महिलाओं व पुरूषों द्वारा सामूहिक झोड़ा नृत्य का जबर्दस्त प्रदर्शन किया
लखनऊ। श्री रामलीला समिति पर्वतीय महापरिषद शाखा गोमती नगर के तत्वावधान में आज मंगलवार को ऐतिहासिक स्याल्दे बिखौती मेले का आयोजन पर्वतीय महापरिषद भवन, गोमती नगर में किया गया। इस अवसर पर मुख्य अतिथि गणेश चन्द्र जोशी-अध्यक्ष पर्वतीय महापरिषद, विशिष्ट अतिथि महेन्द्र सिंह रावत, महासचिव रहे। अतिथियों का माल्यार्पण कर स्वागत शाखा अध्यक्ष गोविन्द सिंह बोरा एवं महासचिव रमेश चन्द्र उपाध्याय सहित सभी पदाधिकारियों व कार्यकारिणी सदस्यों द्वारा किया गया। विशिष्ट अतिथि को शाखा के श्री ख्याली सिंह कड़ाकोटी, पुष्कर सिंह नयाल, नारायण सिंह नेगी, टी डी कांडपाल, उमेश कैड़ा, हुकम सिंह, किशन सिंह बोरा, नरेन्द्र सिंह फत्र्याल, द्वारा बुके भेट किया गया। कार्यक्रम का मुख्य आकर्षण विविध प्रकार के उत्तराखण्डी झोड़ा नृत्य एवं गायन रहे। कार्यक्रम का शुभारम्भ वन्दना गीत के साथ हुआ गायक वादक कलाकार हारमोनियम पर नरेन्द्र सिँह फर्त्याल, कार्यक्रम में ग्राउण्ड में 250 से अधिक महिलाओं व पुरूषों द्वारा सामूहिक झोड़ा नृत्य का जबर्दस्त प्रदर्शन किया गया जिसमें अनेक पुराने एवं नए झोड़ा गीतों पर नृत्य प्रस्तुत किया गया।
इस अवसर पर अनेक गणमान्य अतिथिगण एवं दर्शक उपस्थित थे जिनमें पर्वतीय महापरिषद के पदाधिकारीगण, साहित्यकार, समाज सेवी आदि उपस्थित थे जिनमें केएन उपाध्याय, ज्ञान पन्त, केएन पाण्डेय, महेन्द्र पन्त, केसी पन्त, केएस रावत, केएन पाठक, धन सिंह मेहता, पुष्कर सिंह नयाल, जितेन्द्र उपाध्याय,किशन सिंह वोरा,कमल सिंह नेगी, बलवंत वाँणगी, नवीन जोशी, टीडी काण्डपाल, केएस रावत, वीरेन्द्र आर्या, चित्रा काण्डपाल, सुमन रावत राधिका बोरा, विद्याधर पाठक, हरीश चन्द्र जोशी, उमेद सिंह देउपा सहित अनेक लोग उपस्थित रहे। मेले का इतिहास-विदित है कि अल्मोड़ा जनपद के द्वाराहाट कस्बे में सम्पन्न होने वाला स्याल्दे बिखौती का प्रसिद्ध मेला प्रतिवर्ष वैशाख माह में सम्पन्न होता है । हिन्दू नव संवत्सर की शुरूआत ही के साथ इस मेले की भी शुरूआत होती है जो चैत्र मास की अन्तिम तिथि से शुरू होता है। यह मेला द्वाराहाट से आठ कि.मी. दूर प्रसिद्ध शिव मंदिर विभाण्डेश्वर में लगता है। मेला दो भागों में लगता है । पहला चैत्र मास की अन्तिम तिथि को विभाण्डेश्वर मंदिर में तथा दूसरा वैशाख माह की पहली तिथि को द्वाराहाट बाजार में । मेले की तैयारियाँ गाँव-गाँव में एक महीने पहले से शुरू हो जाती हैं । चैत्र की फूलदेई संक्रान्ति से मेले के लिए वातावरण तैयार होना शुरू होता है । गाँव के प्रधान के घर में झोड़ों का गायन प्रारम्भ हो जाता है ।





