back to top

अखण्ड सौभाग्य के लिए सुहागिनें आज रखेंगी वट सावित्री व्रत

लखनऊ। शनिवार 16 मई को श्रद्धा और भक्ति का अनूठा संगम होने जा रहा है। इस दिन सुहागिन महिलाएं अपने पति की लंबी आयु के लिए वट सावित्री व्रत रखेंगी, वहीं इसी दिन न्याय के देवता भगवान शनि की जयंती भी हर्षोल्लास के साथ मनाई जाएगी। ​सीतापुर रोड स्थित हाथी बाबा मंदिर के प्रसिद्ध ज्योतिषाचार्य आनंद दुबे ने बताया कि ज्येष्ठ मास की कृष्ण पक्ष की अमावस्या को वट सावित्री व्रत किया जाता है। इस दिन महिलाएं वट (बरगद) वृक्ष का पूजन कर यमराज से अपने पति के प्राणों की रक्षा करने वाली माता सावित्री का स्मरण करती हैं। बरगद के वृक्ष में ब्रह्मा, विष्णु और महेश का वास माना जाता है। महिलाएं वृक्ष की परिक्रमा कर रक्षा सूत्र बांधती हैं और सुखद वैवाहिक जीवन की कामना करती हैं। ज्येष्ठ कृष्ण अमावस्या को वट सावित्री व्रत रखा जाता है । इसमें वट वृक्ष की पूजा की जाती है। इस व्रत को बरगदाही व्रत भी कहते हैं। महिलाएं यह व्रत अखण्ड सौभाग्य के लिये करती हैं। इस व्रत में उपवास रखते है। ये व्रत सावित्री द्वारा अपने पति को पुन: जीवित करने की स्मृति के रूप में रखा जाता है। इस बार वट सावित्री व्रत 16 मई को है। वट वृक्ष को देव वृक्ष माना जाता है। इसकी जड़ों में ब्रह्नााजी, तने में विष्णु जी का और डालियों और पत्तियों में भगवान शिव का वास माना जाता है। वट वृक्ष की पूजा से दीघार्यु, अखण्ड सौभाग्य और उन्नति की प्राप्ति होती है। ज्येष्ठ कृष्ण अमावस्या को वट सावित्री व्रत रखा जाता है। इसमें वट वृक्ष की पूजा की जाती है।

पूजा विधि:
पं. बिन्द्रेस दुबे ने बताया कि प्रात:काल स्नान आदि के बाद बांस की टोकरी में सप्त धान्य रख कर ब्रह्ना जी की मूर्ति की स्थापना कर फिर सावित्री की मूर्ति की स्थापना करते है और दूसरी टोकरी में सत्यवान और सावित्री की मूर्तियों की स्थापना करके टोकरी को वट वृक्ष के नीचे जाकर ब्रह्ना तथा सावित्री के पूजन के बाद सत्यवान और सावित्री की पूजा करके बड़ बरगद की जड़ में जल देते है। पूजा में जल, मौली, रोली, कच्चा सूत, भीगा चना, फूल तथा धूप से पूजन करते है। वट वृक्ष पूजन में तने पर कच्चा सूत लपेट कर 108 परिक्रमा का विधान है किन्तु न्यूनतम सात बार परिक्रमा अवश्य करनी चाहिए।

कच्चे धागे से मजबूत होगी रिश्तों की डोर :
सुहाग की कुशलता और समृद्धि की कामना का वट सावित्री व्रत सोमवार को है, लेकिन रविवार से इसका मान शुरू हो गया था। इस दिन सुहागिन बरगद के पेड़ के तने में 108 बार कच्चे धागे को परिक्रमा करके बांधती हैं और सात जन्मों तक रिश्ता मजबूत बना रहे इसकी कामना करती हैं। मानसनगर की रहने वाली संगीता वैसे तो हर साल तुलसी मानस मंदिर परिसर में लगे बरगद के पेड़ में धागा बांधती थीं, लेकिन इस बार गमले में धागा बांधकर पुरानी पररंपरा का निर्वहन करेंगी। आशियाना की पूजा मेहरोत्रा भी घर में गमले में ही पूजन करेंगी।

