लखनऊ, 1 अगस्त। डालीगंज स्थित बंदी माता स्थान में आयोजित 44वें वार्षिक उत्सव के अंतर्गत श्रीमद्भागवत कथा वाचिका रोली शास्त्री ने भगवान श्रीकृष्ण और माता रुक्मिणी विवाह का भावपूर्ण वर्णन किया। उन्होंने कहा कि भगवान श्रीकृष्ण ने केवल रुक्मिणी जी से ही नहीं, बल्कि 16,100 राजकुमारियों का उद्धार कर उन्हें सम्मानपूर्वक स्वीकार किया। इससे भगवान की करुणा, लोककल्याण और सर्वव्यापकता का संदेश मिलता है। रात्रि में आयोजित रासलीला में भक्त मीरा के जीवन प्रसंग का मार्मिक मंचन किया गया। मीरा की श्रीकृष्ण के प्रति अटूट भक्ति, समर्पण और विरक्ति की प्रस्तुति ने श्रद्धालुओं को भावविभोर कर दिया। कलाकारों की सजीव प्रस्तुति पर श्रद्धालु देर रात तक भक्ति रस में सराबोर रहे। इस अवसर पर मुख्य अतिथि के रूप में उत्तर विधायक डॉ नीरज बोरा, आचार्य नागेश्वर प्रसादाचार्य एवं डॉ. गीता वर्मा उपस्थित रहे। कार्यक्रम में आचार्य ज्ञानप्रकाश मिश्र, संकल्पनन्द विश्वविद्यालय के रजिस्ट्रार कैलाश शर्मा, आचार्य मनोज तिवारी, उपासिकाव्रज भूषण आचार्य तथा आयुष विश्वास सहित अनेक गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे।





