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एक्टिंग में हर किरदार से मिलती है नई सीख : देविश आहूजा

अपने दमदार अभिनय से छोटे पर्दे पर खास पहचान बना चुके हैं
लखनऊ। टीवी इंडस्ट्री के प्रतिभाशाली अभिनेता देविश आहूजा ने बतौर बाल कलाकार अपने करियर की शुरूआत की और आज अपने दमदार अभिनय से छोटे पर्दे पर खास पहचान बना चुके हैं। ‘कर्मफल दाता शनि’ , फिर ‘वीर की अरदास वीरा , महाभारत, सिया के राम, और मेरा बालम थानेदार जैसे लोकप्रिय शोज में अपनी छाप छोड़ चुके देविश इन दिनों मेडिकल ड्रामा हुई गुम यादें को लेकर चर्चा में हैं। खास बातचीत में उन्होंने अपने सफर, परिवार, एक्टिंग, फिटनेस और भविष्य की योजनाओं पर खुलकर बात की।

आपने बाल कलाकार के तौर पर कर्मफल दाता शनि और वीर की अरदास वीरा जैसे शोज में काम किया, उस शुरूआती दौर को आज कैसे देखते हैं?
मैं उस दौर को अपने करियर की सबसे खूबसूरत शुरूआत मानता हूं. मैंने बहुत छोटी उम्र में काम शुरू किया और उस वक्त मुझे इतना समझ नहीं था कि एक्टिंग को कैसे समझना है। मेरी मां-पापा ने हर कदम पर मेरा साथ दिया. मैं सूरत से मुंबई शूट के लिए ट्रैवल करता था और उसी दौरान बहुत कुछ सीखा. आज पीछे मुड़कर देखता हूं तो लगता है कि वही दौर मेरी नींव बना।

आपकी फैमिली सूरत में रहती है, ऐसे में काम और परिवार के बीच बैलेंस कैसे मैनेज करते हैं?
परिवार मेरे लिए सबसे बड़ी ताकत है. मैं जॉइंट फैमिली से आता हूं और उनसे जुड़ाव हमेशा बना रहता है. जब भी शूट से वक्त मिलता है, मैं सूरत चला जाता हूं या परिवार मुंबई आ जाता है। काम कितना भी व्यस्त क्यों न हो, परिवार के लिए समय निकालना जरूरी है। अभी हाल में मेरी फैमिली मुम्बई आई थी, इसके अलावा मैं भी इंदौर गया था।

वीर की अरदास वीरा में बलदेव का किरदार आज भी याद किया जाता है. उस रोल को आप अपने करियर में कितना अहम मानते हैं?
बलदेव मेरे करियर का टर्निंग पॉइंट रहा है. उस किरदार ने मुझे पहचान दी. आज भी लोग मुझे बलदेव के नाम से पहचानते हैं. हालांकि वो किरदार नेगेटिव था. लेकिन एक कलाकार के लिए इससे बड़ी बात क्या होगी कि उसका किरदार उससे ज्यादा मशहूर हो जाए।

मेडिकल ड्रामा हुई गुम यादें जैसे शो में काम करने के बाद आपकी एक्टिंग को लेकर सोच में क्या बदलाव आया?
इस शो ने मुझे बहुत कुछ नया सिखाया है. मेडिकल ड्रामा करना काफी चुनौतीपूर्ण होता है क्योंकि इसमें सिर्फ एक्टिंग नहीं, बल्कि तकनीकी समझ भी जरूरी होती है. मेडिकल टर्म्स, डॉक्टरों की बॉडी लैंग्वेज और पेशेंट्स के साथ उनका व्यवहार—इन सब पर काम करना पड़ा. इससे मेरी तैयारी और रिसर्च करने की आदत और मजबूत हुई।

क्या सेट पर कोई मजेदार किस्सा या प्रैंक हुआ है?
हाँ, सेट पर एक मजेदार किस्सा जरूर रहा है.हमने एक को-एक्टर के साथ हल्का सा प्रैंक किया था, जिसमें उन्हें यह बताया गया कि उन्हें तुरंत आॅडिशन के लिए बुलाया गया है. वह काफी सीरियस होकर उसी हिसाब से तैयारी करने लगे और हमारे सामने ही मैसेज और रिप्लाई भी कर रहे थे.थोड़ी देर बाद जब उन्हें पता चला कि यह सिर्फ एक मजाक था, तो वह भी हंस पड़े और पूरा माहौल बहुत हल्का और मजेदार हो गया।