सुहागिनें मंगल कामना के लिए करेंगी उपवास:
इस दिन महिलाएं पतियों की लंबी उम्र की कामना के लिए व्रत धारण कर वट वृक्ष बरगद की पूजा करती हैं। महिलाएं अखंड सौभाग्यवती होने की मंगलकामना के साथ शनि भगवान का भी विशेष पूजन करेंगीं। वट वृक्ष की पूजा के बाद महिलाएं चने के प्रसाद के साथ व्रत खोलती हैं। इस दिन सूत, सिंदूर और फल आदि से वट वृक्ष का पूजन कर विविध पकवानों का प्रसाद वट वृक्ष को अर्पित करती हैं। वटसावित्री व्रत को लेकर बाजार में पूजन सामग्री और फलों की खरीदारी को लेकर महिलाओं में उत्साह दिखा।

वट सावित्री व्रत और शनि जन्मोत्सव एक ही दिन:
ज्येष्ठ माह की शुरूआत हो चुकी है और इस माह आने वाले सभी त्योहारों का विशेष महत्व है। इस माह की कृष्ण पक्ष की अमावस्या तिथि बेहद शुभ रहने वाली है। इस दिन शनि जयंती और वट सावित्री व्रत रखा जाएगा। बता दें वट सावित्री का उपवास ज्येष्ठ मास की अमावस्या और पूर्णिमा तिथि को रखा जाता है। मान्यता है कि इस दिन उपवास करने से अखंड सौभाग्यवती होने का आशीर्वाद मिलता है। यह उपवास पति की लंबी आयु के लिए रखा जाता है। इस दौरान कुछ महिलाएं निर्जला व्रत भी रखती है और बरगद के पेड़ की पूजा करती हैं। हिंदू पंचांग के अनुसार हर साल ज्येष्ठ माह की अमावस्या तिथि पर शनि जयंती भी मनाई जाती है। पौराणिक मान्यता के अनुसार शनि देव का जन्म ज्येष्ठ माह की अमावस्या तिथि को हुआ था। इस दिन इनकी पूजा करने से शुभ फलों की प्राप्ति होती है। शनिदेव की कृपा पाने के लिए यह तिथि बेहद ही शुभ मानी जाती है। इस तिथि पर पूजा करने से व्यक्ति के रुके हुए कार्यों को गति मिलती है।

बाजार में खूब बिकी बरगद की डाल व खरबूजा
लखनऊ। वट वृद्ध की पूजा की परंपरा को लेकर दुकानदार पांच और सात पत्तों वाली बरगद की डाल बेच रहे हैं। मुंशी पुलिया के पास ठेले पर डाल बेचने वाले दुकानदार प्रमोद ने बताया कि पहली बार बरगद की डाल बेच रहे हैं। 11 पत्तों वाली डाल 21 रुपये और सात पत्तों वाली डाल 11 रुपये में बेच रहे हैं। आसपास के ग्रामीण इलाकों से डाल बेचने वाले राजधानी के कई इलाकों में नजर आए हैं। वट सावित्री व्रत को लेकर खरबूजा 30 रुपये किलो महंगा हो गया। इंदिरानगर के फल विक्रेता रमेश कुमार ने बताया कि वट सावित्री व्रत में खरबूजे की मांग सबसे ज्यादा रहती है। ऐसे में खरबूजा दोगुने दाम पर बिकता है।
वट सावित्री व्रत को लेकर सब्जी मंडी में बिक रहे खरबूजे ने रविवार को अचानक रंग बदल दिए। सुबह 50 रुपये किलो से शुरू हुए दाम 250 रुपये तक पहुंच गए। फल विक्रेताओं का कहना है कि वट सावित्री व्रत के पूजन के लिए खरबूजे की ज्यादा मांग है। वहीं, कुछ दिनों से कम उपलब्धता होने से भी कीमत ज्यादा है। भूतनाथ सब्जी मंडी के फल विक्रेता कहते हैं कि सुबह 50 रुपये से बिक्री शुरू हुई थी, शाम को बाजार बंद होते-होते 250 रुपये तक में लोग खरीद कर ले गए। राजाजीपुरम की अर्चना मिश्रा बताती हैं कि 100 रुपये का एक खरबूजा खरीदा है। जानकीपुरम की चमन कहती हैं कि निशातगंज से लेकर यहां तक देख लिया, कहीं खरबूजा नहीं मिला। रीना कहती हैं कि 140 रुपये किलो में बहुत मुश्किल से एक खरबूजा मिला है, वह भी बस काम चलाने लायक है। हालांकि, चौक निवासी पारुल, उषा व अन्य कहती हैं कि पुराने शहर में एक खरबूजा 50 रुपये का मिला है। दुबग्गा फलमंडी के आढ़ती आरिफ ने बताया कि 45 रुपये किलो थोक में खरबूजा बिका है।

