लखनऊ। भातखण्डे संस्कृति विश्वविद्यालय, लखनऊ में आयोजित दीक्षारम्भ-2026 कार्यक्रम के अंतर्गत समापन दिवस अत्यंत गरिमामय एवं सांस्कृतिक वातावरण में सम्पन्न हुआ। इस अवसर पर पद्मश्री से सम्मानित सुप्रसिद्ध शास्त्रीय गायिका डॉ. अश्विनी भिड़े देशपांडे द्वारा विश्वविद्यालय के कलामंडपम सभागार में शास्त्रीय गायन की उत्कृष्ट प्रस्तुति दी गई, जिसने उपस्थित श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया। कार्यक्रम का शुभारम्भ विश्वविद्यालय की कुलपति प्रो. मांडवी सिंह, सुविख्यात शास्त्रीय गायिका डॉ. अश्विनी भिड़े देशपांडे तथा स्पिक मैके के प्रतिनिधि डॉ. हेमचंद्र पालीवाल द्वारा दीप प्रज्वलन कर किया गया। कार्यक्रम में शास्त्रीय गायन का शुभारंभ डॉ. अश्विनी भिड़े देशपांडे ने राग तोड़ी एवं मेघ मल्हार में मेघ श्याम घनश्याम की भावपूर्ण प्रस्तुति दी। इसके पश्चात उन्होंने बनारस घराने की प्रसिद्ध ठुमरी सुंदर सारी मोरी, मइके में मैल भई, का लेके जइबे गवनवा हो रामा प्रस्तुत कर श्रोताओं को भाव-विभोर कर दिया। उनके साथ हारमोनियम पर डॉ0 विनय मिश्रा, तबला पर विनोद लेले तथा तानपुरा पर अपूर्वा तिवारी ने प्रभावी संगत प्रदान की। कार्यक्रम में विश्वविद्यालय के प्रो. सृष्टि माथुर (विभागाध्यक्ष, गायन), डॉ. मनोज कुमार मिश्र (विभागाध्यक्ष, तालवाद्य) एवं ज्ञानेन्द्र दत्त बाजपेयी (विभागाध्यक्ष, नृत्य) सहित शिक्षकगण, शोधार्थी एवं विद्यार्थी बड़ी संख्या में उपस्थित रहे। इस अवसर पर कुलपति प्रो. मांडवी सिंह ने बताया कि ऐसे प्रसिद्ध कलाकार का विश्वविद्यालय में आगमन ही विद्यार्थियों की प्रेरणा के लिए महत्वपूर्ण है। इनको सुनना विद्यार्थियों के जीवन के लिए यादगार हो जाता है और यह उनके समग्र विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। विश्वविद्यालय के कुलसचिव एस. पी. सिंह ने बताया कि विश्वविद्यालय निरंतर ऐसे आयोजनों के माध्यम से विद्यार्थियों के व्यक्तित्व विकास, आत्मविश्वास एवं व्यावसायिक दक्षता को सुदृढ़ करने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा कि दीक्षारम्भ कार्यक्रम विद्यार्थियों के शैक्षणिक जीवन की सशक्त शुरूआत है, जो उन्हें लक्ष्य प्राप्ति के लिए उचित मार्गदर्शन प्रदान करता है। इसके अतिरिक्त, विश्वविद्यालय में संचालित चार दिवसीय कथक नृत्य कार्यशाला के चतुर्थ एवं समापन दिवस पर प्रख्यात गुरु जयंत कस्तुवार ने विद्यार्थियों को नृत्य में अभिनय, उपज, गत, नायिका भाव तथा अभिनय के विविध आयामों का गहन अभ्यास कराया। कार्यशाला का समापन अत्यंत सफल एवं गरिमामय रूप से सम्पन्न हुआ। इस प्रशिक्षण के माध्यम से विद्यार्थियों को शास्त्रीय नृत्य की सूक्ष्मताओं को समझने का विशेष अवसर प्राप्त हुआ। कार्यक्रम का समापन अत्यंत प्रेरणादायी एवं सांस्कृतिक सौहार्द के वातावरण में हुआ।





