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नागपंचमी 21 अगस्त को, भक्त करेंगे नागदेवता की पूजा

 

लखनऊ। नाग पंचमी भारत के प्रमुख त्योहारों में से एक है। भारत, नेपाल और हिंदू आबादी वाले अन्य दक्षिण एशियाई देशों में लोग इस हिंदू त्योहार पर नागों की पारंपरिक पूजा करते हैं। नाग पंचमी श्रावण के शुक्ल पक्ष में मनाई जाती है। इस बार नाग पंचमी 21 अगस्त को पड़ रही है। नाग पंचमी का त्योहार देशभर में बड़ी धूमधाम से माना जाता है। सावन मास में दो नागपंचमी तिथि आती है। एक शुक्ल पक्ष और एक कृष्ण पक्ष। कृष्ण पक्ष यानी 7 जुलाई को जो नागपंचमी मनाई जाएगी वह सिर्फ राजस्थान, बिहार और झारखंड राज्यों में रहेगी। आइए जानते हैं नाग पंचमी की तिथि, मुहूर्त और महत्व के बारे में।

नागपंचमी तिथि और मुहूर्त

21 अगस्त को शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि 20 अगस्त को रात 12:23 मिनट पर पंचमी तिथि लगेगी। 21 तारीख को रात में 2:01 मिनट पर यह तिथि समाप्त हो जाएगी।

नागपंचमी का महत्व

भारत के प्राचीन महाकाव्यों में से एकए महाभारत में राजा जनमेजय नागाओं की पूरी जाति को नष्ट करने के लिए एक यज्ञ करते हैं। यह अपने पिता राजा परीक्षित की मृत्यु का बदला लेने के लिए था, जो तक्षक सांप के घातक काटने का शिकार हो गये थे। हालांकि, प्रसिद्ध ऋषि आस्तिक जनमजेय को यज्ञ करने से रोकने और नागों के बलिदान को बचाने की खोज में निकल पड़े। जिस दिन यह बलि रोकी गई वह शुक्ल पक्ष पंचमी थी, जिसे अब पूरे भारत में नाग पंचमी के रूप में मनाया जाता है। कई हिंदू धर्मग्रंथों और महाकाव्यों में सांप या नागा महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। महाभारत, नारद पुराण, स्कंद पुराण और रामायण जैसे ग्रंथों में सांपों से जुड़ी कई कहानियां हैं। एक और कहानी भगवान कृष्ण और नाग कालिया से जुड़ी है जहां कृष्ण यमुना नदी पर कालिया से लड़ते हैं और अंत में मनुष्यों को दोबारा परेशान न करने के वादे के साथ कालिया को माफ कर देते हैं। गरुड़ पुराण के अनुसार नाग पंचमी पर नागों की पूजा करने से भक्त को सौभाग्य और समृद्धि की प्राप्ति होती है।

नाग पंचमी के दिन क्या करें

नागपंचमी के दिन व्रत रखें। व्रत रखने से व्यक्ति को कालसर्प दोष से मुक्ति मिलती है। इसके अलावा इस दिन नाग देवताओं की पूजा के बाद नागपंचमी के मंत्रों का जजाप करें। कुंडली में राहु और केतु की दशा चल रही है उन्हें भी नाग देवता की पूजा करनी चाहिए। इस उपाय से राहु केतु दोष से मुक्ति मिलेगी। इस दिन शिवलिंग पर पीतल के लोटे से ही जल चढ़ाएं।

 

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