लखनऊ। आशियाना स्थित दिगंबर जैन मंदिर में श्री 108 विहसंत सागर जी महाराज के पावन वषार्योग (चातुर्मास) के अंतर्गत आयोजित धार्मिक कार्यक्रमों की श्रृंखला में आज श्री भक्ताम्बर स्तोत्र के महत्व पर विशेष प्रवचन आयोजित किया गया। इस अवसर पर पूज्य गुरुदेव ने बताया कि श्री भक्ताम्बर स्तोत्र जैन धर्म का एक अत्यंत प्रसिद्ध एवं प्रभावशाली स्तोत्र है, जिसकी रचना सातवीं शताब्दी में आचार्य मानतुंग जी महाराज द्वारा की गई थी। संस्कृत भाषा में रचित यह स्तोत्र 48 श्लोकों से युक्त है तथा प्रथम तीर्थंकर भगवान आदिनाथ ऋषभदेव की स्तुति को समर्पित है। पूज्य गुरुदेव ने भक्ताम्बर स्तोत्र से जुड़ी प्राचीन मान्यता का उल्लेख करते हुए बताया कि आचार्य मानतुंग जी को राजा भोज द्वारा 48 ताले एवं जंजीरों से युक्त कक्ष में बंद कर दिया गया था। आचार्य श्री ने जैसे-जैसे भक्ताम्बर स्तोत्र के श्लोकों का पाठ किया, वैसे-वैसे ताले एवं जंजीरें स्वत: टूटती चली गईं और वे बंधनों से मुक्त हो गए। इसी कारण भक्ताम्बर स्तोत्र को श्रद्धा, भक्ति एवं आत्मबल का प्रतीक माना जाता है।
उन्होंने कहा कि भक्ताम्बर स्तोत्र के नियमित पाठ एवं ध्यान से मानसिक शांति, सकारात्मक ऊर्जा, आत्मविश्वास तथा घर-परिवार में सुख-शांति का वातावरण निर्मित होता है। वर्तमान समय में विभिन्न ध्यान एवं हीलिंग केंद्रों पर भी भक्ताम्बर स्तोत्र के माध्यम से मन को शांत एवं इच्छाशक्ति को सुदृढ़ करने पर बल दिया जाता है, जिससे व्यक्ति के आत्मबल एवं आंतरिक ऊर्जा में वृद्धि होती है। उन्होंने बताया कि गुरुग्राम, अहमदाबाद, बेंगलुरु सहित भारत के विभिन्न शहरों में भक्ताम्बर स्तोत्र के ध्यान एवं आध्यात्मिक साधना के माध्यम से कैंसर जैसी गंभीर बीमारियों से जूझ रहे लोगों के मानसिक एवं आध्यात्मिक सशक्तिकरण के प्रयास भी किए जा रहे हैं। इससे रोगियों में सकारात्मक सोच, आत्मविश्वास एवं जीवन के प्रति आशावादी दृष्टिकोण विकसित होने में सहायता मिलती है।
दोपहर में प्रत्येक शनिवार को आयोजित होने वाली संस्कार पाठशाला में लगभग 100 बच्चों ने उत्साहपूर्वक सहभागिता की। इस अवसर पर पूज्य गुरुदेव ने बच्चों को नियमित रूप से मंदिर जाने, धार्मिक संस्कारों को जीवन में अपनाने तथा सदाचारपूर्ण जीवन जीने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने बताया कि मंदिर केवल पूजा का स्थान नहीं, बल्कि व्यक्तित्व निर्माण एवं आत्मिक उन्नति का भी केंद्र है। कार्यक्रम के अंत में बंटी जैन, सुकुमल जैन, पियूष जैन एवं विशाल जैन ने संयुक्त रूप से जानकारी देते हुए बताया कि 2 अगस्त, रविवार को आशियाना दिगंबर जैन मंदिर में मेधावी छात्र-छात्राओं का सम्मान समारोह आयोजित किया जाएगा। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि सतीश कुमार, आईपीएस, पुलिस अधीक्षक, पुलिस मुख्यालय, लखनऊ रहेंगे। कार्यक्रम प्रात: 9 बजे प्रारंभ होगा, जिसमें विभिन्न क्षेत्रों में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले तथा शैक्षणिक परीक्षाओं में उच्च अंक प्राप्त करने वाले जैन समाज के छात्र-छात्राओं को सम्मानित किया जाएगा। उन्होंने समाज के सभी लोगों से अधिकाधिक संख्या में उपस्थित होकर विद्यार्थियों का उत्साहवर्धन करने की अपील की।
दु:ख में सुमिरन सब करें सुख में करे न कोय
लखनऊ। इंदिरा नगर जैन मंदिर में आचार्य सुबल सागर जी महाराज ने शनिवार को प्रवचन के माध्यम से जन मानस को यह संदेश देने का प्रयास किया कि भगवान की भक्ति से ही आत्मिक सुख की प्राप्ति हो सकती है। भौतिक सुख की चाह के व्यक्ति भटक रहा है लेकिन सच्चा सुख आत्मा में ही निहित है। गुरुदेव ने कहा कि दुख में सुमिरन सब करें सुख में करें न कोय अर्थात जब व्यक्ति परेशान होता है तो भगवान की शरण में पहुंचा जाता है परंतु सुख के समय वो पूर्ण रूप से भगवान को भूल जाता है । जो व्यक्ति नित प्रतिदिन बेगवान की भक्ति करता है भावों को विशुद्ध रखता है वह कभी दुखी हो ही नहीं सकता है । इससे पूर्व आज प्रात: सहस्त्र नाम का वाचन गुरुदेव के मुखारबिंद से किया गया एवं सायं काल में भक्तामर स्त्रोत एवं दीपर्चन का कार्यक्रम हुआ। जिन समाज के महामंत्री अभिषेक जैन ने बताया कि आचार्य श्री का आज उपवास रहा एवं गुरुदेव अपनी साधना को नित प्रतिदिन कठोर कर रहे हैं तप एवं त्याग उत्कृष्ट अवस्था पर पहुंच रहा है। कार्यक्रम में समाज के अध्यक्ष पी के जैन एवं सांस्कृतिक मंत्री ऋषभ जैन ने बाहर से पधारे हुए अतिथियों को प्रतीक चिन्ह देकर सम्मानित किया।





