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कला, संवेदना और समर्पण के प्रतीक थे राजीव मिश्र

वाश चित्रकार राजीव मिश्र की प्रथम पुण्यस्मृति पर कला प्रदर्शनी एवं श्रद्धांजलि सभा का आयोजन किया गया

  • प्रदेश के कला और कलाकारों के संवर्धन के लिए दस्तावेजीकरण पर विशेष जोर दिया गया
    लखनऊ। मुख्यमंत्री उत्तर प्रदेश योगी आदित्यनाथ की कला संवर्धन की नीति के अनुपालन में संस्कृति एवं पर्यटन मंत्री जयवीर सिंह की प्रेरणा व मार्गदर्शन में राज्य ललित कला अकादमी द्वारा वाश पेंटिंग के प्रख्यात कलाकार राजीव मिश्रा की कला कृतियों की प्रदर्शनी एवं उनके व्यक्तिक व्यक्तित्व कृतित्व पर आधारित परिचर्चा का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का शुभारंभ अतिथियों उमेश सक्सेना, कौशल किशोर, सीताराम कश्यप एवं भूपेंद्र कुमार अस्थाना द्वारा दीप प्रज्ज्वलन एवं प्रदर्शनी के उद्घाटन के साथ हुआ। इसके उपरांत आयोजित परिचर्चा एवं संवाद सत्र में वक्ताओं ने वरिष्ठ वाश चित्रकार राजीव मिश्र के कृतित्व एवं व्यक्तित्व के विविध आयामों पर प्रकाश डाला। अपने वक्तव्य में मुख्य अतिथि उमेश सक्सेना और सीताराम कश्यप ने राजीव मिश्र के कला-जगत में दिए गए महत्वपूर्ण योगदान को रेखांकित करते हुए उनसे जुड़े अनेक संस्मरण साझा किए। उन्होंने उनकी कला-साधना, समर्पण और सृजनात्मक दृष्टि को स्मरण करते हुए उन्हें प्रदेश की कला परंपरा का महत्वपूर्ण हस्ताक्षर बताया। कलाकार व कला समीक्षक भूपेंद्र कुमार अस्थाना ने प्रदेश के कलाकारों और उनकी कलाधरोहर के व्यवस्थित दस्तावेजीकरण की आवश्यकता पर बल देते हुए कहा कि कला-सृजन के साथ-साथ उसके संरक्षण और अभिलेखीकरण का कार्य भी उतना ही महत्त्वपूर्ण है। उन्होंने राजीव मिश्र की कलाकृतियों, उनके द्वारा प्रयुक्त विभिन्न माध्यमों तथा विविध विषय-वस्तुओं का समीक्षात्मक विश्लेषण प्रस्तुत किया और उनकी कला-दृष्टि की विशिष्टताओं को विस्तार से रेखांकित किया। साहित्यकार कौशल किशोर ने राजीव मिश्र के कलात्मक अवदान के साथ-साथ उनके सामाजिक सरोकारों और मानवीय दृष्टिकोण को अनेक प्रसंगों के माध्यम से प्रस्तुत किया। उन्होंने कहा कि एक सच्चा कलाकार केवल सृजनकर्ता ही नहीं होता, बल्कि समाज के प्रति संवेदनशील और उत्तरदायी व्यक्तित्व भी होता है। राजीव मिश्र का जीवन इस विचार का उत्कृष्ट उदाहरण था। कार्यक्रम के दौरान राजीव मिश्र के कृतित्व और व्यक्तित्व पर आधारित एक लघु फिल्म का भी प्रदर्शन किया गया, जिसने उनके कलात्मक जीवन, संघर्ष, संवेदनाओं और उपलब्धियों को अत्यंत मार्मिक ढंग से प्रस्तुत किया। अंत में उनकी सुपुत्री स्तुति मिश्र ने सभी अतिथियों, कलाकारों, कलाप्रेमियों एवं उपस्थित जनों के प्रति आभार व्यक्त करते हुए भविष्य की प्रस्तावित कला-संबंधी योजनाओं की जानकारी साझा की। कार्यक्रम का सफल संचालन साहब बख्श ने किया। इस अवसर पर अनेक वरिष्ठ कलाकार, कलाप्रेमी, कला छात्र एवं संस्कृति-जगत से जुड़े गणमान्यजन उपस्थित रहे।

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