लखनऊ। भगवान भोले का प्रिय श्रावण मास 30जुलाई को शुरू हो चुका है, और 3 अगस्त को सावन का पहला सोमवार है, जो कि श्रावण मास की विशेष तिथि मानी जाती है। सावन के पहले सोमवार के लिए राजधानी के सभी शिवालय भोले बाबा का आराधना के लिए सजधज कर तैयार हैं। सोमवार भोर से ही शहर के सभी शिवालयों में बम-बम भोले की उदघोष से गूंज उठेंगे। शहर के सबसे प्राचीन शिव मंदिरों में से एक मनकामेश्वर में सुरक्षा के कड़े इंतजाम कर लिए हैं। इसी तरह कोनेश्वर मंदिर, चौपटिया स्थित छोटा शिवाला और बड़ा शिवाला भी भक्तों के लिए तैयार हैं।
उत्तराभाद्रपद नक्षत्र और सुकर्मा योग का रहेगा शुभ संयोग
शुभ योग के साथ सावन महीने की शुरूआत हो चुकी है, जो महाकाल और उनके भक्तों के लिए बेहद खास माना जाता है। इस महीने की रौनक अगस्त तक बनी रहेगी और इस दौरान भक्तों को सावन सोमवार और शिवरात्रि जैसे पावन अवसर भी प्राप्त होंगे। धार्मिक मान्यता है कि सावन के सोमवार को भगवान भोलेनाथ की विधि-विधान से पूजा करने पर भक्तों को पुण्य फलों की प्राप्ति होती है और जीवन में सुख, शांति तथा स्थिरता बनी रहती है। इसके साथ ही वैवाहिक जीवन में भी मधुरता आती है। महिलाओं के लिए सावन सोमवार का व्रत विशेष फलदायी माना गया है। मान्यता है कि इस दिन व्रत और पूजा करने से भगवान शिव के साथ माता पार्वती भी प्रसन्न होती हैं और अखंड सौभाग्य का आशीर्वाद प्रदान करती हैं। पंचांग के अनुसार, सावन माह का पहला सोमवार 3 अगस्त 2026 को पड़ेगा। इस दिन उत्तराभाद्रपद नक्षत्र और सुकर्मा योग का शुभ संयोग रहेगा। ज्योतिष शास्त्र में सुकर्मा योग को अत्यंत शुभ माना गया है। मान्यता है कि, इस योग में किए गए शुभ कार्य बिना किसी बाधा के पूरे होते हैं। इसलिए यह दिन भगवान शिव की पूजा, रुद्राभिषेक और व्रत के लिए विशेष फलदायी रहेगा।
सावन सोमवार की पूजा विधि
सावन सोमवार की पूजा के लिए सबसे पहले सफेद या हल्के रंग के वस्त्र धारण करें। अब सबसे पहले शिवलिंग पर शुद्ध जल और गंगाजल अर्पित करें। इसके बाद दूध, दही, घी, शहद और गंगाजल से पंचामृत तैयार कर अभिषेक करें। अब एक बार फिर साफ जल से शिवलिंग का अभिषेक करें। शिवलिंग पर 11 या 21 बेलपत्र चढ़ाएं। देवी पार्वती को सुहाग से जुड़ी सामग्रियां चढ़ाएं। गणेश जी को दुर्वा चढ़ाएं और पूरे शिव परिवार की आराधना कर लें। इसके बाद कुछ फूल और मिठाई रखें और महादेव के मंत्र का 108 बार जप करें। घी का दीपक और धूप जलाकर भगवान शिव की आरती करें।
भगवान शिव का होगा विशेष शृंगार:
