back to top

शनि जयंती 16 मई को, शुभ योग में होगी शनिदेव की पूजा

मंत्र का 108 बार जप करने से शनि देव की कृपा प्राप्त होती है
लखनऊ। सूर्यदेव और छाया के पुत्र भगवान शनि का जन्म ज्येष्ठ अमावस्या तिथि पर माना जाता है। इसी कारण हर वर्ष इस तिथि को शनि जयंती के रूप में मनाई जाती है। धार्मिक मान्यता है कि जब शनि देव प्रसन्न होते हैं, तो अपने भक्तों को हर प्रकार के संकट से बचाते हैं और उनके जीवन में स्थिरता व न्याय का आशीर्वाद देते हैं। खास बात यह है कि इसी दिन वट सावित्री व्रत भी किया जाता है, जिससे इस तिथि का महत्व और अधिक बढ़ जाता है। शनि जयंती पर सूर्यास्त के बाद शनि देव की पूजा करना विशेष फलदायी माना गया है। वर्ष 2026 में ज्येष्ठ अमावस्या तिथि 16 मई की सुबह 5 बजकर 11 मिनट से शुरू होकर 17 मई की सुबह 1 बजकर 30 मिनट तक रहेगी। शनि देव की पूजा के लिए शाम का समय विशेष शुभ माना गया है। इस दिन रात 7 बजकर 5 मिनट से 8 बजकर 23 मिनट तक पूजा का श्रेष्ठ मुहूर्त रहेगा, जिसमें विधि-विधान से पूजा करने पर विशेष लाभ प्राप्त हो सकता है। पंचांग के अनुसार पहली शनिश्चरी अमावस्या 16 मई को पड़ेगी। इस दिन की खास बात यह है कि इसी दिन शनि जयंती भी मनाई जाती है। ज्योतिषशास्त्र के अनुसार यह एक बहुत ही दुर्लभ संयोग है कि शनि जयंती और शनि अमावस्या एक ही दिन पड़ें,ऐसा कई दशकों में केवल एक बार होता है।

शनि जयंती पूजा विधि
शनि जयंती के दिन कुछ विशेष उपाय और अनुष्ठान करने की परंपरा है। सुबह स्नान आदि से निवृत्त होकर पीपल के वृक्ष की जड़ में कच्चा दूध, गंगाजल और स्वच्छ जल अर्पित करना शुभ माना जाता है। इसके बाद पीपल की 11 बार परिक्रमा करनी चाहिए। ऊं शं शनैश्चराय नम: मंत्र का 108 बार जप करने से शनि देव की कृपा प्राप्त होती है। इसके साथ ही लोहा, काला तिल, जामुन, तेल और काले जूते जैसी वस्तुओं का दान करना भी लाभकारी माना गया है। शनि देव को न्याय का देवता कहा जाता है, जो हर व्यक्ति को उसके कर्मों के अनुसार फल देते हैं। जो लोग सच्चाई और ईमानदारी के मार्ग पर चलते हैं, उन्हें शनि देव का आशीर्वाद प्राप्त होता है और उनके जीवन में सुख-समृद्धि बनी रहती है। वहीं जिन लोगों पर शनि की कृपा नहीं होती, उन्हें कड़ी मेहनत के बाद भी सफलता पाने में कठिनाई का सामना करना पड़ सकता है।

दो बार मनाई जाती है शनि जयंती
शनि जयंती साल में दो बार मनाई जाती है। उत्तर भारत में इसे ज्येष्ठ अमावस्या के दिन मनाने की परंपरा है, जो इस वर्ष 16 मई को है। वहीं दक्षिण भारत में शनि जयंती वैशाख अमावस्या के दिन मनाई जाती है। अलग-अलग परंपराओं के बावजूद इस दिन का आध्यात्मिक महत्व समान रूप से महत्वपूर्ण माना जाता है।

RELATED ARTICLES

मंगल 11 को मेष राशि में करेंगे गोचर , तीन राशियों के लिए सुखद

शक्तिशाली और सकारात्मक फल देने की स्थिति में होते हैंलखनऊ। ज्योतिष शास्त्र में मंगल को ऊर्जा, साहस, शक्ति और भूमि का कारक माना जाता...

इस बार 59 दिनों का होगा ज्येष्ठ माह, आने वाले त्योहारों में होगी देरी

लखनऊ। हिंदू पंचांग का तीसरा ज्येष्ठ माह इस वर्ष 59 दिनों का है। इसका कारण तीन वर्ष में एक बार आने वाले भगवान विष्णु...

आलमबाग गुरुद्वारा में श्री सुखमनी साहिब पाठ का हुआ आरंभ

गुरु अर्जुन देव की शहादत पर समर्पित कार्यक्रम आयोजित लखनऊ। साहिब गुरु अर्जन देव महाराज की पावन शहादत को समर्पित सुखमनी साहिब पाठों की श्रृंखला...

मैनिफेस्टेशन की कला पर डॉ जय मदान ने साझा किया सफलता का मूल मंत्र

जीवन में सफलता और अच्छे अवसरों को आकर्षित करते हैंलखनऊ। फिक्की फ्लो लखनऊ चैप्टर ने आज एक प्रेरणादायक और बदलाव लाने वाला सेशन, होटल...

त्याग बलिदान और धर्म पालन की कथा देख भाव विभोर हुए दर्शक

रवींद्रालय में नाटक मैं तुझ में का मंचनलखनऊ। जी जे एकेडमी आॅफ ड्रामेटिक आर्ट्स लखनऊ द्वारा आज शुक्रवार को स्थानीय रवींद्रालय में नाटक मैं...

अपने किरदार के लिए जौनपुर की भाषा सीखना था चैलेंजिंग : रिंकू धवन

पूरी टीम ने हर कदम पर मेरा साथ दियालखनऊ। जल्द ही आॅल राइट टीवी पर आने वाले शो डॉन आॅफ जौनपुर सीजन 2 को...

मंगल 11 को मेष राशि में करेंगे गोचर , तीन राशियों के लिए सुखद

शक्तिशाली और सकारात्मक फल देने की स्थिति में होते हैंलखनऊ। ज्योतिष शास्त्र में मंगल को ऊर्जा, साहस, शक्ति और भूमि का कारक माना जाता...

इस बार 59 दिनों का होगा ज्येष्ठ माह, आने वाले त्योहारों में होगी देरी

लखनऊ। हिंदू पंचांग का तीसरा ज्येष्ठ माह इस वर्ष 59 दिनों का है। इसका कारण तीन वर्ष में एक बार आने वाले भगवान विष्णु...

रामहि ही राम लखन लागी जिभिया…

गौरैया संस्कृति संस्थान द्वारा कार्यशाला का आठवां दिनलखनऊ। आज शुक्रवार को कार्यशाला के आठवें दिन रंजना मिश्रा ने राम जी, हनुमान जी के भजन...