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स्वतंत्रता दिवस से पहले तिरंगे के रंग में रंगा बाजार

लखनऊ। स्वतंत्रता दिवस को देखते हुए बाजार आजादी के रंग में रंग गया है। राजधानी लखनऊ में कई दुकानें तिरंगा, टोपी, बिल्ला, हैंडरिबन, टीशर्ट और गुब्बारे से सज गई हैं। स्कूलों में भी तैयारियां शुरू हो गई हैं। विभिन्न कार्यक्रमों को लेकर बच्चे रिहर्सल करने लगे हैं। 15 अगस्त को स्वतंत्रता दिवस धूमधाम से मनाया जाएगा। सरकारी, गैर सरकारी, संस्थान, विद्यालय, संगठन विविध कार्यक्रमों की तैयारियों में जुटे हैं। हर घर झंडा अभियान के तहत विभागों को तिरंगा झंड़ा खरीदने और वितरित करने का लक्ष्य सौंप दिया गया है। बाजारों में भी स्वतंत्रता दिवस से जुड़े सामानों की दुकानें सज गई हैं। आयोजन के लिए दुकानों पर खरीदार भी पहुंचने लगे हैं। शहर की दुकानों पर कई आकर के सूती और पॉलिस्टर के झंडे 50 से 250 रुपये तक बिक रहे हैं। वहीं बिल्ला, टोपी, हैंड रिबन आदि की मांग शुरू हो गई है। स्वतंत्रता दिवस से जुड़े सामानों की दुकान सजाए रिंकू गुप्ता के मुताबिक अभी छिटपुट ग्राहक ही आ रहे हैं। लेकिन उम्मीद है जैसे जैसे राष्ट्रीय पर्व करीब आएगा बिक्री तेज होगी। पिछले साल 15 अगस्त को आजादी के 100 साल पूरे होने पर अमृत महोत्सव मनाया गाय था। जिसे लेकर देश के प्रधानमंत्री ने हर घर तिरंगा अभियान की शुरूआत की थी। जिसमें लोगों से घर-घर पर तिरंगा फहराने का आग्रह किया गया था. इस साल भी ऐसा लग रहा है कि लोगों में देशभक्ति का प्यार उसी जोश के साथ देखने को मिलेगा। अब 15 अगस्त को कुछ ही दिन शेष है और राजधानी लखनऊ का एक बाजार राष्ट्रीय तिरंगे और तमाम चीजों से सज गया है। इस बाजार में तिरंगे, स्टैंड, टी-शर्ट, पगड़ी जैसे सामान मिल रहे हैं जो 15 अगस्त से जुड़े हुए हैं। एक दुकानदार ने बताया कि व्यापार कुछ दिनों से डाउन था, लेकिन अब ग्राहकों की भीड़ तिरंगे और अन्य सामग्री खरीदने के लिए बढ़ रही है। उनका कहना है कि इस बाजार में होलसेल के रेट में तिरंगे, स्टैंड, टी-शर्ट, पगड़ी, बैच जैसे तमाम सामान मिलते है। यहां पर जो सामान 10 रुपए के होलसेल के दाम में मिलता है। वही, चीज बाजार में 20 से 25 रुपए से कम का नहीं बिकता। इस बाजार में वो लोग ज्यादा खरीदारी करने आते है जो व्यापार करते है।
छोटे-बड़े तिरंगे संग रंगबिरंगी टोपी कर रही आकर्षित
स्वतंत्रता दिवस को देखते हुए बाजार आजादी के रंग में रंग गया है। राजधानी लखनऊ में कई दुकानें तिरंगा, टोपी, बिल्ला, हैंडरिबन, टीशर्ट और गुब्बारे से सज गई हैं। स्कूलों में भी तैयारियां शुरू हो गई हैं। विभिन्न कार्यक्रमों को लेकर बच्चे रिहर्सल करने लगे हैं। 15 अगस्त को स्वतंत्रता दिवस धूमधाम से मनाया जाएगा। सरकारी, गैर सरकारी, संस्थान, विद्यालय, संगठन विविध कार्यक्रमों की तैयारियों में जुटे हैं। हर घर झंडा अभियान के तहत विभागों को तिरंगा झंड़ा खरीदने और वितरित करने का लक्ष्य सौंप दिया गया है। बाजारों में भी स्वतंत्रता दिवस से जुड़े सामानों की दुकानें सज गई हैं। आयोजन के लिए दुकानों पर खरीदार भी पहुंचने लगे हैं।शहर की दुकानों पर कई आकर के सूती और पॉलिस्टर के झंडे 50 से 250 रुपये तक बिक रहे हैं। वहीं बिल्ला, टोपी, हैंड रिबन आदि की मांग शुरू हो गई है। स्वतंत्रता दिवस से जुड़े सामानों की दुकान सजाए रिंकू गुप्ता के मुताबिक अभी छिटपुट ग्राहक ही आ रहे हैं। लेकिन उम्मीद है जैसे जैसे राष्ट्रीय पर्व करीब आएगा बिक्री तेज होगी। इस साल भी ऐसा लग रहा है कि लोगों में देशभक्ति का प्यार उसी जोश के साथ देखने को मिलेगा। राजधानी लखनऊ का एक बाजार राष्ट्रीय तिरंगे और तमाम चीजों से सज गया है। इस बाजार में तिरंगे, स्टैंड, टी-शर्ट, पगड़ी जैसे सामान मिल रहे हैं जो 15 अगस्त से जुड़े हुए हैं।

