फिल्म में गिनती के गाने हैं, ये गाने भी आपको पसंद आनेवाले हैं
लखनऊ। अनुराग कश्यप की फिल्म बंदर सिनेमाघरों में दस्तक दे चुकी है। बंदर के साथ अनुराग कश्यप ने एक बार फिर दर्शकों तक एक शानदार डार्क फिल्म पहुंचा दी है। अनुराग कश्यप को उनकी फिल्मों को बेहद डार्क रियलिस्टिक तरीके से पर्दे पर परोसने के लिए जाना जाता है। इस फिल्म में भी अनुराग कश्यप ने वो बात सही साबित की है। अनुराग कश्यप के डायरेक्शन और बॉबी देओल की शानदार एक्टिंग बंदर को खास बनाती है।
समर मेहरा (बॉबी देओल) एक ऐसा सेलेब्रिटी जो स्टारडम से दूर रह गया है। वो अब शादियों में गाना गाता है, पैसों की उसके पास कमी है। उसके कोई दोस्त नहीं हैं। एक गर्लफ्रेंड है जिससे वो डेटिंग ऐप के जरिए मिला है। उसकी गर्लफ्रेंड उससे काफी छोटी है। समर मेहरा का जीवन सामान्य चल रहा होता है। लेकिन एक दिन दरवाजे पर हुई पुलिसवालों की दस्तक उसके पूरे जीवन को पलट देती है। समर मेहरा पर उसकी एक्स गायत्री (सपना पब्बी) ने रेप का आरोप लगाया है। गायत्री से भी समर उसी डेटिंग ऐप पर मिला होता है जिसपर खुशी से उसकी मुलाकात होती है। समर और गायत्री की मुलाकात तो आम होती है, लेकिन दोनों की कहानी जैसे-जैसे आगे बढ़ती है, समर को एहसास होता है कि गायत्री उससे आॅबसेस्ड हो चुकी है। वो गायत्री से दूरी बना लेता है। वो गायत्री को अपने फोन से ब्लॉक कर देता है। अनुराग कश्यप की ये फिल्म कोर्ट रूम ड्रामा या समर को सही साबित करने के चक्कर में नहीं पड़ती है। फिल्म दिखाती है कि कैसे एक इंसान पर लगा रेप का आरोप उसे कैसे तोड़ देता है। बॉबी देओल ने अपनी एक्टिंग से इस बात को बखूबी दिखाया है। अनुराग कश्यप ने बॉबी देओल को बहुत सारे डायलोग्स नहीं दिए हैं, लेकिन उन्होंने बिना बहुत कुछ बोले अपनी एक्टिंग से फिल्म को मजबूत बनाया है। फिल्म जेल की दुनिया के बारे में दिखाती है। फिल्म दिखाती है कि कैसे जेल में बंद सब कैदियों के अपने-अपने गुट हैं। जेल में रेप में बंद आरोपियों को कोई पसंद नहीं करता है। उनसे कोई बात करना पसंद नहीं करता है।
फिल्म में एक डायलोग है जहां जेल में बंद एक कैदी कहता है-ये आरोप (रेप) अपने आप में पूरा जजमेंट है। फिल्म इस डायलोग को सच करती भी दिखती है। जेल में बंद समर कैसे धीरे-धीरे अपनी मानसिक स्थिरता खोता जाता है और कैसे फिल्म के अंत तक वो उसी रंग में रंग जाता है। अनुराग कश्यप ने अपने कैमरे में जेल के कई ऐसे सीन कैद किए हैं जो आपको असहज कर सकते हैं। चाहे वो बाथरूम में दिखाई गंदगी हो, या नाली से निकलता कॉक्रोच, ये वो सीन्स हैं जो देख शायद आप अपनी आंखें पर्दे से हटा लें, लेकिन इन सीन्स में बॉबी देओल ने जो कमाल का काम किया है, वो तारीफ के काबिल है। फिल्म देखने के बाद आप कह सकते हैं कि ये फिल्म बॉबी देओल के करियर की बेस्ट फिल्म है। फिल्म में एक सीन है जहां बॉबी देओल कॉकरोच को चप्पल से मारने की कोशिश करते हैं, लेकिन वो कॉकरच नहीं मरता है। बॉबी देओल फिर इस बात पर जिस तरह से अपनी चिढ़ निकालते हैं, वो आपको पसंद आएगा। सपना पब्बी की आंखें और उनकी रहस्मयी मुस्कान उनके प्यार में बदले जुनून को बहुत खूबसूरती से दिखाती है। गायत्री का समर के लिए जुनून बेहद डराने वाला लगता है। वहीं, समर की बहन का किरदार सान्या मल्होत्रा ने निभाया है। सान्या ने एक बार फिर अपने छोटे से रोल से कमाल कर दिखाया है। अगर आप अनुराग कश्यप की डार्क थ्रिलर फिल्मों के फैन हैं, तो आपको ये फिल्म सिनेमाघरों में देखने के लिए जरूर जानी चाहिए। फिल्म में गिनती के गाने हैं, ये गाने भी आपको पसंद आनेवाले हैं।
कास्ट: बॉबी देओल, सपना पब्बी, सान्या मल्होत्रा
डायरेक्टर: अनुराग कश्यप
रेटिंग-3/5





