लखनऊ। बुद्ध पूर्णिमा को वैशाख पूर्णिमा या बुद्ध जयंती के नाम से जाना जाता है। बुद्ध पूर्णिमा दुनिया भर में बौद्ध समुदाय द्वारा मनाए जाने वाले सबसे महत्वपूर्ण त्योहारों में से एक है। हिंदू पंचांग के अनुसार, वैशाख मास के शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा तिथि को बुद्ध पूर्णिमा कहा जाता है। इस दिन गंगा स्नान और दान धर्म के कार्य का विशेष महत्व है। वैशाख पूर्णिमा एक अत्यंत पवित्र तिथि है, जिसे बुद्ध पूर्णिमा के रूप में भी जाना जाता है। बुद्ध पूर्णिमा 1 मई को मनाई जाएगी। इसी तिथि पर महात्मा बुद्ध का जन्म, ज्ञान प्राप्ति और महापरिनिर्वाण हुआ था, इसलिए यह तिथि हिंदू और बौद्ध दोनों धर्मों में विशेष महत्व रखती है। आइए जानते हैं सुख-शांति और पुण्य प्राप्ति के लिए आपको वैशाख पूर्णिमा के दिन क्या-क्या काम करने चाहिए।
बुद्ध पूर्णिमा की पूजन विधि :
प्रात:काल में स्नान के बाद सूर्यदेव को अर्घ्य देकर बहते जल में तिल प्रवाहित करें। पीपल के वृक्ष को भी जल अर्पित करना चाहिए। इस दिन चूंकि कुछ क्षेत्रों में शनि जयंती भी मनाई जाती है, इसलिए शनिदेव की तेल, तिल और दीप आदि जलाकर पूजा करनी चाहिए। शनि चालीसा का पाठ भी कर सकते हैं या फिर शनि मंत्रों का जाप कर सकते हैं, अपने सामर्थ्य के अनुसार दान-दक्षिणा भी अवश्य देनी चाहिए। बुद्ध पूर्णिमा के दिन बिहार के बोधगया में बोधिवृक्ष की पूजा की जाती है, वास्तव में यह एक पीपल का पेड़ है। इस दिन इसकी जड़ों में दूध और इत्र डाला जाता है और दीपक जलाए जाते हैं, वहीं कई लोग अपने-अपने क्षेत्र में पीपल की पूजा करते हैं। बुद्ध पूर्णिमा के दिन घर में भगवान सत्यनारायण की कथा के बाद पांच या सात ब्राह्मणों को मीठे तिल दान करने चाहिए। ऐसा करने से पापों का नाश होता है।
बुद्ध पूर्णिमा महत्व :
वैशाख पूर्णिमा भगवान बुद्ध के जीवन की तीन अहम चीजों से जुड़ी है। गौतम बुद्ध का जन्म, भगवान बुद्ध को ज्ञान प्राप्ति और बुद्ध का निर्वाण के कारण भी विशेष तिथि मानी जाती है। मान्यता है की इसी वृक्ष के नीचे गौतम बुद्ध को ज्ञान प्राप्त हुआ था। ऐसे में बुद्ध पूर्णिमा के दिन पूरी दुनिया के बौद्ध मठों में भगवान बुद्ध के उपदेश सुने जाते हैं। उनके सभी अनुयायी उनकी शिक्षाओं को याद करते हैं और उनकी पूजा-अर्चना करते हैं। भगवान बुद्ध ने हमेशा लोगों को सत्य और अहिंसा के मार्ग पर चलने की प्रेरणा दी। कहते हैं कि अगर बुद्ध पूर्णिमा के दिन जल से भरा कलश और पकवान दान किए जाएं तो गौ दान करने के समान पुण्य प्राप्त होता है।
शांति और शुद्धि के लिए जरूर करें ये काम
पूर्णिमा के दिन किसी पवित्र नदी जैसे गंगा, यमुना आदि में स्नान करने का विशेष महत्व है। इससे शरीर और मन दोनों की शुद्धि होती है। अगर आपके लिए नदी में जाना संभव न हो, तो घर पर ही नहाने के पानी में थोड़ा-सा गंगाजल मिलाकर भी स्नान कर सकते हैं, जो फयदायी होता है। स्नान के बाद साफ-सुथरे सफेद खासकर सफेद रंग के कपड़े पहनें। अपनी श्रद्धा के अनुसार, आप इस तिथि पर भगवान बुद्ध और भगवान विष्णु की पूजा कर सकते हैं। मन की शांति के लिए बुद्ध पूर्णिमा पर भगवान बुद्ध के वचनों का पाठ और ‘शांतिपाठ’ जरूर करें।
गौदान के समान है इन चीजों का दान
वैशाख या बुद्ध पूर्णिमा पर दान-पुण्य करने के साथ-साथ गरीबों व जरूरतमंदों को भोजन कराने का विशेष महत्व माना गया है। वैशाख पूर्णिमा के दिन ठंडी चीजों का दान करना महापुण्यकारी माना गया है। ऐसे में आप पानी से भरा मिट्टी का घड़ा दान कर सकते हैं। वैशाख पूर्णिमा पर यह दान करने से व्यक्ति को साक्षात ‘गौदान’ (गाय के दान) के समान पुण्य मिलता है।
