शहर के गुरुद्वारों में श्रद्धा व सत्कार से मनाया गया गुरु अर्जन देव जी का शहीदी दिवस, भक्तों ने चखा लंगर
लखनऊ। गुरुवार को श्री गुरू ग्रन्थ साहिब जी के संस्थापक, बाणी के बोहिथ, शहीदों के सरताज सिखों के पांचवें गुरू साहिब श्री गुरू अरजन देव जी महाराज का पावन शहीदी दिवस राजधानी के सभी गुरुद्वारों में बड़ी श्रद्वा व सत्कार से मनाया गया।
श्री गुरू सिंह सभा ऐतिहासिक गुरूद्वारा श्री गुरु नानक देव जी ऐतिहासिक गुरूद्वारा नाका हिन्डोला में भी बड़ी श्रद्धा एवं सत्कार के साथ मनाया गया। विशेष दीवान सुबह 6 बजे श्री सुखमनी साहिब के पाठ से आरम्भ हुआ कीर्तन, गुरमत विचार जो दोपहर 3:30 बजे तक चला।
ज्ञानी गुरजिंदर सिंह ने शहीदों के सरताज साहब श्री गुरु अर्जन देव जी महाराज की शहीदी को समर्पित कथा की गुरु ने प्रत्येक कष्ट हंसते-हंसते झेल कर यही अरदास की तेरा किया मीठा लगे हर नाम पदार्थ नानक मांगे…। नाका हिंडोला सुबह 7.15 से 8.15 बजे व दोपहर 1 से 2.45 बजे तक शबद कीर्तन गायन कर साध संगत को मंत्रमुग्ध कर दिया। गुरमत विचार बलविंदर सिंह देहरादून वाले ने बताया शहीदों के सरताज, सहनशील एवं त्याग के प्रतीक, बणी के बोहित, श्री आदि ग्रंथ साहिब जी के, श्री गुरु अर्जन देव जी जिन्होंने आध्यात्मिक जगत का सर्वोच्च स्थान प्राप्त किया, जिन्होंने घोर यातनाएं सहकार तपते हुए तवे पर बैठाकर शहीद किया गया। श्रीगुरु अर्जन देव जी की शहादत 30 मई 1606 को हुई थी,सिखों के पांचवें गुरु, गुरु अर्जन देव जी को मुगल बादशाह जहांगीर ने लाहौर में शहीद कर दिया था,उन्हें भीषण यातनाएं दी गईं, जैसे कि गर्म तवे पर बिठाना और गर्म रेत डालना,गुरु अर्जन देव जी धर्म के लिए अपने प्राणों की आहुति दी थी। कार्यक्रम का संचालन सरबजीत सिंह व मनमीत सिंह ने किया। दीवान की समाप्ति के पश्चात श्री गुरु सिंह सभा के प्रधान डॉ अमरजोत सिंह ने आई हुई संगत का धन्यवाद किया। तत्पश्चात गुरु का लंगर श्रधालुओं संगत में वितरित किया गया।
गुरुद्वारा आलमबाग में मनाया गया शहीदी दिवस:
शहीदी दिवस पर छबील का आयोजन
लखनऊ। गुरु अर्जुन देव महाराज की शहीदी को समर्पित करते” हुए गुरुद्वारा आलमबाग, लखनऊ द्वारा आज कानपुर रोड पर छबील सेवा का आयोजन किया गया। इस अवसर पर संगत एवं राहगीरों को ठंडा शरबत वितरित किया गया। छबील के लिए काले चने तथा दूध में रूह अफजा मिलाकर विशेष शरबत तैयार किया गया, जिसे श्रद्धापूर्वक संगत एवं आम जनमानस में वितरित किया गया। भीषण गर्मी के बीच आयोजित इस सेवा को लोगों ने गुरु साहिब की महान शिक्षाओं एवं मानवता की सेवा के संदेश से जोड़ते हुए सराहा। आज के सेवा कार्य में गुरुद्वारा कमेटी के सदस्य निर्मल सिंह, रतपाल सिंह गोल्डी, हरजीत सिंह, राजेन्द्र सिंह राजू, गुरदीप सिंह, हरविंदर सिंह, इकबाल सिंह, परविंदर सिंह तथा मनमोहन सिंह ने सक्रिय रूप से सेवा निभाई। गुरु अर्जुन देव जी महाराज की शहीदी मानवता, सत्य एवं धर्म की रक्षा के लिए सर्वोच्च बलिदान का प्रतीक है। इस अवसर पर संगत ने गुरु साहिब के बताए मार्ग पर चलने का संकल्प लिया।