RELATED ARTICLES

आज से वक्री होंगे शनि, मेष समेत 5 राशियों को रहना होगा सतर्क

लखनऊ। वैदिक ज्योतिष में शनि देव को कर्मफल का दाता माना जाता है। जब शनि अपनी चाल बदलते हैं तो उसका असर हर राशि...

आज से लगेगा चातुर्मास, मांगलिक कार्याें पर लग जायेगा विराम

लखनऊ। हर साल देवशयनी एकादशी से चातुर्मास की शुरूआत होती है, क्योंकि इस दिन भगवान विष्णु चार माह के लिए योग निद्रा में चले...

देवशयनी एकादशी 25 को, चार महीने तक नहीं होंगे मांगलिक कार्य

लखनऊ। हिंदू धर्म में देवशयनी एकादशी का विशेष महत्व होता है। वैदिक पंचांग के अनुसार, आषाढ़ माह के शुक्ल पक्ष की एकादशी को देवशयनी...

इंसानों और कुत्तों के बीच के खास बंधन को दिखाती है ‘ओह माय डॉग’ : श्रीधर दुबे

अभिनेता श्रीधर दुबे ने लखनऊ में फिल्म 'ओह माय डॉग' का प्रमोशन कियालखनऊ। 31 जुलाई को सिनेमाघरों में रिलीज होने से पहले, एक्टर श्रीधर...

चातुर्मास : बच्चों को अष्टद्रव्य पूजा का महत्व समझाया

लखनऊ। उपाध्याय श्री 1008 विहसंत सागर जी महाराज के पावन वषार्योग (चातुर्मास) के अंतर्गत आयोजित बाल संस्कार शिविर में तीन वर्ष से लेकर तीस...

शहर की महिलाओं को मिला बेस्ट अटायर अवॉर्ड

अंदाज-ए-लखनऊ द्वारा शीप्रेनियर्स आॅफ अंदाजिÞयन्स गेट-टुगेदर का भव्य आयोजनलखनऊ। महिला सशक्तिकरण, स्वरोजगार को बढ़ावा देने तथा महिलाओं को एक सशक्त मंच प्रदान करने के...

लिप्पन आर्ट कार्यशाला का समापन

लखनऊ। आर्टेलिया इंस्टीट्यूट आॅफ फाइन आर्ट में आयोजित दो दिवसीय लिप्पन आर्ट कार्यशाला का सफल समापन हुआ। कार्यशाला का उद्देश्य प्रतिभागियों को पारंपरिक लिप्पन...

लोक चौपाल में सावन के गीतों संग महकी चौसा और सफेदा आम की मिठास

लखनऊ। लोक संस्कृति शोध संस्थान की 88वीं लोक चौपाल रविवार को लल्लूमल धर्मशाला परिसर, डालीगंज, गोमती तट पर आयोजित हुई। सावन, बारहमासा और लोक...

उत्तराखण्ड महोत्सव-2026 की तैयारियों को लेकर बैठक सम्पन्न

युवा प्रकोष्ठ का शपथ ग्रहण समारोह आयोजितलखनऊ। उत्तराखण्ड महापरिषद की आम सभा की बैठक शनिवार सायं 05:00 बजे महापरिषद के मोहन सिंह बिष्ट सभागार...