तीन रचनाओं को सस्वर सुनाकर लोगों को मंत्र मुग्ध कर दिया
लखनऊ। साहित्यिक संस्था ‘अमृतायन’ के तत्वावधान में आज यू.पी. प्रेस क्लब के सभागार में आयोजित साहित्य समागम में तीन साहित्यकारों की कृतियों के लोकार्पण समारोह का आयोजन किया गया।
समारोह में मुख्य अतिथि डॉ. गंगा प्रसाद शर्मा, विशिष्ट अतिथि डॉ. राम सागर यादव, राम बहादुर मिश्र, डॉ. शिव भजन कमलेश और पं. आदित्य द्विवेदी ने नवगीतकार डॉ. अशोक अज्ञानी की कृति लौट आओ फिर परिन्दों (गीत – नवगीत संग्रह), वरिष्ठ साहित्यकार रामशंकर वर्मा की कृति कटे अँधेरी रात (दोहा संग्रह) तथा गीतकार पुष्पेन्द्र ‘प्रेमी’ की कृति तुम भी पत्थर हो जाओगे (गीत संग्रह) का लोकार्पण किया।
कार्यक्रम में डॉ. गंगा प्रसाद शर्मा ने कटे अँधेरी रात दोहा कृति पर अपने विचार रखते हुए कहा कि आज साहित्य के समक्ष नयी चुनौतियाँ है, जिन्हें स्वीकार करना होगा। पुष्पेन्द्र प्रेमी के गीत संग्रह तुम भी पत्थर हो जाओगे को आधार बनाते हुए श्रेष्ठ साहित्यकार राम शंकर वर्मा ने कहा कि हिन्दी की गीत विधा अपने पूर्ण उत्कर्ष पर है, जिसे इस कृति में देखा जा सकता है। कवि डॉ. अशोक अज्ञानी के गीत नवगीत संग्रह लौट आओ फिर परिन्दों पर बोलते हुए शिव भजन कमलेश ने कहा कि ‘अज्ञानी’ जी के नवगीत राष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान बना चुके हैं। डॉ. राम सागर यादव ने अमृतायन संस्था के सकारात्मक कार्यों को रेखांकित किया। रामबहादुर मिश्र ने अपने अध्यक्षीय वक्तव्य में वर्तमान साहित्यिक परिदृश्य की सराहना की।
साहित्यिक समारोह के अगले क्रम में लोक गायिका डॉ. रंजना अग्रहरि ने अपनी खनकती हुई आवाज में तीनो कृतियों की चयनित तीन रचनाओं को सस्वर सुनाकर लोगों को मंत्र मुग्ध कर दिया। इस अवसर पर केवल प्रसाद सत्यम, कुमार तरल, डॉ. अरविन्द झा, दिनेश तिवारी अचलेश सिंह, संदीप यादव सहित अन्य साहित्यकार और साहित्यसुधी श्रोता उपस्थित थे। धन्यवाद ज्ञापन कवि सूर्यप्रकाश सूरज तथा संचालन राजेन्द्र विश्वकर्मा ने किया।





