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सूबे के अन्नदाताओं के माथे पर चिंता की लकीरें…!

  • मानसून के मौसम में 40 जिलों में औसत से कम बारिश

  • प्रदेश के 13 जिलों के 385 गांव बाढ़ की चपेट में

संजय धीमान
लखनऊ। देश के कई राज्यों में बाढ़ के हालात हैं तो वहीं दूसरी तरफ यूपी के अधिकांश जिलों में बारिश न
होने से धान की फसलें बिना पानी के सूख रही हैं। पूर्वांचल सहित यूपी के कई जिलों में सूखे के आसार नजर
आ रहे हैं। सूबे के अन्नदाताओं के माथे पर चिंता की लकीरें स्पष्ट दिखाई दे रही हैं। दूसरी तरफ प्रदेश के
कई ऐसे जिले है जहां बारिश से या फिर नदियों के उफान से बाढ़ की स्थिति बनी हुई है। किसान कहीं कम
बारिश से तो कहीं ज्यादा बारिश की मार झेल रहा है। यूपी के आधे से ज्यादा जिलों में मानसून के इस मौसम
में अभी तक औसत से कम बारिश दर्ज की गई है।

भारतीय मौसम विज्ञान केंद्र लखनऊ की ओर से उपलब्ध कराए गए ताजा आंकड़ों से जानकारी मिली है। आंकड़ों के मुताबिक, मानसून की शुरुआत के बाद जून के पहले सप्ताह से 28 जुलाई तक उत्तर प्रदेश के 75 जिलों में से 40 में औसत से कम वर्षा हुई है। इन जिलों में से ज्यादातर पूर्वी उत्तर प्रदेश के हैं। आंकड़ों के अनुसार, कौशांबी, कुशीनगर और देवरिया में लंबी अवधि के औसत की तुलना में लगभग 70 फीसदी कम बारिश दर्ज की गई है। वहीं, संत कबीर नगर, पीलीभीत, मिर्जापुर, श्रावस्ती, चंदौली, बस्ती और कुछ अन्य जिलों में लंबी अवधि के औसत से बहुत कम बारिश हुई है। बारिश की कमी से धान और मक्के की रोपाई की तैयारी कर रहे किसानों की चिंताएं बढ़ गई हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि मेन्थॉल एक और फसल है, जिसे कम बारिश के कारण नुकसान होने की आशंका है। मौसम विभाग के मुताबिक, मानसून के इस मौसम में यूपी के 18 जिलों में सामान्य बारिश दर्ज की गई है, जबकि 17 जिलों में इस अवधि में औसत से अधिक पानी बरसा है। लखनऊ और बाराबंकी जिलों के आस-पास के किसानों से बात की गई तो इनका कहना है कि बारिश ना होने से रोपा धान सूख रहा है।

हम किसानों के लिए गेहूं और धान ही मुख्य फसल है और बारिश ना होने से हम लोगों के लिए साल भर की मेहनत और परिश्रम सब बर्बाद हो रहा है। किसानों के लिए बारिश ना होने, नहरों में पानी के ना होने जैसी स्थिति से निपट पाना मुश्किल हो रहा है। दूसरी तरफ महंगाई की मार के बाद मौसम की मार ने किसानों की कमर तोड़ दी है। कृषि मंत्री सूर्य प्रताप शाही ने इस बाबत किसानों से अपील की है कि ऐसे जिले वैकल्पिक खेती का सहारा ले सकते हैं। सरकार ने इसके लिए बीजों की मिनी किट तैयार की है। खासतौर पर ऐसे जिलों में मिलेट्स, ज्वार, बाजरा, मक्का की खेती की जा सकती है। उन्होंने बताया कि हमारे लगभग 17 जिले ऐसे हैं जहां अधिक वर्षा हुई है और 9 जिले ऐसे हैं जहां बहुत कम वर्षा हुई है।

पश्चिमी उत्तर प्रदेश में ज्यादा बारिश हुयी है एवं पूर्वी उत्तर प्रदेश में कम बारिश हुयी है। इस स्थिति को ध्यान में रखते हुये किसान वैकल्पिक खेती कर सकते हैं। राहत आयुक्त जीएस नवीन कुमार ने बताया कि पिछले 24 घंटों में प्रदेश के किसी भी जिलें में 30 मिमी या उससे अधिक वर्षा दर्ज नहीं की गई है। दूसरी तरफ प्रदेश के 13 जिलों आगरा, अलीगढ़, बिजनौर, बदायूं, फर्रुखाबाद, फिरोजाबाद, गाजियाबाद, मथुरा, मेरठ, मुजफ्फरनगर, सहारनपुर, शाहजहांपुर और शामली के कुल 385 गांवों में 46830 लोग बाढ़ से प्रभावित हैं। गंगा नदी कचला ब्रिज (बदायूं) और फतेहगढ़ (फरुर्खाबाद) में खतरे के निशान पर बह रही है। वहीं, यमुना नदी का जलस्तर प्रयाग घाट (मथुरा) में खतरे के निशान पर है। गंगा नदी नरौरा (बुलंदशहर) में, यमुना नदी इटावा में, शारदा नदी पलिया कलां और शारदा नगर (लखीमपुर खीरी) में तथा घाघरा नदी एल्गिन ब्रिज (बाराबंकी) में खतरे के निशान के नजदीक बह रही है।

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