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कहानी और क्वालिटी से समझौता नहीं होना चाहिए : मानस शाह

लखनऊ। ‘हमारी देवरानी’, ‘गुलाल’, ‘यम हैं हम’, ‘स्माइल प्लीज’, ‘संकट मोचन हनुमान’ और ‘ये है चाहते’ जैसे टीवी शोज में अपनी पहचान बना चुके अभिनेता मानस शाह जिन्हे इंडस्ट्री में 18 साल हो गए है, ने हाल ही में एक इंटरव्यू दिया जिसमें उन्होंने अपने 18 साल के अभिनय सफर, संघर्ष, ओटीटी, सिनेमा और बदलते मनोरंजन जगत पर खुलकर बात की। पेश हैं बातचीत के प्रमुख अंश…।

आपके अभिनय सफर की शुरूआत कैसे हुई और अब तक का अनुभव कैसा रहा?
मेरा सफर बहुत अच्छा रहा है। मेरी शुरूआत टीवी शो ‘हमारी देवरानी’ से हुई थी , इसके बाद मैंने ‘गुलाल’, ‘स्माइल प्लीज’ जैसे कई शो किए. उस समय मुझे ज्यादातर गुजराती पृष्ठभूमि वाली कहानियों में काम करने का मौका मिलता था. फिर मैंने सोचा कि मुझे खुद को और बेहतर बनाना है, इसलिए मैंने संस्कृत पढ़नी शुरू की. इसके बाद मुझे पौराणिक शो ह्यसंकट मोचन हनुमान’ और ‘यम हैं हम’ करने का मौका मिला. मुझे हर तरह के किरदार निभाना पसंद है। सकारात्मक हो या नकारात्मक, हर भूमिका की अपनी अहमियत होती है। अभिनय में हर भावना को जीना जरूरी है।

क्या कभी लगा कि आपने कोई दूसरा करियर चुना होता तो बेहतर होता?
हां, शुरूआत में ऐसा लगा था. मैं पहले आईएएस बनना चाहता था और अहमदाबाद में उसकी तैयारी भी कर रहा था. उसी दौरान मुझे ‘हमारी देवरानी’ का आॅफर मिला. काफी समय तक मुझे लगा कि शायद मैंने गलत फैसला लिया और मुझे आईएएस बनना चाहिए था , लेकिन आज मैं गर्व से कह सकता हूं कि मैं जहां हूं, वहीं खुश हूं. सिनेमा भी एक मां की तरह है और मैंने इसे बहुत प्यार दिया है। अब पीछे मुड़कर देखने पर कोई पछतावा नहीं होता।

आपने कहा कि आपने हजारों आॅडिशन दिए हैं. वह दौर कैसा था?
जब मैं मुंबई आया था, तब तरीका बिल्कुल अलग था. उस समय पोस्टकार्ड साइज फोटो होती थीं, जिनके पीछे नाम, उम्र और नंबर लिखकर प्रोडक्शन हाउस के बाहर रखे बॉक्स में डालनी पड़ती थीं। मैंने 2008 से लेकर 2019-20 तक करीब 8,647 आॅडिशन दिए। मुझे आॅडिशन देना पसंद था, क्योंकि हर बार कुछ नया सीखने को मिलता था. कभी मुझे पागल आदमी का किरदार मिला, कभी बूढ़े इंसान का, कभी कॉमेडियन का. चुनौतीपूर्ण किरदार हमेशा मुझे आकर्षित करते रहे।

आज के समय में क्या बदलाव आया है?
पहले कलाकारों को लगातार आॅडिशन देने पड़ते थे, लेकिन अब अगर आपका काम लोगों तक पहुंच चुका है और आप किरदार के लिए फिट बैठते हैं तो कई बार आपको सीधे अप्रोच किया जाता है। कोरोना के बाद पूरी इंडस्ट्री की सोच बदल गई है. मैंने अभिनय के साथ बिजनेस की तरफ भी ध्यान दिया। अब मैं अभिनेता होने के साथ-साथ प्रोड्यूसर, फाउंडर और लेखक के तौर पर भी काम कर रहा हूं। मैंने अपना प्रोडक्शन हाउस शुरू किया है, जहां सामाजिक संदेशों से जुड़ी कहानियों पर काम कर रहा हूं।

ओटीटी और आज के कंटेंट को लेकर आपकी क्या राय है?
ओटीटी ने काफी बदलाव लाया है, लेकिन यहां भी कुछ चुनौतियां हैं. बड़ी वेब सीरीज का काम कुछ चुनिंदा लोगों तक सीमित होता जा रहा है. नए कलाकारों को मौके कम मिल रहे हैं। इसके अलावा आजकल कुछ कंटेंट सिर्फ दर्शकों का ध्यान खींचने के लिए बनाया जा रहा है। मेरा मानना है कि मनोरंजन होना चाहिए, लेकिन कहानी और क्वालिटी से समझौता नहीं होना चाहिए. परिवार के साथ देखने लायक कंटेंट भी जरूरी है।

