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प्रेक्षागृहों की बदहाली पर कलाकारों का गुस्सा फूटा

लखनऊ। शहर में लगातार बंद होती रंगमंचीय गतिविधियों और प्रेक्षागृहों की बदहाली को लेकर सोमवार को कलाकार एसोसिएशन ने उत्तर प्रदेश संगीत नाटक अकादमी पहुंचकर निरीक्षण किया और कलाकारों की समस्याओं को प्रमुखता से उठाया। कलाकारों का कहना है कि राजधानी में रंगकर्म के लिए उपलब्ध मंच और प्रेक्षागृह लगातार कम होते जा रहे हैं, जिससे थिएटर और सांस्कृतिक गतिविधियां प्रभावित हो रही हैं। निरीक्षण के दौरान के शहर के नामी वरिष्ठ रंगकर्मी शामिल रहे। कलाकार एसोसिएशन के प्रतिनिधिमंडल ने वहां चल रहे निर्माण कार्य और व्यवस्थाओं को देखा। इस दौरान कलाकारों ने कहा कि संगीत नाटक अकादमी में लंबे समय से निर्माण कार्य चलने के कारण रंगकर्म की गतिविधियां लगभग समाप्त हो गई हैं। एसोसिएशन के सचिव विनोद मिश्रा ने बताया कि राय उमानाथ बली प्रेक्षागृह का किराया बढ़ाकर 15 हजार रुपये कर दिया गया है। वहीं भारतेंदु नाट्य अकादमी भी फिलहाल मंचन के लिए प्रेक्षागृह उपलब्ध नहीं करा रही है। कलाकारों ने मांग की कि जल्द से जल्द प्रेक्षागृहों की व्यवस्था दुरुस्त की जाए और रंगकर्मियों को रियायती दरों पर मंच उपलब्ध कराए जाएं। इस मौके पर पद्मश्री डॉ. अनिल रस्तोगी ने कहा कि कला और संस्कृति को बचाने के लिए रंगमंचीय गतिविधियों को निरंतर जारी रखना बेहद जरूरी है। इस मौके पर कलाकार एसोसिएशन के अध्यक्ष संगम बहुगुणा, अशोक सिन्हा और रंगकर्मी मुकेश वर्मा मौजूद रहे।

सुविधाओं की निगरानी करेगी एसोसिएशन
कलाकार एसोसिएशन ने यह भी घोषणा की कि अब एक निगरानी कमेटी का गठन किया जाएगा, जो राजधानी में रंगमंचीय गतिविधियों, प्रेक्षागृहों की व्यवस्थाओं और कलाकारों को मिलने वाली सुविधाओं पर लगातार निगरानी रखेगी। यह कमेटी समय-समय पर अपनी रिपोर्ट संस्कृति विभाग और संबंधित अधिकारियों को भी सौंपेगी, ताकि समस्याओं का समाधान सुनिश्चित कराया जा सके। वरिष्ठ रंगकर्मी मुकेश वर्मा ने कहा कि लखनऊ की रंगमंचीय पहचान पूरे देश में रही है, लेकिन आज कलाकार मंच और सुविधाओं के लिए संघर्ष कर रहे हैं। यह स्थिति बेहद चिंताजनक है। कलाकार एसोसिएशन लगातार इस मुद्दे को उठाता रहेगा।

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