लखनऊ। बकरीद के मौके को लेकर पुराने लखनऊ के बाजारों में जबरदस्त रौनक देखने को मिल रही है। चौक और नक्खास जैसे व्यस्त इलाकों में महिलाओं की भारी भीड़ उमड़ी। खासतौर पर कपड़े, सिंवई, क्रॉकरी, चूड़ियां और आर्टीफिशियल ज्वेलरी की दुकानों पर ग्राहकों की लंबी कतारें नजर आईं। सुहाने मौसम के चलते दोपहर में भी बाजारों में चहल-पहल बनी रही। बाजारों में पुरुषों की तुलना में महिलाओं और बच्चों से संबंधित सामान की खरीदारी पर अधिक जोर दिखा। बकरीद में अभी कुछ दिन बाकी हैं, लेकिन खरीदारी का सिलसिला जोरों पर है।
शरारा की बढ़ी मांग:
अकबरी गेट स्थित एक दुकान के संचालक विशाल रस्तोगी ने बताया कि उनके पास 300 रुपये से 2500 रुपये तक की रेंज में सूट, शरारा और इंडो-वेस्टर्न कपड़े उपलब्ध हैं। इस बार खासतौर पर पाकिस्तानी सूट और कॉटन फैब्रिक वाले शरारे की मांग अधिक है। महिलाएं गर्मी को देखते हुए हल्के कपड़े और स्टाइलिश डिजाइनों को प्राथमिकता दे रही हैं।
दस्तरख्वान की तैयारी में क्रॉकरी और गहनों की खरीद:
बकरीद पर मेहमानों के स्वागत के लिए महिलाएं खूबसूरत कांच की क्रॉकरी भी खरीद रही हैं। दुकानदार मो. उमर ने बताया कि सिंवई परोसने के लिए कांच के बाउल की काफी मांग है, जिनकी कीमत 200 रुपये से 1000 रुपये तक है। वहीं मीना बाजार में चूड़ियों और झुमकों की दुकानों पर भीड़ लगी रही। महिलाएं अपने कपड़ों से मेल खाते चूड़ी सेट और मीना कारीगरी वाले गहनों को पसंद कर रही हैं।
सिंवई से गुलजार बाजार:
बकरीद की दावत के बाद मेहमानों का मुंह मीठा कराने के रिवाज के तहत पारंपरिक सिंवइयों की भी अच्छी बिक्री रही। दुकानदार मो. आरिफ ने बताया कि कभी यहां बकरों की मंडी लगती थी, जो कि अब कंपनीबाग में शिफ्ट हो गई है। पर अब यह मार्केट सिंवई की दुकानों से गुलजार है। उनके पास मोटी, मीडियम, जीरो और बनारसी सिंवई है। इसका दाम 60 रुपये प्रति किलो है। हालांकि, पुराने लोग मोटी सिंवई ज्यादा पसंद करते हैं, लेकिन उसे आॅर्डर पर तैयार करते हैं। इसे मोटे कपड़े में भिगोकर उबालते हैं, फिर दूध में पकाते हैं।
बनारसी, इलाहाबादी सेंवइयां बनी पहली पसंद:
बकरीद पर घरों में प्रमुख पकवान के रूप में सेंवइयां बनती हैं। दही-बड़े, छोले, पापड़ समेत कई अन्य पकवान भी बनाए जाते हैं। सेंवइयों की दुकानें आकर्षण का केंद्र हैं। दुकानदार जमाल और शादाब ने बताया कि बनारसी, इलाहाबादी, लखनवी, कनपुरिया नाम से सेंवइयां हैं। खुली सेंवइयों में मोटी वाली 60 रुपये तो महीन वाली 70 रुपये प्रति किग्रा. है। एक किग्रा. की पैकिंग वाली सेंवई की कीमत 120 रुपये है। सब्जी मंडी तिराहा, कहारों का अड्डा रोड, खालीसहाट, तेलियाकोट में दुकानें सजी हैं। सेंवई को लजीज बनाने के लिए खोवा, मेवे भी मिलाए जाते हैं। दुकानदार कमलेश ने बताया कि बादाम, काजू, नारियल, किशमिश, मखाने, खोवा की बिक्री बढ़ी है।
त्योहार के लिए कपड़ा दुकानों पर ग्राहकों का तांता:
