अभिनेता श्रीधर दुबे ने लखनऊ में फिल्म ‘ओह माय डॉग’ का प्रमोशन किया
लखनऊ। 31 जुलाई को सिनेमाघरों में रिलीज होने से पहले, एक्टर श्रीधर दुबे ‘ओह माय डॉग’ के प्रमोशन के लिए लखनऊ पहुँचे। उन्होंने शहर की मीडिया और दर्शकों से बातचीत की और फिल्म के बारे में जानकारी दी। साथ ही, उन्होंने दया, करुणा और इंसानों व कुत्तों के बीच बिना शर्त वाले प्यार के बंधन जैसे दिल को छू लेने वाले संदेशों पर भी बात की। इस दौरान, श्रीधर दुबे ने फिल्म के इमोशनल पहलू, कहानी को पर्दे पर उतारने के सफर और इस बेहतरीन फैमिली एंटरटेनर फिल्म से दर्शकों को क्या उम्मीद करनी चाहिए, इस पर चर्चा की। उन्होंने फिल्म के प्यार, सहानुभूति और शांति से साथ रहने जैसे विषयों पर भी जोर दिया और इंसानों व उनके चार पैरों वाले साथियों के बीच के अनोखे रिश्ते का जश्न मनाया। ट्रेलर को मिले जबरदस्त रिस्पॉन्स के बाद, ‘ओह माय डॉग’ को इसकी दिल को छू लेने वाली कहानी, इमोशनल गहराई और अर्थपूर्ण कहानी कहने के अंदाज के लिए तारीफ मिल रही है। जैसे-जैसे फिल्म सिनेमाघरों में रिलीज होने के लिए तैयार हो रही है, इसकी टीम बड़े पैमाने पर प्रमोशन कैंपेन के जरिए अलग-अलग शहरों में दर्शकों से जुड़ रही है। अमित राय, राजेश भारद्वाज और सना वारसी द्वारा ‘बाबूलाल बिस्कोप’ और ‘थिंकिंग हैट्स एंटरटेनमेंट’ के बैनर तले प्रोड्यूस की गई इस फिल्म ‘ओह माय डॉग’ में माही राय, पंकज त्रिपाठी, गीता अग्रवाल शर्मा, राजेश कुमार, पवन मल्होत्रा, सुलक्षणा बरुआ, विजय मिश्रा के साथ-साथ डॉग स्टार आॅस्कर और ब्रूनो और 250 से ज्यादा कुत्ते नजर आएँगे। इस शुक्रवार, 31 जुलाई को सिनेमाघरों में रिलीज होने जा रही ‘ओह माय डॉग’ हर उम्र के दर्शकों के लिए एक इमोशनल, मनोरंजक और दिल को छू लेने वाला सिनेमाई अनुभव देने का वादा करती है।
आवारा कुत्तों के प्रति संवेदनशीलता पैदा करेगी फिल्म
‘ओह माय गॉड’ के निर्देशन के बाद अमित राय अपनी अगली फिल्म लेकर आ रहे हैं, जो सुनने में पिछली फिल्म से मिलती-जुलती लग सकती है, लेकिन इसकी कहानी बिल्कुल अलग है। अमित की अगली फिल्म, ‘ओह माय डॉग’, कुत्तों पर आधारित एक थ्रिलर है। ऐसे समय में जब सामुदायिक कुत्तों के खिलाफ विरोध बढ़ता जा रहा है, श्रीधर दुबे का मानना है कि ऐसी फिल्में बनाना जरूरी है जो लोगों को जानवरों के प्रति जागरूक करें। फिल्मों का उद्देश्य केवल मनोरंजन करना ही नहीं, बल्कि शिक्षा देना और संवेदनशीलता बढ़ाना भी होता है। हम फिल्म निमार्ता यह भूल जाते हैं कि कहानीकार के रूप में हमारी यह जिम्मेदारी है कि हम लोगों की सोच और राय बनाएं। हमें इस नैतिक जिम्मेदारी को कभी नहीं भूलना चाहिए, श्रीधर दुबे कहते हैं, जिनकी खुद आॅस्कर नाम की एक चार साल पुरानी इंडी फिल्म है और जो पशु कल्याण के प्रति दृढ़ विश्वास रखते हैं। फिल्म न केवल आवारा कुत्तों के प्रति संवेदनशीलता पैदा करेगी, बल्कि पूरे समुदाय, बल्कि सभी जानवरों के प्रति संवेदनशीलता को बढ़ाएगी। हम इंसान अपने अहंकार में यह भूल जाते हैं कि हम भी पशु जगत की एक प्रजाति हैं, बस एक प्रजाति। ऐसी कई अन्य प्रजातियाँ हैं जिनके बारे में हम सोचते भी नहीं और न ही उनकी परवाह करते हैं, सिर्फ इसलिए क्योंकि हमारा दृष्टिकोण संकीर्ण है। अपने अस्तित्व के लिए, मनुष्यों को अन्य प्रजातियों के साथ सद्भावपूर्वक सह-अस्तित्व में रहना आवश्यक है और इसलिए हमें जानवरों के प्रति संवेदनशीलता विकसित करने की आवश्यकता है
