लखनऊ। उत्तर प्रदेश में खाद्य प्रसंस्करण उद्योग तेजी से विस्तार कर रहा है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की निवेश-अनुकूल नीतियों के बीच प्रदेश में 40 खाद्य प्रसंस्करण परियोजनाओं को लेटर आॅफ कम्फर्ट (एलओसी) जारी किए गए हैं। इनमें पूर्वांचल और मध्यांचल की 21 से अधिक परियोजनाएं शामिल हैं। बड़े ब्रांडों की बढ़ती मौजूदगी से प्रदेश के जिलों में कृषि आधारित उद्योग, रोजगार और निवेश का नया नेटवर्क तैयार होने की उम्मीद है।
प्रयागराज, वाराणसी, गोरखपुर, अयोध्या, अमेठी और देवरिया से लेकर हरदोई, सीतापुर और कानपुर देहात तक खाद्य प्रसंस्करण, डेयरी, पेय पदार्थ और कृषि आधारित विनिर्माण से जुड़ी परियोजनाएं आकार ले रही हैं। इससे औद्योगिक विकास को पारंपरिक केंद्रों से आगे जिलों तक पहुंचाने में मदद मिल रही है। पूर्वांचल में खाद्य प्रसंस्करण क्षेत्र की 10 परियोजनाएं प्रयागराज, अमेठी, वाराणसी, गोरखपुर, अयोध्या, बाराबंकी और देवरिया जैसे जिलों में सामने आई हैं।
वरुण बेवरेजेस की प्रयागराज, अमेठी और गोरखपुर क्षेत्र में परियोजनाएं पेय पदार्थ निर्माण के क्षेत्र को विस्तार दे रही हैं। गोरखपुर में सीपी मिल्क एंड फूड प्रोडक्ट्स अपनी मौजूदगी बढ़ा रही है। वाराणसी में बनासकांठा डिस्ट्रिक्ट कोआॅपरेटिव मिल्क प्रोड्यूसर्स की अमूल डेयरी परियोजना भी पूर्वांचल में बढ़ते निवेश का प्रमुख उदाहरण है। रसिक रिफ्रेशमेंट और फॉरएवर डिस्टिलरी जैसी कंपनियों की परियोजनाएं भी क्षेत्र में औद्योगिक गतिविधियों का दायरा बढ़ा रही हैं। प्रदेश का बड़ा कृषि आधार खाद्य प्रसंस्करण उद्योगों के लिए कच्चे माल की उपलब्धता सुनिश्चित करता है।
वहीं सड़क, एक्सप्रेसवे और औद्योगिक बुनियादी ढांचे में सुधार निवेशकों के लिए नए अवसर तैयार कर रहा है। मध्यांचल में 12 परियोजनाओं के साथ खाद्य प्रसंस्करण क्षेत्र का नया औद्योगिक विस्तार देखने को मिल रहा है। हरदोई इस क्षेत्र में प्रमुख केंद्र के रूप में उभर रहा है। यहां वरुण बेवरेजेस, आईटीसी, बालाजी वेफर्स और हल्दीराम जैसी कंपनियों की परियोजनाएं प्रस्तावित हैं। कानपुर देहात में एचएल एग्रो प्रोडक्ट्स अपनी गतिविधियों का विस्तार कर रही है। सीतापुर में रेडिको खेतान और डालमिया चीनी मिल्स की परियोजनाएं कृषि आधारित उद्योगों को मजबूती दे रही हैं। इसके अलावा यूनाइटेड ब्रेवरीज, ग्लोबस स्पिरिट्स, नील श्री शुगर और आरएसपीएल लिमिटेड की परियोजनाएं भी मध्यांचल के औद्योगिक विस्तार का हिस्सा हैं।
खाद्य प्रसंस्करण परियोजनाओं को जारी किए गए एलओसी प्रदेश की निवेशक-केंद्रित औद्योगिक नीति को दशार्ते हैं। कंपनियों की जरूरत के अनुसार कस्टमाइज्ड इंसेंटिव और नीतिगत सहयोग उपलब्ध कराया जा रहा है। इसका उद्देश्य नई इकाइयों की स्थापना के साथ मौजूदा उद्योगों के विस्तार और कारोबार के विविधीकरण को बढ़ावा देना है।
सरकार की रणनीति कृषि उत्पादन को खाद्य प्रसंस्करण और संगठित विनिर्माण से जोड़कर जिलों में स्थानीय औद्योगिक इकोसिस्टम विकसित करने की है। इससे किसानों के लिए नए बाजार, कृषि उत्पादों का बेहतर वैल्यू एडिशन और युवाओं के लिए स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर बढ़ने की संभावना है। पूर्वांचल और मध्यांचल में बड़े ब्रांडों की बढ़ती मौजूदगी संकेत दे रही है कि उत्तर प्रदेश में औद्योगिक विस्तार अब नए जिलों तक पहुंच रहा है। खाद्य प्रसंस्करण क्षेत्र में बढ़ता निवेश प्रदेश की अर्थव्यवस्था को मजबूती देने के साथ एक ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था के लक्ष्य को भी गति दे सकता है।





