भगवान शिव की आराधना से धर्म, अर्थ, काम, मोक्ष की सहज प्राप्ति होती है
-श्रीमद् भागवत कथा ज्ञान यज्ञ का आयोजन
लखनऊ। श्रीमद् भागवत कथा ज्ञान यज्ञ का आयोजन 4 से 12 जुलाई तक गोमती नगर वास्तु खंड तीन के श्री सिद्धेश्वर महादेव मंदिर पार्क परिसर में किया जा रहा है। इस श्रीमद् भागवत कथा ज्ञान यज्ञ में कथा व्यास, नैमिष चक्र तीर्थ धाम वाले विनोदानंद शास्त्री जी महाराज है जबकि मुख्य यजमान स्वयं हनुमान जी महाराज और स्वागतकांक्षी शान्ति देवी जी है। शास्त्री जी बीते पन्द्रह वर्षों से कथा ज्ञान यज्ञ के माध्यम से संस्कार प्रदान कर रहे हैं। श्रीमद् भागवत कथा ज्ञान यज्ञ के तीसरे दिन सोमवार पांच जुलाई को विनोदानंद शास्त्री जी महाराज ने भक्तों को संदेश दिया कि भगवान शिव परम तपस्वी, ज्ञान, वैराग्य, भक्ति तथा योग साधना के शीर्षदेव हैं। उनकी आराधना से धर्म, अर्थ, काम, मोक्ष की सहज प्राप्ति होती है। शास्त्री जी महाराज ने बताया कि भगवान सदैव ही एकांत एवं निर्जन स्थान पर एकाग्र भाव से तपश्चर्या एवं ध्यान में लीन रहते हैं। इससे व्यक्ति सांसारिक भावों से दूर हो जाता है। इसके कारण संसारजनित विकार काम, क्रोध, लोभ, मोह, मद एवं अहंकार से मुक्ति मिलती है। भगवान शिव शरीर पर भस्म धारण करते हैं तथा मृगछाल पहनते हैं। हाथ में जल भरने हेतु कमंडल रखते हैं तथा खड़ाऊं धारण किए हैं। उनकी आवश्यकताएं अत्यंत सीमित हैं। इस मनोभावना के कारण व्यक्ति त्याग और असंग्रह की ओर प्रवृत्त होता है। भगवान शिव ने जगत कल्याण के लिए समुद्र मंथन से प्राप्त विष को अपने कंठ में धारण किया है। नीलकंठ स्वरूप हमें विपरीत परिस्थितियों में भी अविचल रहने की प्रेरणा देता है वहीं चंद्र शीतलता, निर्मलता एवं प्रकाश का प्रतीक है। श्रीमद् भागवत कथा ज्ञान यज्ञ के क्रम में विनोदानंद शास्त्री जी महाराज ने गंगा की महिमा का भी वर्णन किया। इस अवसर पर आरती-पूजन में भी बड़ी संख्या में भक्तगण एकत्रित हुए। कथा व्यास गद्दी मंच की भव्य सज्जा सभी भक्तों को दिव्यता से सराबोर कर रही है। भजनों के क्रम में आगंतुकों ने नाम तुम्हारा तारणहार, कब तेरा दर्शन होगा, तेरी प्रतिमा इतनी सुन्दर, तू कितना सुन्दर होगा का सरस रसपान किया। इस मनभावन भजन के उपरांत उन्होंने भजन भोले बाबा चले कैलाश बुंदिया पड़ने लगी सुनाया तो भक्तगण आनंद से झूम उठे।





