गुपी गाइन बाघा बाइन बाल नाटक ने दिया संदेश
दो दिवसीय उल्लास बाल पर्व में आज का आकर्षण बनेगा
- गोपाल से जगत पाल तक और एक सपना
लखनऊ। यायावर रंगमंडल और संस्कृति मंत्रालय भारत सरकार, नई दिल्ली के सहयोग से दो दिवसीय उल्लास बाल पर्व 2026 का आयोजन 29 और 30 जून को राय उमानाथ बली में किया जा रहा है। यह एक बड़ी उपलब्धि है कि बाल मनोविज्ञान का अनुसरण करते हुए पूरी तरह से बाल रंगकर्म को समर्पित उल्लास बाल पर्व का यह 32वां आयोजन है। इस पर्व की पहली संध्या, सोमवार 29 जून को इंदिरा नगर स्थित के.के. अकादमी, के बच्चों द्वारा तैयार नाटक गुपी गाइन बाघा बाइन का प्रभावी मंचन पुनीत मित्तल के निर्देशन में किया गया। सत्यजीत रे के प्रसिद्ध रूपांतरण से प्रेरित इसकी मूल कथा उपेन्द्र किशोर रे चौधरी की है जबकि इसका हिन्दी नाट्य रूपांतरण आद्या घोषाल ने किया है वहीं इसकी अवधारणा लक्ष्मी कौल की है। इस नाटक ने संदेश दिया कि संगीत, प्रेम और भाईचारा ही दुनिया की सबसे बड़ी ताकत हैं। युद्ध और हिंसा व्यर्थ हैं। मंचित नाटक के दिलचस्प कथानक के अनुसार गूपी एक साधारण गाँव का लड़का होता है जिसे गाना बहुत पसंद है, लेकिन उसकी आवाज इतनी बेसुरी होती है कि राजा उसे राज्य से निकाल देता है। दूसरी ओर, बाघा ढोल बजाने का शौकीन है, लेकिन उसकी ढोलक भी लोगों को पसंद नहीं आती है। इसलिए उसे भी उसके गाँव से निकाल दिया जाता है। दोनों की मुलाकात जंगल में होती है। एक रात वे साथ मिलकर गाना-बजाना शुरू करते हैं। उनकी मासूमियत और संगीत से प्रसन्न होकर भूतों के राजा उन्हें तीन जादुई वरदान देते हैं। पहला वरदान होता है कि जब चाहें वे स्वादिष्ट भोजन और कपड़े पा सकते हैं। दूसरा, जादुई जूतों की मदद से कहीं भी तुरंत पहुँच सकते हैं और तीसरा वरदान था कि उनके संगीत को सुनकर कोई भी व्यक्ति मंत्रमुग्ध होकर हिल नहीं सकेगा। इन वरदानों की मदद से गूपी और बाघा, शुंडी राज्य पहुँचते हैं, जहाँ वे राजगायक बन जाते हैं। बाद में उन्हें पता चलता है कि पड़ोसी हल्ला राज्य का राजा छल और षड्यंत्र के कारण युद्ध करने वाला है। गूपी और बाघा अपने संगीत, बुद्धिमानी और जादुई शक्तियों का उपयोग करके युद्ध को रोकते हैं, दोनों राज्यों में शांति स्थापित करते हैं और अंत में दोनों राजकुमारियों से उनका विवाह हो जाता है।
मंच पर हिमांशु गुप्ता ने कथावाचक, नवनीत ने गुपि गाइन, अनिमेश कुमार ने बाघा बाइन, दीपांशु गुप्ता ने प्रहरी, सृष्टि ने भूतों की रानी, मनीष ने शुंडी के राजा, अवियोम सुंदर ने आमलोकी एवं हल्ला के राजा, मोहम्मद अमीन ने बर्फ़ी, अभिषेक कश्यप ने महामंत्री, हर्षवर्धन-अभिज्ञान ने राहु-केतु, प्रांजल मिश्रा-आराधिका सिंह ने राजकुमारी मणिमाला एवं मुक्तामाला की भूमिका बखूबी अदा की। नृत्य दल में आध्या वर्मा, सनाया फातिमा, हर्ष सिंह, वान्या शर्मा, मान्या, दृष्टि सिंह, नुसरत, अभिश्री, सान्वी और गाँव वालों में आराधिका सिंह, विजय यादव, अभिषेक कश्यप, हरीश, आन्या शामिल रहीं। इसके साथ ही भूत के दल में अंश, अरसलान गुजर, अब्दुल रहमान, अनंत, प्रियांशु और कलाकारों के दल में विजय यादव, हरीश, आराधिका सिंह, दृष्टि सिंह, मान्या, सनाया फातिमा ने अभिनय किया। योद्धाओं के समूह में सृष्टि, वीरा सिंह, आदित्य, मेहक, अंकिता शामिल रहीं। इन सब ने दर्शकों की तालियां अर्जित की। मंच पार्श्व में प्रकाश परिकल्पना एवं संचालन का दायित्व, मोहम्मद हफीज, संगीत संचालन एवं संकलन का वंशिका शर्मा, वेशभूषा का हर्षिता बंसल, प्रॉप्स निर्माण का हर्षिता बंसल एवं आनंद यादव, सहायक का प्रांजल मिश्रा, मंच व्यवस्था का विनय गुज्जर एवं सुश्रुत गुप्ता, जनसंपर्क का कीर्ति प्रकाश एवं पुष्पलता मित्तल, छायांकन का सरबजीत एवं अभिषेक, रूप-सज्जा का मनोज वर्मा, मंच संचालन का नवल शुक्ला ने, प्रभावी रूप में निभाया।
उल्लास बाल पर्व की दूसरी संध्या मंगलवार 30 जून को जानकीपुरम स्थित पूरन शिक्षा केंद्र के छात्रों द्वारा तैयार लघु नृत्य नाटिका गोपाल से जगत पाल तक का प्रदर्शन वंशिका शर्मा की परिकल्पना एवं नृत्य निर्देशन में किया जाएगा। इसमें विनय कुमार सहायक रहेंगे। दूसरी प्रस्तुति गोमतीनगर स्थित सेंट पीटर्स इंटर कॉलेज के प्रतिभागियों द्वारा तैयार नाटक ह्लएक सपनाह्व का मंचन योगेन्द्र जोशी के आलेख एवं अंकित श्रीवास्तव के निर्देशन में किया जाएगा। इसमें कार्यशाला निर्देशक मोहम्मद हफीज हैं। यह प्रस्तुतियां शाम सात बजे से होंगी।