कैमियो भूमिका में नजर आएंगे पंकज त्रिपाठी
इस फिल्म में पंकज त्रिपाठी भी एक विस्तारित कैमियो भूमिका में नजर आएंगे। ‘ओह माय गॉड 2’ के बाद पंकज के साथ दोबारा काम करने के बारे में अमित कहते हैं, पंकज के साथ काम करना हमेशा सुखद अनुभव होता है। उनके काम में जो समर्पण, ऊर्जा और गंभीरता झलकती है, वह बेमिसाल है। हालांकि उनके काम का दायरा ‘ओह माय गॉड 2’ जितना बड़ा नहीं है, फिर भी वे इस फिल्म से जुड़ने के लिए राजी हुए। मैं इस फिल्म से जुड़ने के लिए उनका बहुत आभारी हूं, क्योंकि उनकी उपस्थिति ने फिल्म को अमूल्य बना दिया है।
गैर-कानूनी धंधे का पदार्फाश करती है फिल्म
फिल्म में पंकज त्रपिाठी लीड रोल में हैं, जबकि कहानी एक छोटे बच्चे और उसके पालतू कुत्ते के प्यार भरे रिश्ते पर आधारित है। ढाई मिनट के ट्रेलर की शरुआत एक थ्रििलंग सीन से होती है, जहां 200-300 कुत्ते सड़क पर भाग रहे हैं, इसके बाद पुलिस की दौड़ती-भागती गाड़यिां, शहर से अचानक गायब हो रहे आवारा कुत्तों का मामला सामने आता है, जो इस थ्रलिर में रोमांच भरता है। अमित राय की इस फिल्म में पवन मल्होत्रा, राजेश कुमार और चाइल्ड आर्टिस्ट माही राय दमदार भूमिकाओं में हैं। कहानी इंसानों और जानवरों के बीच प्यार, वफादारी और संवेदना की है। इलाके के आवारा कुत्ते रहस्यमय तरीके से गायब हो रहे हैं। एक बच्चा अपने खोए हुए पालतू कुत्ते को खोजने की साधारण सी कोशिश शुरू करता है, जो कुत्तों की तस्करी के एक बड़े और गैर-कानूनी धंधे का पदार्फाश करती है।
पंकज त्रिपाठी ने इस फिल्म के लिए कोई फीस नहीं ली
दिलचस्प बात यह है कि पंकज त्रिपाठी ने इस फिल्म के लिए कोई फीस नहीं ली है। एक्टर ने हाल ही में इस बारे में बात करते हुए कहा ‘मैं डायरेक्टर अमित राय को सपोर्ट करना चाहता था और ऐसी फल्मि में योगदान देना चाहते था, जो कमर्शियल फायदों से ज्यादा कहानी को अहमियत देती हो। प्रोड्यूसर अजय राय और अमित राय मेरे पुराने दोस्त हैं। इंडिपेंडेंट और छोटी फल्मिों में, जहां कहानी अहम होती है, अगर हम जैसे एक्टर सपोर्ट नहीं करेंगे तो कौन करेगा?’ पंकज त्रिपाठी ने ‘ओह माय डॉग’ की शूटिंग के दौरान अपने अनुभव को भी याद किया। बताया कि इसकी कहानी का बिहार बैकग्राउंड होने की वजह से यह प्रोजेक्ट उनके लिए और भी ज्यादा पर्सनल हो गया था। एक्टर ने कहा, ‘कहानी बिहार पर आधारित है। अमित ने मुझसे चार दिन शूटिंग करने के लिए कहा था, लेकिन मैंने उनसे कहा कि मैं छह दिन के लिए आऊंगा। मैंने बिहार में अपने दोस्तों को भी बुलाया और हमने हर तरह से फिल्म को सपोर्ट किया। आखिर में, मैं वहां सात दिन तक रुका।’





