लखनऊ। ईद उल अजहा के त्योहार के लिए बकरामंडियों के साथ-साथ शहर की बाजारों में रौनक बढ़ गई है। अमीनाबाद, चौक, नक्खास समेत शहर की अलग-अलग बाजारों में खरीदारों की आमद बढ़ने लगी है। बाजारों में सेवईं से लेकर कपड़े और घरेलू सामान की खरीदारी करने के लिए महिलाएं घरों से निकल रही हैं। ईद उल अजहा में मिठास घोलने के लिए सेवईं का बाजार सज गया है। जहां पुराने लखनऊ अमीनाबाद, चौक नक्खास, मौलवीगंज में सेवईं की दुकानों में खरीदार बढ़ रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ निशातगंज, डंडईया बाजार में भी लोग सेवईं खरीद रहे हैं। निशातगंत करामत मार्केट के सेवईं दुकानदार ने बताया कि जुमेरात को बकरीद है ऐसे में खरीदार आने लगे हैं। हमारे यहां महीन, मोटी, भुनी और कच्ची सेवईं मौजूद है। बनारसी सेवईं को भी लोग काफी पसंद करते हैं। अलग-अलग किस्म की सेवईं की अलग-अलग कीमत है। अमूमन दुकानों पर 80 से 100 रुपये में मोटी, भुनी, महीन, कच्ची सेवईं मिल जाएगी। इसके अलावा बनारसी सेवईं का डिब्बा भी आपको 140 रुपये से लगाकर 160 रुपये के बीच मिल जाएगा। पुराने लखनऊ अमीनाबाद, चौक नक्खास, मौलवीगंज में सेवईं की दुकानों में खरीदार बढ़ रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ निशातगंज, डंडईया बाजार में भी लोग सेवईं खरीद रहे हैं। निशातगंत करामत मार्केट के सेवईं दुकानदार ने बताया कि जुमेरात को बकरीद है ऐसे में खरीदार आने लगे हैं। हमारे यहां महीन, मोटी, भुनी और कच्ची सेवईं मौजूद है। बनारसी सेवईं को भी लोग काफी पसंद करते हैं। अलग-अलग किस्म की सेवईं की अलग-अलग कीमत है। अमूमन दुकानों पर 80 से 100 रुपये में मोटी, भुनी, महीन, कच्ची सेवईं मिल जाएगी। इसके अलावा बनारसी सेवईं का डिब्बा भी आपको 140 रुपये से लगाकर 160 रुपये के बीच मिल जाएगा।
कई वैराइटी की सेवइयां मौजूद:
ईद-उल-अजहा के लिए पुराने लखनऊ में सेवईयों का बाजार सज गया है। दस्तरख्वान पर बकरीद के दिन मीठी सेंवईयां भी परोसी जाती हैं। चौक, नक्खास, अमीनाबाद, मौलवीगंज, हुसैनाबाद आदि जगहों पर सेवईयों का बाजार सजा हुआ है। जहां मोटी, बारीक, लच्छेदार के साथ कई वैराइटी की सेवईयां मौजूद है। सेवई कारोबरी मोहम्मद आरिफ ने बताया कि उनके यहां छड़ व सादी सेवई, छत्ते वाली सेवई, किमामी सेवई, बनारसी, भुनी सेवई, लाल लच्छा, सफेद लच्छा, बनारसी लच्छा, सूतफेनी, रूमाली, दूध फेनी आदि बिक रही है। इस समय सबसे ज्यादा मांग में बनारसी किमामी सेवई है, जो हाथों हाथ खरीदी जा रही है।
कपड़े की दुकानों पर बढ़ी रौनक:
ईद उल अजहा के लिए कपड़े की दुकानों पर भी खरीदारों की भीड़ बढ़ रही है। नमाज के लिए लोगों ने कुर्ता पजामे की दुकानदारी शुरू कर दी है। वहीं, महिलाएं अपने बच्चों के कपड़े लेने के लिए भी अमीनाबाद और आसपास की दुकानों में खरीदारी कर रही हैं। कुर्ते की बात करें तो मौसम के हिसाब से इस साल भी चिकनकारी, कॉटन और लेनिन के कुर्तों को लोग काफी पसंद कर रहे हैं। दुकानदारों का कहना है कि अभी खरीदारी शुरू हुई है, कल से आमद और बढ़ेगी। अमूमन बकरीद में कुबार्नी को लेकर बकरों की ही ज्यादा खरीदारी होती है। लेकिन घरों में पकवान भी बनते हैं। सेवईं के अलावा खाने की कई डिशेज बनती हैं, ऐसे में उनकी खरीदारी करने आए हैं। साथ ही घरेलू सामान भी ले रहे हैं।
बकरीद : कुर्बानी की फोटो सोशल साइट पर अपलोड न करें :