गुरुद्वारा मानसरोवर में गुरबाणी कीर्तन से निहाल किया
गुरु अर्जुन देव साहिब जी का पावन शहीदी दिवस हर साल गुरुद्वारा मानसरोवर में मनाया जाता है। गुरुद्वारा साहिब के अध्यक्ष सरदार सम्पूर्ण सिंह बग्गा जी द्वारा बनाई गई स्त्री सत्संग सभा जिसमें , बीबी गुरमीत कौर बीबी जितेंद्र कौर पाली और बीबी हरजीत कौर बीबी उपिन्दर कौर, बीबी बलवीर कौर एवं साथी की अगवाही में दिनांक 10 मई से 18 जून तक सुबह 4 बजे से लेकर 7:30 बजे तक श्री सुखमनी साहिब के पाठ नितनेम के पाठ गुरबाणी कीर्तन 40 दिन निरन्तर दिवान सजे। पावन शहीदी दिवस पर सुबह 5 बजे से लेकर 11 बजे तक विशेष दिवान सजे जिसमें गुरुद्वारा मानसरोवर के हेड ग्रन्थी परमजीत सिंह पारस ने गुरु अर्जुन देव साहिब जी के जीवन पर कथा विचार मैं बताया कि गुरु अर्जुन देव साहिब जी ने मुगलों के जुल्म पर अपना धरम परिवर्तन नहीं करते हुए शहीदी दी ।गुरुद्वारा साहिब की हजूरी रागी भाई हरविंदर सिंह जी के जथे को गुरबाणी कीर्तन से निहाल किया। उपरांत गुरु का लंगर जिसमें शब्बील कच्ची लस्सी कड़ा प्रसाद चने का प्रसाद वितरित किया गया इस पावन शहीदी दिवस पर गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी के सभी सदस्य जिसमें इकबाल सिंह सुरेंद्र सिंह बग्गा चरणजीत सिंह छाबड़ा अमरजीत सिंह परमजीत सिंह चंदर गगनदीप सिंह बग्गा तथा गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी के सभी सदस्य मौजूद रहे।
गुरुद्वारा श्री गुरु सिंह सभा सदर
आज गुरुद्वारा श्री गुरु सिंह सभा सदर, लखनऊ में पंचम पातशाह गुरु अर्जन देव जी की पावन शहादत श्रद्धा एवं सम्मान के साथ मनाई गई। इस अवसर पर आयोजित विशेष दीवान में संगत ने बड़ी संख्या में उपस्थित होकर गुरु साहिब को श्रद्धासुमन अर्पित किए। दीवान के दौरान गुरु अर्जन देव जी के जीवन, उपदेशों एवं उनकी महान शहादत पर प्रकाश डाला गया। संगत को बताया गया कि गुरु अर्जन देव जी का जन्म 15 अप्रैल 1563 को गोइंदवाल साहिब में हुआ था। गुरु साहिब ने हरिमंदिर साहिब के निर्माण, आदि श्री गुरु ग्रंथ साहिब के संकलन तथा सिख पंथ के संगठन में महत्वपूर्ण योगदान दिया। सन 1606 में लाहौर में धर्म एवं मानवता की रक्षा के लिए उन्होंने अद्वितीय शहादत दी और सिख इतिहास के प्रथम शहीद गुरु बने। भाई गुरविंदर सिंह जी, गुरबाणी कीर्तनकार ने गुरबाणी कीर्तन द्वारा संगत को निहाल किया तथा गुरु अर्जन देव जी की शहादत और उनके उपदेशों से संगत को अवगत कराया। गुरुद्वारा सदर के अध्यक्ष सरदार हरपाल सिंह जग्गी ने अपने संबोधन में कहा कि गुरु अर्जन देव जी की शहादत सत्य, धैर्य, सहनशीलता एवं मानव कल्याण