लखनऊ में भारतेन्दु नाट्य अकादमी में बाल रंगमंच सजी शाम
लखनऊ। लखनऊ के गोमतीनगर स्थित भारतेन्दु नाट्य अकादमी (बीएनए) परिसर में सोमवार को दूसरे दिन नाटक ‘कर्मण्येवाधिकारस्ते… मुरली से मातृभूमि तक’ का प्रभावशाली मंचन किया गया। यह प्रस्तुति संस्कृति विभाग और भारतेन्दु नाट्य अकादमी की ग्रीष्मकालीन बाल रंगमंच कार्यशाला ‘रंग पाठशाला’ के समापन समारोह का हिस्सा है। नाटक की शुरूआत भगवान श्रीकृष्ण के अवतार और उनकी बाल लीलाओं से हुई। बच्चों ने मंच पर कृष्ण की माखन चोरी, गोपियों के साथ संवाद और अत्याचारी कंस के वध जैसे प्रसंगों को जीवंत रूप से प्रस्तुत किया। दर्शकों ने कलाकारों की प्रस्तुति की सराहना की।
धर्म और कर्तव्य का प्रस्तुति के माध्यम संदेश
इसके बाद कहानी हस्तिनापुर पहुंची, जहाँ महाभारत युद्ध के दौरान श्रीकृष्ण द्वारा अर्जुन को दिए गए गीता ज्ञान का प्रभावशाली मंचन हुआ। बच्चों ने इस प्रस्तुति के माध्यम से यह संदेश दिया कि गीता में वर्णित कर्म, धर्म और कर्तव्य के सिद्धांत आज भी उतने ही प्रासंगिक हैं। नाटक की कथा यात्रा स्वामी विवेकानंद तक पहुँची। प्रस्तुति में दशार्या गया कि कैसे श्रीकृष्ण की बांसुरी का संदेश राष्ट्रभक्ति और ‘वंदे मातरम्’ की भावना से जुड़ा। अंतिम दृश्यों में पर्यावरण संरक्षण, स्वच्छता और भारतीय संस्कारों के महत्व को भी उजागर किया गया।
बच्चों को थिएटर गेम्स के माध्यम से तैयार किया गया
नाटक के निर्देशक ने बताया कि इस वर्ष कार्यशाला में बड़ी संख्या में बच्चों ने भाग लिया। बच्चों को सीधे संवाद याद कराने के बजाय थिएटर गेम्स, इम्प्रोवाइजेशन और सहभागिता के माध्यम से तैयार किया गया। उन्होंने बच्चों की सक्रिय भागीदारी को नाटक की सफलता का श्रेय दिया। सह-निर्देशक अक्षय मेश्राम और रंजीता सचदेवा ने बच्चों के साथ मिलकर ‘थिएटर इन एजुकेशन’ की अवधारणा पर कार्य किया। उन्होंने बच्चों की रुचि और क्षमता के अनुसार कार्यशाला को तैयार किया। भारतेन्दु नाट्य अकादमी के निदेशक बिपिन कुमार ने कहा कि बच्चों को भी वयस्क कलाकारों के समान उत्कृष्ट रंगमंच मिलना चाहिए। अकादमी के अध्यक्ष डॉ. रतिशंकर त्रिपाठी ने अभिभावकों का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि दूर-दराज से आए बच्चों की भागीदारी ने इस कार्यशाला को अधिक सफल बनाया है।





