धर्म का अर्थ अपने कर्तव्य को नैतिकता से निभाना
लखनऊ। ज्ञान और कर्म साथ चलते हैं ज्ञान के साथ किया गया कर्म ही हमें मुक्ति दिलाता है.धर्म का अर्थ अपने कर्तव्य को नैतिकता से निभाने और अर्थ का मतलब जीवन की स्थितियों को समझना ही है. ईश्वर धाम मंदिर इंदिरा नगर में आयोजित गीता ज्ञान यज्ञ कथा के चतुर्थ अध्याय के द्वितीय दिवस में यह विचार कथा व्यास महामंडलेश्वर स्वामी अनंतानंद सरस्वती महाराज ने व्यक्त किए.मानव जीवन में केवल ज्ञान या कर्म ही नहीं बल्कि जीवन में दोनों का सामंजस बेहद जरूरी है.जिससे हम निष्काम भाव से कार्य करते हुए मुक्ति मार्ग की ओर बढ़ते हैं. इससे पहले द्वितीय दिवस के कथा की शुरूआत स्वामी रामानंद सरस्वती एवं सनातन श्रुति ने विधिवत तरीके से की. महामंडलेश्वर ने कहा कि जिस प्रकार श्री कृष्ण के अंत:करण में आई विसंगतियों का निराकरण भगवान श्री कृष्ण ने किया उसी प्रकार गुरु ही हमें जीवन में सही और गलत की पहचान कराते हैं, जिससे मनुष्य अपनी प्रवृत्ति से निवृत्ति की ओर मतलब सकारात्मक सोच की ओर बढ़ते हैं और आत्मज्ञान को प्राप्त करते हैं. स्वामी अनंतानंद जी महाराज ने कहा कि मनुष्य को कर्म करने की आवश्यकता तो है लेकिन मनुष्य को उससे जुड़े परिणाम में आसक्त नहीं होना चाहिए उसे सिर्फ कर्म करना चाहिए।