श्रावण मास के पहले सोमवार पर शहर के सभी शिवालयों में भगवान शिव का विशेष शृंगार किया जाएगा। डालीगंज स्थित मनकामेश्वर सिद्घपीठ में चंदन, भांग, बेसन और फूलों से अनोखी शिव आकृति बनाई जाएगी, जिसका पूजन किया जाएगा। वहीं भोर में ही भगवान शिव की भस्म आरती की जाएगी। महंत देव्यागिरी ने बताया कि भोर में भस्म आरती के बाद भगवान शिव का विशेष शृंगार होगा, उन्हें विशेष पगड़ी भी पहनाई जाएगी। वहीं, पांच प्रकार के फूल सूरजमुखी, बेला, कमल, कनेर और गेंदा से भगवान शिव का भव्य पुष्प शृंगार होगा। उन्हें शमी का फूल, धतूरा और बेल पत्र की माला पहनाई जाएगी। शाम को महाआरती होगी।
हर दिन अलग शृंगार, विशेष भोजन प्रसाद:
मोहन रोड स्थित बुद्धेश्वर महादेव मंदिर में इस बार भक्तों को हर दिन भगवान शिव का नया स्वरूप देखने को मिलेगा। मंदिर के पंडित रामपुरी महाराज ने बताया कि एक विशेष ‘शृंगार समिति’ बनाई गई है जो महाकाल का भव्य शृंगार उनके प्रिय फल, फूल और पत्तों से करेगी। श्रद्धालुओं के लिए हर दिन विभिन्न प्रकार के भोजन प्रसाद की व्यवस्था भी की गई है। पौराणिक मान्यता है कि राम-लक्ष्मण और सीता ने वनवास के दौरान इसी स्थान पर भगवान शिव की पूजा की थी।
दिव्यांग और वृद्ध श्रद्धालुओं के लिए अलग प्रवेश द्वार:
गोमती नदी के तट पर स्थित लगभग 1000 वर्ष पुराना मनकामेश्वर मंदिर इस बार सावन के पहले सोमवार को 1 लाख से अधिक भक्तों के स्वागत को तैयार है। मंदिर की महंत देव्या गिरी ने बताया, दिव्यांग और वृद्ध श्रद्धालुओं के लिए अलग प्रवेश द्वार, प्राथमिक उपचार व्यवस्था और 100 से अधिक स्वयंसेवकों को तैनाती की गई है। मंदिर के कपाट सोमवार को सुबह 5 बजे खुलेंगे और दोपहर 12 बजे तक दर्शन होंगे। इसके बाद दोपहर 3 बजे से रात 10:30 बजे तक फिर से श्रद्धालु बाबा के दर्शन कर सकेंगे। हर दिन भक्तों में प्रसाद वितरित किया जाएगा। पौराणिक कथाओं के अनुसार भगवान लक्ष्मण ने इसी स्थान पर भगवान शिव की प्रार्थना की थी। यहां मनोकामना पूरी होने की मान्यता है। इसी वजह से इसका नाम मनकामेश्वर पड़ा है। मनोकामना पूरी होने पर भक्त भगवान का शृंगार करते हैं।
मनकामेश्वर में होगी महाकाल की भस्म आरती:
श्रावण मास में देवादिदेव महादेव का नाम लेने मात्र से सारे दु:ख दूर हो जाते हैं। उनकी महिमा का बखान कर रुद्राभिषेक करने वालों की सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं। भगवान शिव की आराधना के इस महीने के सोमवार को महिलाएं व्रत रखकर सुख समृद्धि की कामना करती हैं। मंदिरों में जहां विशेष इंतजाम होंगे वहीं रुद्राभिषेक के लिए श्रद्धालुओं की कतारें भी लगेंगी। राजेंद्रनगर स्थित महाकाल मंदिर में सुबह चार बजे उज्जैन की तर्ज पर महाकाल की भस्म आरती होगी। मनकामेश्वर मंदिर के कपाट भी भोर में ही खोल दिए जाएंगे। महंत देव्या गिरि के महाआरती के साथ ही मंदिर श्रद्धालुओं के लिए खोल दिए जाएंगे। श्रद्धालुओं की सुरक्षा के लिए मंदिर में क्लोज सर्किट कैमरे लगाए गए हैं। पूजन सामग्री व प्रसाद की दुकानों को सुव्यवस्थित लगाने के मंदिर प्रशासन की ओर से निर्देश दिए गए हैं।
