लखनऊ। सुशान्त गोल्फ सिटी के अटलपुरी में सावन की रिमझिम, कजरी के मधुर सुर और पारंपरिक लोकगीतों की मिठास के बीच वाइब्रेंट फोक आर्ट एंड कल्चर सोसाइटी एवं हिंदू सेना संगठन के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित दस दिवसीय मेघ मल्हार कार्यशाला का 21 अगस्त को समापन हुआ। कार्यशाला का आयोजन 12 अगस्त से 21 अगस्त तक अटलपुरी सेक्टर-1 स्थित ब्रह्मदेव मंदिर में किया गया। कार्यशाला के दौरान क्षेत्र की महिलाओं को अवधी भाषा के भजन, कजरी, झूला गीत एवं पारंपरिक लोकगीतों का प्रशिक्षण दिया गया। कार्यक्रम में महिलाओं ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया और सावन से जुड़े पारंपरिक गीतों को सीखने एवं प्रस्तुत करने में उत्साह दिखाया। कार्यशाला का वातावरण उस समय और भी भावपूर्ण हो उठा जब महिलाओं ने घिरि-घिरि आई सावन की बदरिया जैसे पारंपरिक सावनी गीतों की प्रस्तुति दी। लोकगीतों के इन सुरों ने न केवल सावन की संस्कृति और ग्रामीण जीवन की स्मृतियों को जीवंत किया, बल्कि क्षेत्र की समृद्ध अवधी लोक परंपरा की सुंदर झलक भी प्रस्तुत की। कार्यक्रम की आयोजक एवं वाइब्रेंट फोक आर्ट एंड कल्चर सोसाइटी की सचिव वंदना मिश्रा ने कहा कि लोकगीत हमारी संस्कृति की जीवंत धरोहर हैं। उन्होंने कहा, हमारा उद्देश्य अपनी लोकगीत परंपरा को संरक्षित करना और महिलाओं को कला एवं संस्कृति के माध्यम से स्वावलंबी बनाना है।