आपने टीवी, फिल्म और ओटीटी तीनों प्लेटफॉर्म में काम किया है. इनमें क्या अंतर महसूस करते हैं?
सिनेमा का अनुभव हमेशा अलग होता है। जब मैंने पहली बार खुद को बड़े पर्दे पर देखा और थिएटर में सैकड़ों लोगों की नजरें सिर्फ मुझ पर थीं, वह एहसास बहुत खास था. रील या छोटे वीडियो में कुछ सेकंड में प्रभाव डालना होता है, लेकिन फिल्म में दो घंटे तक दर्शकों को बांधे रखना पड़ता है। यही एक अभिनेता की असली परीक्षा है।

बिग बॉस 18 को लेकर आपका नाम काफी चर्चा में आया था. इस बारे में आप क्या कहना चाहेंगे?
बिग बॉस 18 को लेकर मेरा नाम चर्चा में आया था, लेकिन मैं उस शो का हिस्सा नहीं था. दरअसल, सोशल मीडिया पर एक खबर और चर्चा के कारण यह बात काफी फैल गई थी। मेरा नाम जोड़कर कई बातें कही गईं, लेकिन सच्चाई यह है कि मैं शो में शामिल नहीं हुआ था। इस दौरान चाहत पांडे से जुड़ी कुछ बातें भी सामने आई थीं, जिनके कारण यह चर्चा और बढ़ गई. वह एक अच्छी कलाकार हैं और मैं उनके काम का सम्मान करता हूं। कई बार सोशल मीडिया पर छोटी-सी बात भी बड़ी चर्चा बन जाती है।

आप अपने करियर के इस पड़ाव पर क्या करना चाहते हैं?
मैंने हमेशा चुनौतीपूर्ण काम करना चाहा है. मुझे अच्छे किरदार मिलेंगे तो मैं हर शैली में काम करना चाहूंगा. लेकिन अब मैं सिर्फ अभिनेता बनकर नहीं रहना चाहता। मैं नई कहानियां बनाना चाहता हूं। मैंने अपना यूट्यूब प्लेटफॉर्म भी शुरू किया है, जहां मैं बिना किसी स्क्रिप्ट के अपने विचार लोगों तक पहुंचाता हूं. कैमरा मेरे लिए हमेशा खुशी की चीज रहा है।

ओटीटी के बढ़ते दौर में कंटेंट को लेकर आपकी क्या राय है?
मेरा मानना है कि कंटेंट अच्छा और मजबूत होना चाहिए. सिर्फ दर्शकों का ध्यान खींचने के लिए अश्लीलता या गलत चीजों को बढ़ावा देना सही नहीं है। कॉमेडी का उद्देश्य लोगों को हंसाना होना चाहिए, किसी का अपमान करना नहीं। समय रैना और कुणाल कामरा जैसे कॉमेडियनों के कंटेंट को लेकर मेरी अपनी राय है कि मजाक में भी मयार्दा और जिम्मेदारी जरूरी है। अमिताभ बच्चन जैसे दिग्गज कलाकारों का सम्मान होना चाहिए, क्योंकि उन्होंने अपनी मेहनत से एक मिसाल कायम की है. अच्छी कॉमेडी वही है जो बिना किसी की भावनाओं को ठेस पहुंचाए लोगों को हंसाए।

अपनी जिंदगी और सफर को पीछे मुड़कर देखते हैं तो क्या महसूस होता है?
मैं अपनी जिंदगी से बहुत संतुष्ट हूं. कोरोना के समय मैंने खुद को समझने का मौका पाया। मैंने सोचा कि जिंदगी में जो कुछ मिला है, उसके लिए शुक्रगुजार होना चाहिए। मैं मानता हूं कि जिंदगी आइसक्रीम की तरह है, अगर हम तुलना करते रहेंगे तो हमारी अपनी खुशियां भी खत्म हो जाएंगी , इसलिए जो मिला है, उसे पूरी तरह जीना चाहिए।

अपने फैंस के लिए क्या कहना चाहेंगे?
मैं अपने फैंस से यही कहना चाहता हूं कि किसी को भी अपना रोल मॉडल सोच-समझकर चुनें। सिर्फ किसी की लोकप्रियता देखकर उसे फॉलो न करें। यह देखें कि वह समाज के लिए क्या कर रहा है. मैं खुद को अभिनेता नहीं बल्कि सिनेमा का छात्र मानता हूं. सिनेमा ने मुझे बहुत कुछ दिया है और अब मेरी कोशिश है कि मैं समाज और आने वाली पीढ़ी के लिए कुछ अच्छा कर सकूं।

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