लखनऊ के द्वादश मंदिर में होते हैं 12 ज्योतिर्लिंग के दर्शन:
भगवान शिव की आराधना के श्रावण मास में पुण्य की कामना को लेकर श्रद्धालु शिव मंदिरों की ओर से रुख करते हैं। रुद्राभिषेक और शिवार्चन के बीच सदर के द्वादश ज्योतिर्लिंग मंदिर में एक साथ भगवान शिव के 12 स्वरूपों के दर्शन होते हैं। शिवार्चन और रुद्राभिषेक के साथ ही भगवान शिव को चढ़ने वाला जल सीधे जमीन में जाकर भूजल स्तर बढ़ाता है। अध्यक्ष राजेश अग्रवाल ने बताया कि मंदिर में परिवार के साथ रुद्राभिषेक करने की पूरी व्यवस्था रहती है। पुजारी गुड्डू पंडित के सानिध्य में विद्वानों की टोली अभिषेक कराती है। श्रावण के चारों सोमवार व नागपंचमी पर 15 परिवार को एक बार में रुद्राभिषेक की सुविधा मिलेगी।
नग जड़ी होगी पगड़ी:
मनकामेश्वर मंदिर की महंत देव्या गिरि ने बताया कि बाबा की पगड़ी में नग लगाए गए हैं और श्रद्धालुओं ने अपने हाथों से पगड़ी बनाई है। हर सोमवार बाबा को दूल्हे की तरह सजाया जाएगा। बम भोले के जयकारे के साथ श्रद्धालु बराती के स्वरूप में शामिल होंगे। सुरक्षा के चलते क्लोज सर्किट कैमरे से निगरानी होगी। मंदिर में आने और जाने की अलग.अलग व्यवस्था की गई है। मंदिर में प्रसाद स्वयं चढ़ाना होगा।
फूलों व रंग-बिरंगी लाइटों से सजे शहर के शिवालय
लखनऊ। 30 जुलाई से सावन माह शुरू हो चुका है। 3 अगस्त को सावन का प हला सोमवार है, जिसे लेकर शहर के शिव मंदिरों में तैयारियां जहां अंतिम दौर में पहुंच चुकीं हैं तो कई मंदिरों में अभिषेक के लिए समय देने का कार्य पूरा हो गया है। चौक रानी कटरा स्थित के छोटा व बड़ा शिवाला में भी पहले सोमवार को लेकर विशेष इंतजाम किए गए हैं। कोनेश्वर मंदिर के साथ ही सदर के द्वादश ज्योतिर्लिंग मंदिर में भी अभिषेक को लेकर तैयारियां पूरी हो गई हैं। आशियाना के सेक्टर.एच स्थित द्वादश ज्योतिर्लिंग मंदिर, बंगलाबाजार के श्री रामजानकी मंदिर, इंद्रेश्वर मंदिर, मौनी बाबा मंदिर व गुलाचिन मंदिर के अलावा सिद्धेश्वर मंदिर, सैसोवीर मंदिर, गोमतेश्वर मंदिर व विन्ध्याचल मंदिर के अलावा शहर के सभी शिव मंदिर पूजन के लिए तैयार हैं। स्वप्नेश्वर महादेव मंदिर, इंदिरानगर भूतनाथ मंदिर, महानगर के सिद्धेश्वर मंदिर, राजाजीपुरम, सआदतगंज, आलमबाग, चिनहट के अलावा बख्शी का तलाब के मां चंद्रिका देवी मंदिर के चंद्रकेश्वर महादेव मंदिर, कालेश्वर महादेव मंदिर, इटौंजा के रत्नेश्वर महादेव मंदिर, टीकाश्वर महादेव मंदिर के साथ ही शहर के सभी छोटे बड़े शिव मंदिरों पर तैयारियां पूरी होने के साथ ही मंदिरों को झालरों व फूलों से सजाया गया है।