छोटे झंडे से बड़े राष्ट्रीय ध्वज तक, दुकानों पर बढ़ी रेंज:
बाजारों में बच्चों के हाथ में लेकर चलने वाले छोटे झंडों के साथ मध्यम और बड़े आकार के राष्ट्रीय ध्वज उपलब्ध हैं। इसके अलावा तिरंगा बैज, रिस्ट बैंड, स्टिकर, पताकाएं, कागज की झंडियां और सजावटी पट्टियां भी दुकानों पर रखी गई हैं। दुकानदारों के अनुसार स्कूलों, आरडब्ल्यूए और निजी संस्थानों की ओर से सामूहिक कार्यक्रमों के लिए सामान की मांग आने लगी है। स्वतंत्रता दिवस के कार्यक्रमों में मंच, स्कूल परिसर, प्रवेश द्वार और कार्यक्रम स्थल सजाने के लिए इस्तेमाल होने वाली तिरंगा थीम की सामग्री भी बाजार में उपलब्ध है। छोटे सामान की खरीदारी व्यक्तिगत स्तर पर हो रही है, जबकि बड़े झंडों और सजावटी सामग्री की मांग संस्थानों और सोसायटियों से आ रही है।

15 अगस्त पर महिलाओं के बनाए झंडे फहराए जाएंगे
आजादी के पर्व से पहले लखनऊ के गांवों में सिलाई मशीनों की आवाज तेज हो गई है। सिकंदरपुर खुर्द की रेणू और गुड्डी यादव समेत करीब 150 महिलाएं दिन-रात तिरंगे तैयार कर रही हैं। इनके हाथों से तैयार झंडे स्वतंत्रता दिवस पर शहरभर में लहराएंगे। रेणू और गुड्डी के लिए यह सिर्फ झंडे सिलने का काम नहीं है। इसी काम ने उन्हें घर से बाहर निकलकर अपने पैरों पर खड़े होने का हौसला दिया है। कुछ साल पहले तक दोनों लोगों के सामने बैठकर बात करने में झिझकती थीं। अब रोज सिलाई मशीन पर बैठकर सैकड़ों-हजारों तिरंगे तैयार कर रही हैं। रेणू के समूह की महिलाएं अब तक 60-70 हजार तिरंगे तैयार कर चुकी हैं। वहीं, गुड्डी रोजाना करीब 1 हजार से 1500 तिरंगे बना रही हैं। लखनऊ में स्वयं सहायता समूहों के जरिये इस बार 5.5 लाख तिरंगे तैयार करने का लक्ष्य है। इसके लिए करीब 20 से 25 सेंटर बनाए गए हैं। यहां 150 महिलाएं काम कर रही हैं। एक तिरंगे पर महिलाओं को करीब 3 रुपए का मेहनताना मिल रहा है।