ईदगाह लखनऊ में इस्लामिक सेन्टर आफ इण्डिया की ओर से ईद उल अजहा की तैय्यारियों के सिलसिले में एक अहम बैठक हुई। बैठक में ईदगाह कमेटी, जिला प्रशासन, पुलिस कमिश्नरेट और नगर निगम के अधिकारी उलेमा शामिल रहे। ऐशबाग ईदगाह में ईद-उल-अजहा की नमाज सुबह दस बजे होगी। इमाम ईदगाह मौलाना खालिद रशीद फरंगी महली इस साल बकरीद सात जून को मनायी जाएगी। मुसलमान बड़ी संख्या में ईदगाह और विभिन्न मस्जिदों में ईद की नमाज अदा करते है। इसलिए इस अवसर पर जिला प्रशासन व नगर निगम की जिम्मेदारी है कि ईदगाह और तमाम मस्जिदों के आस पास उचित सफाई कराए और बिजली व पानी की सप्लाई सुनिश्चित करे। उन्होंने कहा कि ईद-उल-अजहा के मुबारक दिनों में शहर का अमन व अमान और सलामती बनाये रखने के लिए उचित व्यवस्था की जाए। उन्होंने कहा कि कुबार्नी के जानवरों की आने जाने में किसी प्रकार की रुकावट न लगाई जाए। इन दिनों में भी सफाई के विशेष प्रबन्ध सुनिश्चित किये जाएं। मौलाना ने मुसलमानों से यह भी अपील की कि कुर्बानी की फोटो और वीडियो सोशल मीडिया पर न डालें। मौलाना ने कहा कि नमाज अदा करने वालों को सहूलियत पहुंचाई जाए और ईदगाह मैदान और उसके आस पास में सफाई पर खास ध्यान दिया जाए।
राजधानी में सजने लगी बकरा मण्डी, तैयारियां शुरू
लखनऊ। ईद-उल-अजहा (बकरीद) का त्योहार 28 मई को मनाया जाएगा। मस्जिदों में विशेष नमाज की तैयारियों को अन्तिम रूप दिया जा रहा है। इसको लेकर गंगा जमुनी तहजीब की पहचान नवाबों के शहर लखनऊ में बकरीद को लेकर तैयारियां तेजी से चल रही हैं। यहां की मशहूर बकरा मंडी सजकर तैयार हो गई है। चौक, अकबरी गेट, अमीनाबाद और नक्खास और आईआईएम रोड में देश के कोने-कोने से लोग बकरे को लेकर आए हैं। इस साल महंगे हैं सभी बकरे लखनऊ की मशहूर बकरा मंडी के जमाल से बात की गई तो उन्होंने बताया कि इस बार गर्मी ज्यादा पड़ रही है। इस वजह से बकरों के रख रखाव पर ज्यादा खर्च हो रहा है। इसलिए इस बार देसी बकरा भी 50 से 70 हजार रुपए में मिल रहा है। इससे नीचे किसी को भी कोई बकरा नहीं मिल रहा है। इस बार बकरीद पर सभी को महंगे बकरे ही मिल रहे हैं। नवाबों की नगरी में सेवईयों से गुलजार हुए बाजार, खूब हो रही खरीदारी लखनऊ। ईद उल अजहा के त्योहार के लिए बकरामंडियों के साथ-साथ शहर की बाजारों में रौनक बढ़ गई है। अमीनाबाद, चौक, नक्खास समेत शहर की अलग-अलग बाजारों में खरीदारों की आमद बढ़ने लगी है। ईद-उल-अजहा में कुर्बानी का खास महत्व है। जिसके लिए अकीदतमंदों ने बकरों की खरीदारी शुरू कर दी है। खास बात ये है कि शहर में बाजार सजने के साथ-साथ आॅनलाइन बकरों की बाजार सज चुकी है ईद-उल-अजहा में लगातार तीन दिन तक कुर्बानी दी जाती है। जिसके लिए बकरों की खरीद फरोख्त होती है। लखनऊ में चौक, दुबग्गा, अलीगंज समेत कई स्थानों पर बकरा मण्डी लगती है।
एक साल का बकरा होना शर्त:
दारुल उलूम निजामिया फरंगी महली के अन्तर्गत ईद-उल-अजहा हेल्पलाइन शुरू हो गई है। इस हेल्पलाइन पर कुर्बानी, हज और उमराह से जुड़े सवाल पूछे जा रहे हैं। हेल्पलाइन को कुर्बानी किस पर वाजिब है सवाल पर जवाब दिया गया कि कुबार्नी हर उस मुसलमान, आकिल, बालिग और मुकीम पर वाजिब है जो साहिब ए निसाब हो। इसके साथ ही सवाल पूछा गया कि अगर बकरा मुकम्मल एक साल का है लेकिन उसके दांत नहीं निकले हैं तो कुबार्नी सही है। इस सवाल के जवाब में उलेमा के पैनल ने कहा कि कुबार्नी है, बस बकरा एक साल का होना शर्त है। दांत निकलना जरूरी नहीं है। एक सवाल पूछा गया कि कुछ जगहों पर मशहूर है कि जानवर खरीद कर ही कुबार्नी दे सकते हैं पालतू को नहीं, क्या यह सही है। इस सवाल पर कहा गया कि यह सही नहीं है। जानवर को खरीद कर कुबार्नी दें या पाल कर, दोनों सही है।





