लखनऊ। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने भ्रष्टाचार पर कठोर कार्यवाही करते हुए लगभग 44 करोड़ की गंभीर वित्तीय अनियमितता के आरोपी पूर्व अधिशासी अभियंता, प्रांतीय खण्ड, लोक निर्माण विभाग बस्ती को बर्खास्त करने का आदेश दिया है। इसके अलावा फर्जी दस्तावेजों पर वाहन पंजीकरण के मामले को गंभीरता से लेते हुए शासन ने तीन एआरटीओ को निलम्बित किया है।
मुख्यमंत्री ने यह भी आदेशित किया है कि यदि पूर्व अधिशासी अभियंता के कृत्य से राज्य सरकार को कोई क्षति हुई हो तो उसकी भी भरपाई की जाए। इसके अलावा शासन से मिली जानकारी के अनुसार इस मामले की जानकारी शासन के संज्ञान में आयी कि सिमडेगा (झारखण्ड) के फर्जी एवं कूटरचित अस्थायी पंजीयन प्रमाण पत्र प्रस्तुत कर वाहनों की चेचिस पर बॉडी बनाकर पंजीयन कराये जा रहे है।
इसके साथ ही फिटनेस फीस जमा न कराये जाने, वाहनों का निरीक्षण प्रपत्रों के प्रस्तुतीकरण के समय नहीं किये जाने तथा यह जानते हुए कि अस्थायी पंजीयन प्रमाण पत्र मैनुअल हैं, तब भी उनका तत्काल सत्यापन समय से नहीं किये जाने के गंभीर मामले प्रकाश में आए। इसके अलावा वाहनों की स्वस्थता प्रमाण पत्र की फीस सिस्टम द्वारा न लिये जाने व सत्यापन समय से नहीं किये जाने का मामला प्रकाश में आया।
इस पर शिथिल पर्यवेक्षण, शासकीय कार्यों में शिथिलता व घोर उदासीनता बरतने का दोषी पाये जाने पर सर्वेश कुमार सिंह, सहायक संभागीय परिवहन अधिकारी (प्रशासन), वाराणसी एवं अमित राजन राय, तत्कालीन सहायक संभागीय परिवहन अधिकारी (प्रशासन), वाराणसी सम्प्रति सहायक संभागीय परिवहन अधिकारी (प्रवर्तन) तृतीय दल, गाजियाबाद तथा ड्राइविंग लाइसेंस जारी करते समय विधिक प्रक्रियाओं का पालन नहीं करके घोर अनियमितता एवं असावधानी बरतने, उच्चाधिकारियों के निदेर्शों की अवहेलना करने, सरकारी कार्यों में शिथिलता एवं उदासीनता बरतने का दोषी पाये जाने पर कैलाश नाथ सिंह, सहायक संभागीय परिवहन अधिकारी (प्रशासन), अम्बेडकरनगर को मुख्यमंत्री के भ्रष्टाचार एवं कदाचार के विरूद्ध जीरो टॉलरेन्स नीति के तहत कार्यवाही करते हुए परिवहन मंत्री द्वारा तात्कालिक प्रभाव से निलम्बित कर दिया गया है तथा इन सभी के विरूद्ध अनुशासनिक कार्यवाही संस्थित की गयी है।