1 अगस्त से शुरू किया तिरंगा बनाने का काम
सिकंदरपुर खुर्द की रेणू ने एक अगस्त से तिरंगा बनाने का काम शुरू किया है। वह 2022 से स्वयं सहायता समूह से जुड़ी हैं। उनका कहना है कि समूह से जुड़ने से पहले महिलाओं के लिए घर से बाहर निकलना आसान नहीं था। परिवार की रोकटोक रहती थी और उन्हें ज्यादा जानकारी भी नहीं थी। लेकिन, समूह से जुड़ने के बाद उनकी जिंदगी बदल गई। अब वह दूसरी महिलाओं के साथ काम करती हैं, बाहर निकलती हैं और आत्मनिर्भर बनने की कोशिश कर रही हैं। रेणू के अनुसार, अब तक उनके समूह की महिलाएं करीब 60 से 70 हजार तिरंगे तैयार कर चुकी हैं। 12 अगस्त इसको पूरा करने का लक्ष्य है। इसके लिए हर तिरंगे पर करीब 3 रुपए मेहनताना मिलेगा।

गुड्डी रोजाना 1500 तिरंगे तैयार कर रहीं
सिकंदरपुर की गुड्डी यादव दो अगस्त से तिरंगा बनाने में लगी हैं। उनका कहना है कि उन्हें दो से तीन हजार झंडे बनाने का लक्ष्य मिला है और अब वह रोजाना करीब 1000 से 1500 तिरंगे तैयार कर रही हैं। उन्होंने बताया कि वह करीब पांच-छह साल से स्वयं सहायता समूह से जुड़ी हैं। उन्हें पहले बहुत सी चीजों की जानकारी नहीं थी। कहीं आना-जाना हो या किसी के सामने बैठकर बात करना हो तो वह झिझक जाती थीं। किसी के आने पर बातचीत में शामिल होने के बजाय वहां से हट जाती थीं, लेकिन अब हालात बदल गए हैं। समूह ने उन्हें बाहर की दुनिया को समझने और लोगों से बातचीत करने का आत्मविश्वास दिया है। उनके पति प्राइवेट नौकरी करते हैं। वह भी काम करके बचत कर रही हैं।

5.5 लाख तिरंगे तैयार करने का लक्ष्य
राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (एनआरएलएम) की डिस्ट्रिक्ट मैनेजर रागिनी सिंह के मुताबिक, लखनऊ में इस बार स्वयं सहायता समूहों के माध्यम से 5.5 लाख तिरंगे तैयार किए जा रहे हैं। शुरूआत में 5 लाख तिरंगे तैयार करने का लक्ष्य था। बाद में इसे बढ़ाकर साढ़े पांच लाख कर दिया गया। बता दें कि एनआरएलएम से 10 हजार से अधिक स्वयं सहायता समूह जुड़े हैं। इनमें से करीब 150 से 200 महिलाएं सीधे तिरंगा सिलाई के काम में लगी हैं।

लखनऊ में बनाए गए 20 से 25 सेंटर

लखनऊ में इसके लिए करीब 20 से 25 सेंटर बनाए गए हैं। सीएलएफ के माध्यम से कच्चा माल सेंटरों तक पहुंचाया जाता है और तैयार तिरंगे संबंधित ग्राम पंचायतों में भेजे जाते हैं। परिवहन और अन्य खर्च निकालने के बाद महिलाओं को प्रति तिरंगा करीब 3 से 3.5 रुपए मेहनताना मिलता है। तैयार तिरंगे ग्रामीणों और पंचायतों को फ्री में दिए जाएंगे।

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