लखनऊ। हिंदू धर्म में देवशयनी एकादशी का विशेष महत्व होता है। वैदिक पंचांग के अनुसार, आषाढ़ माह के शुक्ल पक्ष की एकादशी को देवशयनी एकादशी के नाम से जाना जाता है। देवशयनी एकादशी के दिन से ही चातुर्मास शुरू हो जाते हैं। चातुर्मास के चार महीने के दौरान पूजा-पाठ, जप-तप, ध्यान और साधना का विशेष महत्व होता है। इन चार महीनों के दौरान किसी भी तरह के शुभ और मांगलिक कार्य करना वर्जित हो जाता है। इस बार देवशयनी एकादशी 25 जुलाई को है।
देवशयनी एकादशी शुभ मुहूर्त 2026
देवशयनी एकादशी पर ब्रह्म मुहूर्त सुबह 04 बजकर 16 मिनट से सुबह 04 बजकर 57 मिनट तक रहेगा।
अभिजीत मुहूर्त दोपहर 12 बजे से 12 बजकर 55 मिनट तक रहेगा।
यदि आप एकादशी व्रत का पारण करेंगे, तो इसका शुभ समय 26 जुलाई को सुबह 05 बजकर 38 मिनट से सुबह 08 बजकर 22 मिनट तक रहेगा।
देवशयनी एकादशी का महत्व
सनातन धर्म में देवशयनी एकादशी का विशेष महत्व माना गया है। मान्यता है कि आषाढ़ शुक्ल पक्ष की एकादशी से भगवान विष्णु क्षीरसागर में योगनिद्रा में चले जाते हैं। एक अन्य पौराणिक मान्यता के अनुसार, इस अवधि में भगवान विष्णु राजा बलि के पाताल लोक में निवास करते हैं और चार माह बाद कार्तिक शुक्ल एकादशी, यानी देवउठनी एकादशी के दिन पुन: जागृत होते हैं। देवशयनी एकादशी के साथ ही चातुर्मास का शुभारंभ हो जाता है, जो आध्यात्मिक साधना, आत्मचिंतन और भगवान की भक्ति का विशेष काल माना जाता है। इन चार महीनों में विवाह, गृह प्रवेश, मुंडन, यज्ञोपवीत संस्कार और अन्य मांगलिक कार्य सामान्यत: नहीं किए जाते। इस अवधि में साधु-संत और श्रद्धालु जप, तप, व्रत, दान, सत्संग तथा धार्मिक अनुष्ठानों के माध्यम से आध्यात्मिक उन्नति का प्रयास करते हैं।
देवशयनी एकादशी की पूजा विधि
देवशयनी एकादशी के दिन ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नान करने के बाद भगवान विष्णु के समक्ष व्रत का संकल्प लेना चाहिए। श्रद्धालु अपनी क्षमता और श्रद्धा के अनुसार निर्जल, निराहार या फलाहार व्रत का पालन करते हैं। पूजा के दौरान भगवान विष्णु को पीले रंग के वस्त्र, पीले पुष्प, तुलसी दल, चंदन, धूप और दीप अर्पित किए जाते हैं। इसके साथ ही भगवान को सात्विक भोग लगाकर आरती की जाती है। इस दिन से भगवान विष्णु योगनिद्रा में चले जाते हैं, इसलिए पूजा के बाद उनकी प्रतिमा या चित्र के सामने प्रतीकात्मक रूप से शयन की व्यवस्था की जाती है। छोटे से बिस्तर, गद्दे और तकिये पर भगवान को विराजमान कर पीली चादर या वस्त्र ओढ़ाया जाता है। धार्मिक मान्यता है कि ऐसा करने से भगवान विष्णु की विशेष कृपा प्राप्त होती है। देवशयनी एकादशी पर ‘ॐ नमो भगवते वासुदेवाय’ मंत्र का श्रद्धापूर्वक जाप करना, विष्णु सहस्रनाम का पाठ करना और तुलसी की पूजा करना अत्यंत शुभ माना गया है। साथ ही जरूरतमंदों को अन्न, वस्त्र और दक्षिणा का दान करने से पुण्य की प्राप्ति होती है तथा भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी का आशीर्वाद प्राप्त होता है।