अविनाश मिश्रा, शब्बीर अहलूवालिया, आशी सिंह, वत्सल शेठ और नेहा सोलंकी जैसे को-स्टार्स के साथ काम करने का अनुभव कैसा रहा?
मैं खुद को बेहद खुशकिस्मत मानता हूं कि मुझे इतने शानदार और अनुभवी कलाकारों के साथ काम करने का मौका मिला. हर को-स्टार से मैंने कुछ न कुछ नया सीखा है, चाहे वह अभिनय की बारीकियां हों, काम के प्रति अनुशासन हो या सेट पर उनका व्यवहार। सबसे बड़ी सीख मुझे यही मिली कि आप चाहे कितने भी बड़े कलाकार या स्टार क्यों न बन जाएं, जमीन से जुड़े रहना और हमेशा सीखते रहने का नजरिया बनाए रखना सबसे ज्यादा जरूरी होता है।

हाल ही में आपने राशा थडानी और वेदान्त रैना के साथ एड शूट किया, उनके साथ काम करने का कैसा अनुभव रहा?
उनके साथ काम करने का अनुभव बहुत अच्छा रहा. मैं पहले से ही राशा के भाई को जानता हूं और हम अच्छे दोस्त हैं, इसलिए शूट के दौरान माहौल काफी सहज और दोस्ताना रहा. वेदान्त के साथ भी काम करके अच्छा लगा. दोनों ही बेहद पॉजिटिव, प्रोफेशनल और जमीन से जुड़े हुए हैं. शूट के दौरान हम सबके बीच काफी मजेदार बातचीत हुई। इंडस्ट्री छोटी है और किसी न किसी कनेक्शन से सब जुड़े होते हैं, इसलिए काम करना और सहज हो जाता है।

सोनी के साथ आपका अनुभव कैसा रहा?
सोनी के साथ मेरा अनुभव अब तक बेहद शानदार रहा है. यहां काम करने का माहौल बहुत ही प्रोफेशनल, सपोर्टिव और पॉजिटिव है, जहां हर कोई अपने काम को पूरी ईमानदारी और मेहनत से करता है। यादें में मुझे बेहतरीन कलाकारों के साथ काम करने का मौका मिला, जैसे इकबाल खान, गुल्की जोशी, सृष्टि सिंह और अन्य शानदार को-एक्टर्स.सभी बेहद प्रोफेशनल, सहयोगी और अपने काम में माहिर हैं. उनके साथ काम करके हर दिन कुछ नया सीखने को मिलता है. पूरी टीम, चाहे वह प्रोडक्शन हाउस हो या क्रिएटिव टीम, सभी बहुत अच्छे तरीके से काम को मैनेज करते हैं।

आप किस तरह के किरदार निभाना चाहेंगे?
बिल्कुल, मैं मानता हूं कि ओटीटी प्लेटफॉर्म्स ने कलाकारों के लिए नए और बड़े मौके खोल दिए हैं.यहां कंटेंट सिर्फ मनोरंजन तक सीमित नहीं है, बल्कि यह ज्यादा रियल और अलग-अलग तरह की कहानियों पर आधारित होता है. अगर मुझे मौका मिले तो मैं इंटेंस, ग्रे शेड्स या एक मजबूत नेगेटिव किरदार निभाना चाहूंगा।

आप बेहद फिट और स्टाइलिश रहते हैं. फिटनेस और लाइफस्टाइल को लेकर अपने फैंस को क्या टिप्स देना चाहेंगे?
फिटनेस सिर्फ अच्छी बॉडी बनाने के लिए नहीं, बल्कि अच्छा महसूस करने के लिए होनी चाहिए. एक्टिव रहना जरूरी है. जहां तक स्टाइल की बात है, ब्रांड्स से ज्यादा जरूरी आपका कॉन्फिडेंस है।

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