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पुस्तक लोकार्पण संग कई विभूतियों को मिला सम्मान

चेतना साहित्य परिषद ने मनाया 55वां संस्थापना दिवस समारोह
लखनऊ। उ.प्र. सरकार के पूर्व मुख्यमंत्री स्व. चन्द्रभानु गुप्त की प्रेरणास्पद स्मृति में लब्धप्रतिष्ठित संस्था चेतना साहित्य परिषद द्वारा अपना 55वां संस्थापना दिवस समारोह एक भव्य सारस्वत आयोजन करके मनाया गया।रवीन्द्रालय सभागार चारबाग में आयोजित इस समारोह की अध्यक्षता डॉ हरि शंकर मिश्र, पूर्व आचार्य, लखनऊ विश्वविद्यालय ने की तथा मुख्य अतिथि के रूप में डॉ उमाशंकर शुक्ल शितिकंठ और विशिष्ट अतिथि के रूप में रत्नेश गुप्तए संरक्षक, चेतना साहित्य परिषद मंच पर शोभायमान रहे। इस समारोह में कई विभूतियों को विभिन्न सम्मानों से अलंकृत किया गया। साथ ही संस्था की छन्दबद्ध काव्य प्रधान त्रैमासिक पत्रिका चेतना स्रोत डॉ आशुतोष वाजपेयी द्वारा संपादित ज्योतिष पत्रिका प्रेमनाथ तिथि पर्व पत्रिका पं. शारदा प्रसाद शर्मा शारदेन्दु की दो काव्य कृतियों नमन शहीदों को तथा आपरेशन सिन्दूर एवं आर्य दीन बन्धु सरल की काव्य कृति शून्य शब्द बनता है का भी लोकार्पण इस समारोह में किया गया। समारोह का संचालन संस्था के महामंत्री प्रमोद द्विवेदी प्रमोद ने किया। अभ्यागत साहित्यकारों का स्वागत संस्था के उपाध्यक्ष राम औतार पंकज ने किया। संस्थाध्यक्ष डॉ शिवभजन कमलेश ने संस्था के क्रियाकलापों के संबंध में विस्तार से जानकारी दी।
इस सारस्वत समारोह में चेतना गौरव सम्मान रवीन्द्र शर्मा को, चेतना रत्न सम्मान डॉ अखिलेश निगम अखिल को, चेतना श्री सम्मान डॉ प्रवीण कुमार श्रीवास्तव प्रेम को, डॉ दाऊजी गुप्त स्मृति सम्मान डॉ सुमन दुबे को, कृष्ण मुरारी विकल स्मृति सम्मान राजेन्द्र शुक्ल राज को, जगमोहन नाथ कपूर सरस स्मृति सम्मान जगदीप शुक्ल अंचल को, पं. शिव शंकर मिश्र स्मृति सम्मान श्याम नारायण पांडेय को, चमन लाल अग्रवाल स्मृति सम्मान प्रो. विश्वंभर शुक्ल को, रमन लाल अग्रवाल स्मृति सम्मान मंजुल मयंक मिश्र मंजर को, धर्मांश सम्मान सरोज कुमार पाण्डेय को, पं. रूप नारायण द्विवेदी स्मृति सम्मान रजनीश मिश्र को, जियालाल अग्रहरि स्मृति सम्मान श्रीमती प्रतिभा गुप्त को, शिव नारायण शर्मा स्मृति सम्मान डॉ चेतना पांडेय को और विशिष्ट सहयोग सम्मान राजा श्रीवास्तव को अनवरत करतल ध्वनि के बीच प्रदान किया गया। सम्मानित विभूतियों को सम्मान पत्र, स्मृति चिन्ह, अंगवस्त्र आदि से अलंकृत किया गया तथा कुछ प्रतीकात्मक धनराशि भी प्रदान की गई। इन सभी विभूतियों ने अपने विचार व्यक्त करते हुए सरस काव्य पाठ किया और साहित्य रस की वर्षा कर पूरे सभागार को आनन्द विभोर कर दिया। तत्पश्चात मंचासीन विद्वानों द्वारा अपने विचार व्यक्त किये गये। विशिष्ट अतिथि रत्नेश गुप्त ने अपने सम्बोधन में संस्था की सराहना करते हुए उसके उत्तरोत्तर उन्नति की कामना की और संस्था को हर प्रकार से सहयोग का आश्वासन दिया। उन्होंने सभी सम्मानित लोगों को शुभकामनाएं देते हुए उन्हें बधाई दी। मुख्य अतिथि डॉ उमाशंकर शुक्ल शितिकंठ ने सम्मानित लोगों को बधाई देते हुए अपने सम्बोधन में कहा कि चेतना साहित्य परिषद छन्दबद्ध काव्य के उन्नयन के लिए अत्यंत ही सराहनीय एवं महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है।

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