काकोरी ट्रेन एक्शन के शताब्दी वर्ष पूर्ण होने पर दास्तानगो हिमांशु बाजपेयी ने दास्तानगोई की
लखनऊ। लॉस्ट लाइब्रेरी की ओर से शनिवार को होटल सराका में काकोरी ट्रेन एक्शन के शताब्दी वर्ष पूर्ण होने पर दास्तानगो हिमांशु बाजपेयी ने दास्तानगोई की। दास्तान-ए-सरफरोशी शीर्षक से हुई दास्तानगोई में काकोरी एक्शन को दर्शकों के सामने रखा। हिमांशु बाजपेयी ने कहा कि अगर कोई एक व्यक्ति भी उनकी ‘दास्तान’ के सार को पूरी तरह समझ ले, तो कहानी कहने का उद्देश्य पूरा हो जाएगा। हिमांशु ने अशफाकउल्लाह खान और राम प्रसाद बिस्मिल के बीच के स्नेह और घनिष्ठ संबंधों का वर्णन करके धर्मनिरपेक्षता के अंतर्निहित संदेश को श्रोताओं तक खूबसूरती से पहुंचाया। यह वृत्तांत दोनों स्वतंत्रता सेनानियों के जीवन के मार्मिक पहलुओं से भरा था, जैसे कि कैसे वे एक ही थाली में खाना खाते थे और अपने धर्म-पराये संबंधों की रक्षा करते थे। दास्तान-ए-सरफरोशी काकोरी एक्शन की कथा को शुरू से आखिर तक यानी उसकी ऐतिहासिक पृष्ठभूमि और मंसूबाबंदी से लेकर ट्रेन एक्शन, क्रांतिकारियों का निजी जीवन, गिरफ्तारियां, मुकदमा, जेल-गतिविधियां, सजा एवं संदेश तक हर एक पड़ाव को इस रोचकता से प्रस्तुत करती है कि सुनने वाले इस दास्तान में बंध गए। हिमांशु बाजपेयी ने दास्तान को लिखने के लिए तीन साल से ज्यादा का शोध किया है। काकोरी एक्शन में शामिल क्रांतिकारियों के फर्स्ट परसन अकाउंट्स, विशेषज्ञों द्वारा लिखित किताबों एवं क्रांतिकारियों के परिजनों से बातचीत दास्तान का मूलाधार रहे। दास्तान कार्यक्रम में प्रसार भारती के अध्यक्ष नवनीत सहगल, वंदना सहगल, समाज कल्याण मंत्री असीम अरुण, सुधांशु श्रीवास्तव, डॉ दीपक अग्रवाल, शहजादा नसीम जिया काकोरी समेत अन्य मौजूद रहे।