त्योहार के कारण कपड़ों के बाजार में भी रौनक है। बकरीद पर नये कपड़े पहनने की परंपरा के कारण रेडिमेड कपड़ा दुकानों पर ग्राहकों की भीड़ लग रही है। पाजामा कुर्ता, सलवार सूट और कुर्ती की मांग सबसे अधिक है. दुकानों से बच्चे, युवा और बड़े, सभी अपनी पसंद के कपड़े खरीद रहे हैं। पारंपरिक परिधानों से लेकर आधुनिक फैशन तक हर तरह के कपड़े बाजार में उपलब्ध हैं। कपड़ा दुकानों में सबसे अधिक भीड़ रही है। गर्मी के बावजूद दुकानों में खरीदारों का तांता लग रहा है। रेडिमेड कपड़ा विक्रेता मो इश्तेयाक ने कहा कि पिछले दो दिनों से बकरीद की खरीदारी के लिए दुकानों में ग्राहकों की भीड़ बढ़ी है. पायजामा कुर्ता और सलवार सूट की मांग सबसे अधिक है।
बकरीद को लेकर लखनऊ में बिकने पहुंचे लाखों के बकरे
लखनऊ। राजधानी के दुबग्गा क्षेत्र में ईद-उल-अजहा के मौके पर लगने वाली बकरा मंडी में इस बार कुछ बेहद खास और अनोखे बकरे आकर्षण का केंद्र बने हुए हैं। मंडी में देशी और विदेशी नस्लों के हजारों बकरे बिक्री के लिए लाए गए हैं, जिनकी कीमत 5 हजार से लेकर 5 लाख रुपये तक बताई जा रही है। इस मंडी में बकरों की खूबसूरती, वजन और नस्ल के साथ-साथ उनके नाम भी चर्चा का विषय बने हुए हैं। खास बात यह है कि कुछ बकरों की पीठ पर प्राकृतिक रूप से अल्लाह और मुहम्मद लिखा होने का दावा किया जा रहा है, जो इन्हें बेहद खास बना रहा है और इन्हीं वजहों से इनकी कीमतें आसमान छू रही हैं। बकरा मालिक ने बताया कि ऐनू और सोनू नाम के दो बकरे सुबह शाम 6 किलो दूध पीते हैं, बादाम और चना खाते हैं।
5 लाख का बकरा बना चर्चा का विषय :
बकरे के मालिक शाहनवाज ने बताया कि इस बकरे की खासियत यह है कि इसके शरीर पर प्राकृतिक रूप से अल्लाह लिखा हुआ नजर आता है। उन्होंने कहा, कि हमने इस बकरे को हमेशा आम बकरों से अलग रखा है, इसका खास ख्याल रखा गया है, इसे विशेष खाना दिया जाता है और इसका बेहद आदर किया गया है। शाहनवाज को उम्मीद है कि यह बकरा 5 लाख रुपये तक बिक सकता है।
जैक भी बना आकर्षण का केंद्र :
एक अन्य बकरा जैक, जिसकी कीमत 1.5 लाख रुपये रखी गई है, ये भी लोगों को खूब लुभा रहा है। इसके मालिक का कहना है कि जैक न केवल बेहद सुंदर है, बल्कि इसका रहन-सहन भी अलग है। जैक जमीन पर नहीं बैठता, उसे दरी पर बैठाया जाता है और वह केवल बटर, गर्म रोटियां, पराठे, काजू-बादाम जैसे व्यंजन खाता है. वह इंसानों के साथ रहता है और उन्हीं की तरह खाना भी पसंद करता है।
दूसरा बकरा 1 लाख में बिक्री को तैयार :
मंडी में एक और बकरा चर्चा में है, जिसके मालिक अकबर अली का दावा है कि उनके बकरे के शरीर पर एक ओर अल्लाह और दूसरी ओर माशाअल्लाह लिखा हुआ है। अकबर ने बताया कि कुबार्नी के लिए बकरे में सिर्फ धार्मिक रूप से तय मानदंडों का पालन करना जरूरी है, लेकिन अगर किसी को इसमें अल्लाह या माशाअल्लाह लिखा नजर आता है तो वह इसे 1 लाख रुपये में भी खरीद सकता है।
तुर्की नस्ल का लालू बना लोगों की पसंद :
ओम प्रकाश पाल कहते हैं कि मंडी में मौजूद एक और बकरा लालू, जो कि तुर्की नस्ल का है। इसकी कीमत करीब 2 लाख रुपये है, इसके मालिक का कहना है कि उसका वजन लगभग एक क्विंटल 45 किलो है और उन्हें उम्मीद है कि यह जल्द ही बिक जाएगा, उन्होंने बताया कि वे बाराबंकी के रहने वाले हैं और हर साल मंडी में अपने बकरे लाते हैं।
बकरों की नस्लों में है विविधता :





