लखनऊ। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने ललितपुर में राजीव गांधी ग्रामीण विद्युतीकरण योजना वर्ष 2005-06 के अंतर्गत सरकारी धन का गबन करने के आरोप में तत्कालीन 1 अधिशासी अभियंता, 3 एसडीओ व 4 अवर अभियंताओं सहित एक फर्म के विरुद्ध एफआईआर दर्ज कर जांच करने के निर्देश दिए है। मुख्यमंत्री के आदेश से बिजली विभाग में हड़कंप मचा है।
संभावना जतायी जा रही है कि जांच होने के बाद और भी जिलों के अभियंता या अधिकारियों के नाम प्रकाश में आएंगे। इन अभियंताओं पर वर्ष 2005-06 में राजीव गांधी ग्रामीण विद्युतीकरण योजना के करोड़ों रुपये धन के गबन का आरोप हैं। तत्कालीन अधिशासी अभियन्ता डीके त्यागी, एसडीओ रविकान्त (सेवानिवृत्त) एसडीओ सतेन्द्र कुमार श्रीवास्तव, एसडीओ राघवेन्द्र प्रताप वर्मा, अवर अभियन्ता अनिल कुमार मिश्रा, अवर अभियन्ता श्रीप्रकाश, अवर अभियन्ता महेन्द्र प्रताप खरे तथा अवर अभियन्ता श्रीनिवास महाकुंड के खिलाफ एफआईआर दर्ज की जायेगी।
इन अभियंताओं पर मानक के अनुरूप कार्य नहीं कराने, भ्रष्टाचार व षड्यंत्र कर सरकारी धन की क्षति व गबन करने का आरोप है। इन अभियंताओं के साथ ही भ्रष्टाचार की आरोपी फर्म व उसके दो अधिकारियों के विरुद्ध भी एफआईआर दर्ज कर जांच की जायेगी।
अधिकारियों के विरुद्ध भादवि की धारा-420, 409, 120-बी और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा तथा फर्म मेसर्स आईवीआरसीएल हैदराबाद के विरुद्ध धारा 409, 120-बी और विनोद कुमार राय व महेश माने के विरुद्ध धारा-408, 120-बी के तहत एफआईआर कराकर जांच कराने का आदेश मुख्यमंत्री ने दिए हैं। सभी के खिलाफ मानक विहीन कार्य, फर्म के साथ दुरभिसंधि कर भ्रष्टाचार व षड्यंत्र करना, फर्जी मेजरमेंट का सत्यापन कर भुगतान करने आदि की जांच होगी।





