भातखण्डे संस्कृति विश्वविद्यालय में भारतीय कला एवं संस्कृति पर विशेष व्याख्यान सम्पन्न
लखनऊ। भातखण्डे संस्कृति विश्वविद्यालय, लखनऊ के राय उमानाथ बली प्रेक्षागृह में आज ह्लभारतीय कला एवं संस्कृतिह्व विषय पर स्पिक मैके के चेयरमैन डॉ. किरण सेठ द्वारा एक विशेष एवं ज्ञानवर्धक व्याख्यान का आयोजन किया गया।
कार्यक्रम के प्रारम्भ में विश्वविद्यालय की कुलपति प्रो. माँडवी सिंह ने स्पिक मैके के चेयरमैन डॉ. किरण सेठ का पुष्पगुच्छ, स्मृति-चिह्न एवं अंगवस्त्र भेंट कर स्वागत एवं सम्मान किया। अपने सम्बोधन में कुलपति ने डॉ. किरण सेठ का विश्वविद्यालय आगमन पर अभिनंदन करते हुए उनके प्रति आभार व्यक्त किया। उन्होंने स्पिक मैके के साथ अपने पुराने जुड़ाव को स्मरण करते हुए कहा कि संस्था द्वारा भारतीय कला एवं संस्कृति को युवा पीढ़ी तक पहुँचाने का कार्य अत्यंत सराहनीय है। उन्होंने कहा कि संगीत और भारतीय संस्कृति को युवाओं से जोड़ना आज की महत्वपूर्ण आवश्यकता है। यदि देश का युवा भारतीय संगीत एवं संस्कृति को डॉ. किरण सेठ की दृष्टि से समझने लगे, तो भारत की सांस्कृतिक तस्वीर और अधिक समृद्ध एवं सशक्त होगी। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय भारतीय कला एवं संस्कृति के संरक्षण, संवर्धन और युवा पीढ़ी तक उसके प्रसार के लिए सदैव प्रतिबद्ध है।
इस अवसर पर स्पिक मैके के चेयरमैन डॉ. किरण सेठ ने विद्यार्थियों एवं शोधार्थियों को भारतीय संगीत एवं सांस्कृतिक परम्पराओं की गहनता और समृद्ध विरासत से परिचित कराया। उन्होंने कहा कि भारतीय शास्त्रीय संगीत केवल मंचीय प्रस्तुति तक सीमित नहीं है, बल्कि यह एक जीवन-पद्धति और साधना है। उन्होंने कहा कि शास्त्रीय संगीत की साधना व्यक्ति के बैठने और अनुशासन से ही प्रारम्भ हो जाती है। आज संगीत को केवल ह्लपरफॉर्मेंसह्व तक सीमित कर देना उचित नहीं है; इसके पीछे निहित साधना, अनुशासन, चिंतन और जीवन-मूल्यों को समझना आवश्यक है।
डॉ. सेठ ने युवाओं का आह्वान करते हुए कहा कि भारतीय संगीत को समझने के लिए अपनी जीवनशैली, खान-पान, रहन-सहन और सोच में भी भारतीयता के मूल तत्वों को आत्मसात करना आवश्यक है। उन्होंने विद्यार्थियों से प्रेरक रूप से कहा कि ह्लआपको तानसेन बनना है, कानसेन नहीं। उन्होंने स्पष्ट किया कि केवल सुनना पर्याप्त नहीं है, बल्कि जो कुछ सीखा जा रहा है, उसका निरंतर चिंतन, मनन और अभ्यास आवश्यक ह ै। विश्वविद्यालय के कुलसचिव एस. पी. सिंह ने कहा कि स्पीक मैके के साथ विश्वविद्यालय का एमओयू है । भारतीय संगीत व कला के प्रशिक्षण व संवर्धन हेतु हमे इसका सहयोग सतत प्राप्त हो रहा है।
कार्यक्रम में विश्वविद्यालय के विभागाध्यक्ष गायन प्रो0 सृष्टि माथुर, विभागधीयक्ष तालवाद्य मनोज कुमार मिश्र, विभागाध्यक्ष नृत्य ज्ञानेन्द्र दत्त बाजपेयी, सहायक आचार्य नृत्य मंजुल पंत सहित अन्य शिक्षकगण, शोधार्थी एवं बड़ी संख्या में विद्यार्थी उपस्थित रहे। विद्यार्थियों एवं शोधार्थियों ने भारतीय संगीत, कला और संस्कृति की विविध परम्पराओं से जुड़े महत्वपूर्ण विचारों को आत्मसात किया तथा व्याख्यान को अत्यंत प्रेरणादायी एवं उपयोगी बताया।





