भोजन में मौसमी फल दिए जाएंगे। जू में विदेशी जानवरों में टाइगर, जिराफ, हिरन, आदि के लिए बाड़ों में स्प्रिंकलर सिस्टम लगाये गये हैं जो पानी की फैव्वारे से पशु-पक्षी ठंडे पानी का आनन्द ले सकेंगे। स्प्रिंकलर से निकलने वाली पानी की नन्हीं बूंदे विदेशी पक्षियों को यहां की गर्मी से राहत दिलाएगी। स्प्रिंकलर सिस्टम से सूक्ष्म जलवायु बेहतर होती और आर्द्रता कम होती है, जिससे वन्य जीवों को गर्मी से निजात मिलती है। नवाब वाजिद अली शाह प्राणि उद्यान के निदेशक ने बताया कि गर्मी शुरू होने से लेकर अगस्त माह तक पशु-पक्षियों के रहन-सहन में बदलाव किया गया है। 50 से ज्यादा कूलर बाड़ों में लगाया गया हैं। डक पॉण्ड में पक्षियों को धूप, गर्मी से बचाव के लिए हरा पर्दा लगाया गया है। वन्य जीवों के बाड़ों में पॉण्ड्स की मरम्मत कर उनमें शीतल जल की व्यवस्था की गयी है। जिससे यह उसमें नहाकर स्वयं को गर्मी से राहत दे सकें। पक्षी बाड़ों में गर्मी से बचाव के लिए हरा पर्दा, चटाई और खस की व्यवस्था की गई है। प्राणि उद्यान का भ्रमण करने आने वाले दर्शकों के लिए इलेक्ट्रॉल पाउडर काउंटर पर दिया जा रहा है। पीने के पानी की व्यवस्था की गयी है, जिससे दर्शकों को पीने के पानी की कोई समस्या न हो।
डॉक्टर लगातार रहते हैं संपर्क में
उन्होंने बताया कि जंगल में जानवर रहते हैं, तो वह अपने आप को धीरे-धीरे एडजस्ट कर लेते हैं। गर्मी से राहत पाने के लिए तालाब में बैठ जाते हैं, लेकिन कैप्टिव एनिमल्स के लिए आपको विभिन्न व्यवस्था करनी पड़ती है। उन्होंने बताया कि गर्मी के मौसम में इंसानों की तरह जानवरों में कई बीमारियों की शिकायतें भी आती हैं। फर्क सिर्फ इतना है कि हम बोल देते हैं। जानवर बोल नहीं पाता, लेकिन हमारे जो कीपर्स हैं और डॉक्टर हैं, उनके लगातार आॅब्जर्वेशन में ये जानवर रहते हैं। अगर हमें जानवरों के व्यवहार में जरा भी अंतर दिखता है, तो हमारे कीपर डॉक्टर को बताते हैं और फिर डॉक्टर की सलाह पर उन्हें दवाइयां दी जाती हैं।
तालाबों की मरम्मत कर ठंडा पानी भरा
चिड़ियाघर में बने तालाबों की मरम्मत कर उनमें ठंडा पानी भरा गया है, ताकि जानवर उसमें स्नान कर सकें। पक्षियों के लिए विशेष रूप से हरे पर्दे लगाए गए हैं, जिससे उन्हें तेज धूप और गर्मी से बचाया जा सके। इसके अलावा पूरे प्राणी उद्यान में करीब 50 से अधिक कूलर लगाए गए हैं। पक्षी बाड़ों में पर्दे, चटाई और खस जैसी पारंपरिक चीजों का भी उपयोग किया जा रहा है, जिससे तापमान को नियंत्रित किया जा सके।
दर्शकों की सुविधा का भी रखा गया ध्यान
चिड़ियाघर घूमने आने वाले लोगों के लिए भी पीने के साफ पानी की पर्याप्त व्यवस्था की गई है, ताकि उन्हें किसी तरह की परेशानी न हो।
फल सब्जी की मात्रा बढ़ाई गई :
उन्होंने बताया कि इसको बीते वर्ष पायलट प्रोजेक्ट के रूप में शुरू किया गया था. इसके अच्छे परिणाम को देखते हुए इस बार इनकी संख्या बढ़ा दी गई है. इससे न केवल बाड़ा ठंडा रहता है एवं वन्य जीवों को आराम मिलता है, बल्कि आस-पास का वातावरण भी ठंडा हो जाता है. जिससे आने वाले दर्शकों को भी सुकून एवं ठंडक मिलती है।
गर्मी एवं लू के थपेड़ों से बचाने के लिए बाड़ों में विशेषकर पक्षी बाड़ों में साइड में चटाई, शीट लगाई गई है. वन्य जीवों के खाने की डाइट में भी परिवर्तन किया गया है. वन्य जीवों को जाड़े में दिए जाने वाले अंडे और अन्य गर्म खाद्य पदार्थों को बंद कर दिया गया है. वन्य जीवों के खाने में ताजे फल, फूल, सब्जी जैसे खीरा, ककड़ी, हरी पत्तेदार सब्जी, तरबूज आदि की मात्रा बढ़ा दी गई है। उन्होंने बताया कि इसके अतिरिक्त अन्य कोई भी इंतजाम जो उपयुक्त लगेंगे, उनको भी समय-समय पर किया जाएगा. इन उपायों से वन्य जीवों को न केवल गर्मी से बचाने में मदद मिलेगी. बल्कि, वन्य जीवों को गर्मी के मौसम में भी यथा सम्भव सुविधाजनक एवं ठंडा वातावरण उपलब्ध कराया जा सकेगा।





