लखनऊ। सावन का महीना भगवान शिव और माता पार्वती की आराधना के लिए अत्यंत पवित्र माना जाता है। जहां सावन के सोमवार भगवान शिव की उपासना के लिए विशेष महत्व रखते हैं, वहीं सावन के मंगलवार मां गौरी को समर्पित होते हैं। इस दिन सुहागिन महिलाएं अखंड सौभाग्य और पति की लंबी आयु के लिए व्रत रखती हैं, जबकि अविवाहित कन्याएं योग्य वर की प्राप्ति की कामना से मंगला गौरी व्रत करती हैं। वर्ष 2026 में सावन मास 30 जुलाई से 28 अगस्त तक रहेगा। इस दौरान चार मंगलवार पड़ेंगे और इन सभी दिनों में मंगला गौरी व्रत रखा जाएगा। इस दिन भगवान शिव के साथ मां पार्वती की विधि-विधान से पूजा करने का विशेष महत्व माना जाता है। सावन मास के प्रत्येक मंगलवार को मंगला गौरी व्रत रखा जाता है। इस दिन मां गौरी के साथ भगवान शिव और विघ्नहर्ता श्री गणेश की पूजा का विशेष महत्व होता है। इस वर्ष सावन के पहले मंगला गौरी व्रत पर तीन शुभ योगों का संयोग बन रहा है, जो इसे और भी खास बना देता है। जिन नवविवाहित महिलाओं का यह पहला सावन है, उनके लिए इस व्रत से जुड़े कुछ विशेष नियम बताए गए हैं, जिनका पालन करना शुभ माना जाता है। साल 2026 में सावन का पहला मंगला गौरी व्रत 4 अगस्त को पड़ेगा। पंचांग के अनुसार इस दिन सावन माह के कृष्ण पक्ष की षष्ठी तिथि रहेगी, जो रात 10:03 बजे तक प्रभावी होगी। इस दिन तीन शुभ योगों का निर्माण हो रहा है, सर्वार्थ सिद्धि योग, अमृत सिद्धि योग और रवि योग। ये सभी योग रात 9:54 बजे से प्रारंभ होकर अगले दिन 5 अगस्त की सुबह 5:45 बजे तक रहेंगे। वहीं दिन के समय धृति योग सुबह से लेकर शाम 7:33 बजे तक रहेगा, इसके बाद शूल योग प्रारंभ होगा। नक्षत्रों की बात करें तो रेवती नक्षत्र सुबह से रात 9:54 बजे तक रहेगा, जिसके बाद अश्विनी नक्षत्र शुरू होगा।
मंगला गौरी व्रत के नियम
नवविवाहित महिलाओं के लिए मंगला गौरी व्रत से जुड़े विशेष नियम भी हैं। परंपरा के अनुसार, विवाह के बाद पहला सावन होने पर यह व्रत मायके में रखा जाता है। इसके बाद अगले चार वर्षों तक इसे ससुराल में करना चाहिए। कुल मिलाकर इस व्रत को लगातार पांच वर्षों तक करना शुभ माना गया है।
भद्रा और पंचक का साया
पहले मंगला गौरी व्रत के दिन भद्रा और पंचक का भी संयोग रहेगा। भद्रा रात 10:03 बजे से शुरू होकर अगले दिन सुबह 5:45 बजे तक रहेगी, लेकिन इसका प्रभाव स्वर्ग लोक में होने के कारण अशुभ नहीं माना जाएगा। वहीं पंचक सुबह 5:44 बजे से रात 9:54 बजे तक रहेगा, जिसे चोर पंचक कहा जाता है। इस दौरान अपने कीमती सामान की सुरक्षा का विशेष ध्यान रखना चाहिए।
सावन 2026 मंगला गौरी व्रत की तिथियां
पहला मंगला गौरी व्रत: 4 अगस्त, मंगलवार
दूसरा मंगला गौरी व्रत: 11 अगस्त, मंगलवार
तीसरा मंगला गौरी व्रत: 18 अगस्त, मंगलवार
चौथा मंगला गौरी व्रत: 25 अगस्त, मंगलवार
मंगला गौरी व्रत का महत्व
धार्मिक मान्यता के अनुसार, मंगला गौरी व्रत मां पार्वती की कृपा प्राप्त करने का श्रेष्ठ अवसर माना जाता है। यह व्रत विशेष रूप से सुखी वैवाहिक जीवन, अखंड सौभाग्य और पति की दीघार्यु की कामना के लिए किया जाता है। अविवाहित कन्याएं भी मनचाहा और योग्य जीवनसाथी पाने की इच्छा से इस व्रत का पालन करती हैं। ज्योतिष शास्त्र में भी मंगला गौरी व्रत का विशेष महत्व बताया गया है। माना जाता है कि श्रद्धा और नियमपूर्वक यह व्रत करने तथा मां गौरी को सुहाग की सामग्री, श्रृंगार का सामान, लाल पुष्प और फल अर्पित करने से मंगल दोष के प्रभाव को कम करने में सहायता मिलती है। साथ ही दांपत्य जीवन में प्रेम, सुख, सौहार्द और समृद्धि का वास होता है।
मंगला गौरी व्रत पूजा विधि
प्रात:काल ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नान करें और स्वच्छ या लाल/पीले रंग के वस्त्र धारण करें। घर के पूजा स्थान या मंदिर की अच्छी तरह सफाई करके एक चौकी पर लाल या पीला वस्त्र बिछाएं। चौकी पर मां गौरी (माता पार्वती) की प्रतिमा या चित्र स्थापित करें। साथ ही भगवान शिव का भी पूजन करें। मां गौरी को लाल चुनरी, सिंदूर, कुमकुम, हल्दी, अक्षत, लाल पुष्प, फल, मिठाई और सुहाग की सामग्री (चूड़ी, बिंदी, मेहंदी, कंघी आदि) अर्पित करें। घी का दीपक और धूप जलाकर विधि-विधान से पूजा करें। ॐ गौर्यै नम: या ॐ पार्वत्यै नम: मंत्र का श्रद्धापूर्वक जप करें। मंगला गौरी व्रत कथा का श्रवण या पाठ करें और माता से अखंड सौभाग्य, सुखी दांपत्य जीवन तथा परिवार की खुशहाली की प्रार्थना करें। अंत में मां गौरी और भगवान शिव की आरती करें तथा प्रसाद वितरित करें। व्रत का पारण अगले दिन प्रात: या स्थानीय परंपरा एवं पारिवारिक रीति के अनुसार करें।