अपने पितरों को प्रसन्न करने के लिए आप पूर्णिमा के दिन किसी जरूरतमंद को पंखा, छाता, चप्पल, अन्न और रसीले फलों का दान जरूर करें।
पूर्णिमा की रात करें ये काम
पूर्णिमा की रात चंद्रमा को जल अर्पित करने से साधक को मानसिक शांति, शीतलता और सकारात्मक परिणाम मिलते हैं। चंद्रमा को अर्घ्य देते समय आप ऊं एं क्लीं सोमाय नम: मंत्र का जप कर सकते हैं। इसके साथ ही पूर्णिमा की रात को मुख्य द्वार पर दीपक भी जरूर जलाएं। इससे साधक को मां लक्ष्मी की कृपा मिलती है, जिससे धन संबंधी समस्याओं दूर होती हैं।
भूलकर भी न करें ये काम
पूर्णिमा के दिन क्रोध या वाद-विवाद करने से बचें।
इस दिन पर बाल या नाखून न काटना भी अच्छा नहीं माना जाता।
पूर्णिमा तिथि पर मांसाहार व शराब के सेवन से परहेस करना चाहिए।
अगर आप पूर्णिमा का व्रत रखते हैं, तो दिन के समय सोने से बचना चाहिए
1100 मोमबत्तियों रौशन होगी बुद्ध प्रतिमा
लखनऊ। शहर में आज भगवान बुद्ध की जयंती धूमधाम से मनाई जायेगी। विभिन्न बुद्ध विहारों में अनुयायी वंदना करेंगे।
बुद्ध पूर्णिमा पर सुबह से ही विभिन्न कार्यक्रम शुरू होंगे। जिसमें गौतम बुद्ध मार्ग के बोधिसत्व विहार, बालागंज बौद्ध विहार शांति उपवन, तथागत गौतम बुद्ध विहार कृष्णा नगर, बुद्ध विहार भीम नगर आलमबाग, रिसालदार पार्क, सेक्टर डी एलडीए कालोनी के पंचशील बुद्ध विहार में सुबह आठ बजे से आयोजन होंगे। वहीं पिपरसंड के शाक्य मुनि गौतम बुद्ध विहार, तेलीबाग के महामाया बुद्ध विहार, डॉ अम्बेडकर बुद्ध विहार छोटी जुग्गौली, इंदिरा नगर के यशोधरा बुद्ध विहार व आचार्य मोतीराम शास्त्री बुद्ध विहार, सुल्तानपुर रोड के करूणा बुद्ध विहार, मोहम्मद नगर मलिहाबाद के राहुल बुद्ध विहार, शहीद पथ के मैत्रेय बुद्ध विहार, राजाजीपुरम सेक्टर एफ के डॉ अम्बेडकर बुद्ध विहार व बुद्ध स्थली परिवर्तन चौक में सुबह 11 बजे से कार्यक्रम होंगे।
वहीं सनातन महासभा द्वारा प्रत्येक पूर्णिमा पर सनातन समागम व आदि गंगा माँ गोमती महाआरती का आयोजन हरिद्वार की तर्ज पर झूलेलाल वाटिका, गोमती तट पर शाम 6:30 बजे होगा। राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. प्रवीण व महासचिव देवेंद्र शुक्ल ने संयुक्त रूप से बताया कि बैशाख पूर्णिमा व भगवान बुद्ध जयंती पर सनातन समागम में सांस्कृतिक संध्या के साथ हाइस्कूल/इंटर के मेधावी छात्र/छात्राओं का सम्मान होगा और नशा व अपराध मुक्त उ.प्र. विषयक स्लोगन, पेंटिंग व निबंध प्रतियोगिता होगी साथ ही दीपदान संकल्प लिया जाएगा और सांस्कृतिक कार्यक्रम के अंतर्गत भगवान बुद्ध की झांकी और अन्य कथक नृत्य प्रस्तुत किये जायेंगे और 05 विभूतियों को सनातन शिरोमणि सम्मान भी दिए जाएंगे।
बुद्ध जयंती पर सुबह होगी पंचशील पूजा
बुद्ध पूर्णिमा पर्व पर 1 मई को शहर के विभिन्न बुद्धविहारों में अनुष्ठान होंगे। परिवर्तन चौक पर समन्वय सेवा समिति की ओर से शाम पांच बजे भगवान बुद्ध प्रतिमा पर 1100 मोमबत्तियों रौशन की जाएंगी। भगवान बुद्ध की जयंती, ज्ञान प्राप्ति और निर्वाण तीनों वैशाख की पूर्णिमा को हुआ था। बोद्ध धर्मकुर सभा की ओर से 156 गौतम बुद्ध मार्ग पर स्थित बोधिसत्व विहार में भगवान बुद्ध की जयंती पर सुबह 9 बजे पंचशील पूजा होगी। रिसालदार पार्क के पास स्थित विहार में भारतीय बौद्ध समिति की ओर से त्रिविधि पावनी पूर्णिमा पर सुबह 8 बुद्ध पूजा, सामूहिक बुद्ध वंदना और शीलग्रहण होगा। अंतरराष्ट्रीय बौद्ध शोध संस्थान की ओर से शोभा यात्रा शाम चार बजे हजरतगंज अम्बेडकर प्रतिमा से रिसालदार बौद्ध विहार तक निकाली जाएगी। रात नौ बजे उपासकों को भोजनदान करवाया जाएगा। इसके अलावा शहर में एलडीए कानपुर रोड स्थित महेन्द्र बुद्ध विहार में विविध अनुष्ठान होंगे।





