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हरियाणा में उपद्रवियों से वसूली के कानून के कुछ पहलू 

नूंह, गुरग्राम और पलवल जिलों में हुई हिंसा के बाद हरियाणा सरकार ने बुधवार को संपत्ति के नुकसान की वसूली के लिए एलान किया है। दरअसल, 2021 में हरियाणा लोक व्यवस्था में विघ्न के दौरान क्षति वसूली विधेयक-2021 पारित हुआ था। इस कानून के तहत दंगाइयों, उपद्रवियों से वसूली किए जाने का प्रावधान है। हर्जाना राशि न देने पर कानून में संपत्ति कुर्क करने का नियम भी है।

कानून की कुछ प्रमुख बातें

  • हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस की राय पर ट्रिब्यूनल चेयरमैन की नियुक्ति की जाती है। इसमें सरकार की तरफ से सदस्य भी लगाए जाने का नियम है। डीसी नुकसान के सभी दावों को ट्रिब्यूनल को ही भेजेंगे। ट्रिब्यूनल चार्टेड अकाउटेंट की मदद लेकर नुकसान का आकलन करेगा।
    हजार रुपये से लेकर दस करोड़ रुपये तक की सरकारी, निजी संपत्ति के नुकसान का दावा किया जा सकता है।
    आंदोलन के दौरान शांति व्यवस्था बनाए रखने के लिए तैनात अर्धसैनिक बलों, इसमें सेना पर खर्च राशि का दावा भी किया जा सकता है। पुलिस पर खर्च राशि की वसूली उपद्रवियों से नहीं होती है।
  • इस मामले में भी नुकसान की शिकायत पीड़ित अपने क्षेत्र के थाना प्रभारी को करेंगे। वे एफआईआर दर्ज कर पूरी जानकारी डीसी को देंगे। डीसी पीड़ितों से दावे के लिए आवेदन मांगेंगे। 21 दिन के भीतर आवेदन करना होगा। सरकारी संपत्ति को हुए नुकसान का दावा विभागों के अध्यक्ष करेंगे। एसडीएम या उससे ऊपर के रैंक का अधिकारी ही दावा कर सकेगा।
  • नुकसान का आकलन होने के बाद अगर उपद्रवी हर्जाना नहीं भरते हैं या ट्रिब्यूनल के समक्ष पेश नहीं होते हैं तो एक तरफा कार्रवाई की जा सकती है। नोटिस का कोई जवाब न देने पर उपद्रवी व अन्य की जमीन कुर्की की प्रक्रिया शुरू की जाएगी।

नुकसान की भरपाई के आधार

चल संपत्ति के मामले में पांच लाख रुपए तक के नुकसान के लिए 80 प्रतिशत यानी चार लाख रुपए का मुआवजा मिलेगा। पांच लाख से 10 लाख रुपए तक के नुकसान के लिए 70 प्रतिशत, 10 से 20 लाख रुपए तक के नुकसान के लिए 60 प्रतिशत, 20 से 50 लाख रुपए तक के नुकसान के लिए 40 प्रतिशत मुआवजा मिलेगा। 50 लाख रुपए से एक करोड़ रुपए तक के नुकसान के लिए 30 प्रतिशत, एक करोड़ रुपए से डेढ़ करोड़ रुपए तक के नुकसान के लिए 20 प्रतिशत का मुआवजा दिया जाएगा। मुआवजे की ऊपरी सीमा 50 लाख रुपये तक सीमित की गई है।
इसी प्रकार, अचल संपत्ति के मामले में एक लाख रुपए तक के नुकसान के लिए शत-प्रतिशत मुआवजा दिया जाएगा। एक लाख रुपए से दो लाख रुपए तक के नुकसान के लिए 75 प्रतिशत, दो से तीन लाख रुपए तक के लिए 60 प्रतिशत, तीन से पांच लाख रुपए तक के लिए 50 प्रतिशत मुआवजा दिया जाएगा।
पांच से सात लाख रुपए तक के लिए 40 प्रतिशत, सात लाख रुपए से 25 लाख रुपए तक के लिए 30 प्रतिशत का मुआवजा दिया जाएगा। ग्रामीण क्षेत्र में राजस्व आपदा प्रबंधन निधि के प्रावधानों के अनुसार मुआवजे की राशि निर्धारित है, हालांकि यह राशि कम है और सरकार इसे संशोधित करने पर विचार कर रही है।

 

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