के लिए सर्वोच्च बलिदान का प्रतीक है। उनके जीवन से हमें सेवा, समर्पण और धर्म की रक्षा के लिए दृढ़ रहने की प्रेरणा मिलती है। उन्होंने बताया कि गुरु अर्जन देव जी की शहादत को समर्पित विशेष दीवानों की श्रृंखला के अंतर्गत दिनांक 21 जून 2026 (रविवार) को प्रात: 7:00 बजे से दोपहर 1:00 बजे तक गुरुद्वारा श्री गुरु सिंह सभा सदर, लखनऊ में विशाल विशेष दीवान आयोजित किया जाएगा। इस अवसर पर अमृतसर से विशेष रूप से आमंत्रित प्रसिद्ध कीर्तनी जत्था गुरबाणी कीर्तन द्वारा संगत को निहाल करेगा। कार्यक्रम उपरांत गुरु का अटूट लंगर संगत के लिए वितरित किया जाएगा। आज के कार्यक्रम में गुरुद्वारा प्रबंधक समिति के वरिष्ठ उपाध्यक्ष सरदार इंद्र सिंह छाबड़ा, सरदार नरेंद्र सिंह छाबड़ा, सरदार सुरेंद्र सिंह छाबड़ा, सरदार राजेंद्र सिंह बिंद्रा एवं सरदार कुलबीर सिंह कोहली सहित बड़ी संख्या में संगत उपस्थित रही।
यहियागंज : शबद कीर्तन सुन संगत हुई निहाल
लखनऊ। ऐतिहासिक गुरुद्वारा श्री गुरु तेग बहादुर साहिब जी यहियागंज में आज गुरु अर्जन देव जी महाराज के शहीदी दिवस को समर्पित 40 दिन से चल रहे सुखमनी साहिब जी के लड़ीवार पाठ की समाप्ति पर विशेष दीवान का आयोजन किया गया। इस अवसर पर विशेष रूप से श्री दरबार साहब अमृतसर से आए भाई बलदेव सिंह जी एवं भाई त्रिलोक सिंह जी ने शबद कीर्तन द्वारा संगतो को निहाल किया। गुरुद्वारा सचिव मनमोहन सिंह हैप्पी ने बताया कि डॉ गुरमीत सिंह के संयोजन में प्रात: 5:00 बजे से लेकर रात्रि 10 बजे तक विशेष दीवान का आयोजन किया गया। इस अवसर पर कच्ची लस्सी की छबील लगाई गई एवं गुरु का लंगर वितरित किया गया। इस मौके पर गुरु अर्जन देव जी महाराज के शहीदी दिवस को समर्पित कथा में बताया कि जहांगीर ने सन 1606 में गुरु अर्जन देव जी को यासा के नियम के तहत शहीद करने का फरमान जारी किया था, यासा में शहीद के खून की बूंद जमीन पर नहीं गिरती गुरुजी को गर्म तवे पर बैठाकर शहीद किया गया। गुरु अर्जुन देव जी का प्रकाश (जन्म) पंजाब के गोइंदवाल नगर जिला तरनतारन मे 1563 को पिता गुरु रामदास जी और माता भानी जी के घर हुआ। गुरु अर्जन देव जी की जिंदगी, आदर्श और योग्यता को देखते हुए गुरु रामदास जी ने उन्हें गुरता गद्दी की बख्शीश की। गुरु अर्जुन देव जी ने अपने जीवन में मानवता के भले के लिए अनेक कार्य किए और हमेशा ही सबको भले के कार्य करने का उपदेश दिया है। उन्होंने पहले 4 गुरुओं की और भक्तों की वाणी को एक जगह एकत्र करके आदि बीड़ की संपादना की। गुरु अर्जुन देव जी का जीवन हम सबके लिए मार्गदर्शक है जो हमें जिंदगी जीने का तरीका सिखाता है, कि मुसीबत के समय हमें एक दूसरे का सहारा बनना चाहिए, गुरबाणी ज्ञान को ही हमारी सबसे बड़ी अमीरी बताया है। हम सबको गुरबाणी के साथ जुड़ना चाहिए और गुरु उपदेश को अपने जीवन में कमाना चाहिए।





